एक्सप्रेसवे के मामले में सिंगापुर से आगे निकला ये राज्य ! 2,000 किमी नेटवर्क बनाने की तैयारी
Udaipur Times, Expressway network : एक समय था जब उत्तर प्रदेश की पहचान जाम, खराब सड़कों और शहरों के बीच लंबे सफर से होती थी, लेकिन अब राज्य तेजी से देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल हो गया है। पहले से चालू और निर्माणाधीन परियोजनाओं को मिलाकर उत्तर प्रदेश करीब 2,000 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे नेटवर्क की ओर बढ़ रहा है। यही वजह है कि सड़क अवसंरचना के विस्तार को लेकर अब इसकी तुलना सिंगापुर जैसे आधुनिक सड़क नेटवर्क वाले देश से की जा रही है।
राज्य में 1,194.5 किलोमीटर एक्सप्रेसवे चालू
उत्तर प्रदेश में अब तक 1,194.5 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे चालू हो चुके हैं। इनमें यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं। इन एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली से गाजीपुर तक लगभग 900 किलोमीटर का सफर करीब 10 घंटे में पूरा किया जा सकता है।
ये हैं प्रमुख एक्सप्रेसवे
यमुना एक्सप्रेसवे – 165.5 किलोमीटर, ग्रेटर नोएडा से आगरा।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे – लगभग 302 किलोमीटर।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे – 340 किलोमीटर, लखनऊ से गाजीपुर।
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे – 296 किलोमीटर, चित्रकूट से इटावा।
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे – करीब 91 किलोमीटर, गोरखपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ता है।
कई नए प्रोजेक्ट पर तेजी से काम
राज्य सरकार कई नई परियोजनाओं पर भी तेजी से काम कर रही है। इनमें सबसे महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे है, जिसकी लंबाई करीब 594 किलोमीटर होगी। यह मेरठ को प्रयागराज से जोड़ेगा। इसके पूरा होने पर पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा और आसान हो जाएगी।
इसके अलावा 63 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे भी निर्माणाधीन है। इसके चालू होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर सिर्फ 35 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। हाल ही में सरकार ने 333 किलोमीटर लंबे विंध्य एक्सप्रेसवे और उससे जुड़े लिंक कॉरिडोर को भी मंजूरी दी है।
सिंगापुर से क्यों हो रही तुलना?
सिंगापुर दुनिया के सबसे आधुनिक सड़क नेटवर्क वाले देशों में गिना जाता है। वहां करीब 10 प्रमुख एक्सप्रेसवे हैं, जिन पर ट्रैफिक सिग्नल नहीं होते और सभी इंटरचेंज ग्रेड-सेपरेटेड हैं। सिंगापुर का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे पैन आइलैंड एक्सप्रेसवे (PIE) है, जिसकी लंबाई करीब 42.8 किलोमीटर है।
हालांकि, उत्तर प्रदेश और सिंगापुर की तुलना केवल एक्सप्रेसवे नेटवर्क की कुल लंबाई के आधार पर की जा रही है। दोनों की भौगोलिक स्थिति और जरूरतें अलग हैं। सिंगापुर का कुल क्षेत्रफल करीब 735 वर्ग किलोमीटर है, जबकि उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल 2.4 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक और आबादी 24 करोड़ से ज्यादा है। इसलिए उत्तर प्रदेश का उद्देश्य बड़े भौगोलिक क्षेत्र में शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और जिलों को तेज सड़क संपर्क से जोड़ना है।
निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों के अनुसार एक्सप्रेसवे केवल यात्रा का समय कम नहीं करते, बल्कि उद्योग, व्यापार और निवेश को भी गति देते हैं। बेहतर सड़क संपर्क से माल परिवहन आसान होता है, लॉजिस्टिक्स लागत घटती है और नए औद्योगिक कॉरिडोर विकसित होते हैं। यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे पहले ही कई औद्योगिक परियोजनाएं, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए शहर विकसित हो रहे हैं। वहीं, गंगा एक्सप्रेसवे और अन्य प्रस्तावित कॉरिडोर भविष्य में निवेश और रोजगार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
