अश्व पूजन की परम्परा का निर्वहन किया भंवर बावजीराज साहिब हरितराज सिंह मेवाड़ ने

मेवाड़ में अश्व पूजन की परम्परा सदियों से चली आ रही है
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ashwa poojan

उदयपुर 5 अक्टूबर 2022 । शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर मेवाड़ में 'अश्व पूजन' की परम्परा का निर्वहन करते हुए भंवर बावजीराज साहिब हरितराज सिंह मेवाड़, उदयपुर ने पुरोहितजी एवं पण्डितों के मंत्रोच्चारण के साथ अश्वों का पूजन किया।

अश्वों को पारम्परिक तरीकें से श्रृंगारित कर 'लीला की पायगा पूजन स्थल पर लाया गया। जहाँ मंत्रोच्चारण पर भंवर हरितराज सिंह मेवाड़ ने भंवर बाईसा प्राणेश्वरी कुमारी मेवाड़ के साथ 'अश्व पूजन' किया। 

पूजन में सुसज्जित राजस्वरूप, नागराज व अश्वराज अश्वों पर अक्षत, कुंकुम, पुष्पादि चढ़वाकर आरती की गई तथा अश्वों को भेंट में आहार, वस्त्रादि के साथ ज्वारें धारण करवाई गई।

मेवाड़ में अश्व - पूजन की परम्परा सदियों से चली आ रही है। महाराणा प्रतिवर्ष होने वाली शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर्यन्त संध्याकाल में नवमी होने पर उदयपुर के राजमहल स्थित माणक चौक में सरदार- उमरावों की उपस्थिति में अश्वों का पूजन करते थे। अश्वों के साथ गज का पूजन होने पर 'अश्व-गज पूजन भी कहा जाता रहा है।

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