टखमण की तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला प्रारम्भ

टखमण की तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला प्रारम्भ

टखमण-28 संस्था के गौरवमयी 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संस्था की ओर से स्वर्णजयंति आयोजन के तहत तीन दिवसीय अन्तराष्ट्रीय कार्यशाला का तिक शुभारम्भ आज सांय अम्बामाता क्षेत्र में स्थित चरक छात्रावास के पीछे संस्थां के नव निर्मित सभागार में आयोजित एक समारोह से हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से 20 से ज्यादा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार, मूर्तिकार पहुंचे।

 

टखमण की तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला प्रारम्भ

टखमण-28 संस्था के गौरवमयी 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संस्था की ओर से स्वर्णजयंति आयोजन के तहत तीन दिवसीय अन्तराष्ट्रीय कार्यशाला का तिक शुभारम्भ आज सांय अम्बामाता क्षेत्र में स्थित चरक छात्रावास के पीछे संस्थां के नव निर्मित सभागार में आयोजित एक समारोह से हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से 20 से ज्यादा राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार, मूर्तिकार पहुंचे।

समारोह के मुख्य अतिथियों में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के अतिरिक्त निदेशक सुधांशु सिंह, प्रो सुरेश शर्मा एवं गोवर्धनसिंह पंवार थे। सभी अतिथियों ने गणपति की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर समारोह का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के अतिरिक्त निदेशक सुधांशु सिंह ने कहा कि यह उदयपुर के लिए बहुत ही गर्व की बात है कि इस तरह की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला यहां पर हो रही है। इसका लाभ निश्चत तौर से यहां के स्थानीय कलाकारों को भी मिलेगा। यहां आने वाले कलाकारों की जो भी आकांक्षाएं हैं अपेक्षाएं हैं निश्चित तौर पर पूरी होगी। जब तक कलाकार अपनी कलाओं का यहां पर प्रदर्शन करेंगे तो उदयपुरवासियों की ओर से उन्हें निश्चित ही गुड फील होगा।

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चेयरपर्सन प्रोफेसर सुरेश शर्मा ने टखमण की अब तक की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि 50 वर्षों की इस गोरवमयी यात्रा में कई उतार- चढ़ाव आये लेकिन इसके कर्मठ और जुझारू सदस्यों की बदौलत वह कठिनाइयों का दौर भी हमने पार किया और स्वर्णजयंति समारोह हम यहां मना रहे हैं। आज एक ओर खुशी की बात यह है कि संस्था के सदस्य टखमण की स्वयं की आर्ट गेलेरी में बैठे हैं। हालांकि अभी यह निमार्णाधीन है लेकिन शीघ्र ही इस भवन का लोकार्पण किया जायेगा।

गोवर्धनसिंह पंवार ने कहा कि उनका भी टखमण के साथ शुरूआत से ही जुड़ाव रहा है। आज उनकी भी प्रतिभा को टखमण ने ही पहचान दी है। टखमण ऐसी संस्था है जिसने 50 वर्षों की गौरवमयी यात्रा के दौरान कई ऐसे कलाकार और मूर्तिकार दिये हैं जिन्होंने अपनी राष्ट्रीय ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय पहचान भी बनाई है।

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