एक साथ पढ़ाई कर दो भाई बहनों ने रचा इतिहास ! दूसरे प्रयास में NEET में पाई सफलता
Udaipur Times, New Delhi : कहते हैं कि अगर मेहनत के साथ किसी अपने का साथ मिल जाए तो मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य भी आसान हो जाता है। बिहार के नवादा जिले के एक भाई-बहन ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। पकरीबरावां थाना क्षेत्र के बाजितपुर गांव के रहने वाले रितेश कुमार और उनकी बहन ऋचा ने NEET UG 2026 में शानदार सफलता हासिल की है। दोनों ने एक साथ तैयारी की और परीक्षा के दूसरे प्रयास में सफलता हासिल कर अपने परिवार का नाम रोशन किया।
रितेश और ऋचा की कहानी इसलिए खास है क्योंकि दोनों ने अपनी मेडिकल की तैयारी के दौरान एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ा। पढ़ाई से लेकर परीक्षा की तैयारी तक दोनों ने साथ-साथ मेहनत की और जब पहले प्रयास में मनचाहा परिणाम नहीं मिला तो एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए दोबारा तैयारी शुरू की।
भाई ने हासिल किए 655 अंक, AIR 1160
NEET UG 2026 में रितेश कुमार ने 655 अंक हासिल किए। उनकी ऑल इंडिया रैंक 1160 रही। वहीं उनकी बहन ऋचा ने 622 अंक प्राप्त किए और उन्हें ऑल इंडिया रैंक 4685 मिली।
दोनों भाई-बहन ने राजस्थान के कोटा में रहकर NEET की तैयारी की थी। लंबे समय तक घर और परिवार से दूर रहकर पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन मेडिकल में दाखिला लेने का सपना दोनों को लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित करता रहा।
छठी कक्षा से कोटा में एक साथ रहकर पढ़ाई
रितेश और ऋचा ने अपनी पढ़ाई के लिए छठी कक्षा से ही कोटा का रुख कर लिया था। बच्चों की पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए उनकी मां और दादा भी उनके साथ कोटा में रहते थे। वहीं उनके पिता बिहार में रहकर अपना व्यवसाय संभालते थे।
परिवार के लिए यह आसान फैसला नहीं था। बच्चों को घर से दूर रखकर पढ़ाना और उनकी पढ़ाई के साथ-साथ उनकी देखभाल करना बड़ी चुनौती थी। लेकिन माता-पिता ने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दी और उनके सपने को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग किया।
रोजाना करते थे 12 से 13 घंटे पढ़ाई
NEET की तैयारी के दौरान दोनों भाई-बहन ने पढ़ाई के लिए कड़ा रूटीन बनाया हुआ था। वे रोजाना करीब 12 से 13 घंटे पढ़ाई करते थे। कोचिंग की कक्षाओं के बाद करीब 6 से 7 घंटे सेल्फ स्टडी पर ध्यान देते थे।
दोनों साथ बैठकर पढ़ाई करते थे। अगर किसी विषय या टॉपिक में परेशानी आती तो एक-दूसरे से चर्चा करते थे। परीक्षा की तैयारी के दौरान दोनों ने सोशल मीडिया से भी दूरी बनाए रखी, ताकि उनका पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रहे।
पहले प्रयास की कमियों से सीखा और दूसरे प्रयास में बदली रणनीति
NEET के पहले प्रयास में दोनों को मनचाही सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी कमियों को समझने की कोशिश की। उन्होंने यह देखा कि तैयारी में कहां कमी रह गई और किन विषयों पर ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है।
दूसरे प्रयास में दोनों ने अपनी रणनीति बदली और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान दिया। लगातार रिवीजन, टेस्ट और सेल्फ स्टडी के जरिए उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत किया।
भाई-बहन ने एक-दूसरे को बनाया ताकत
रितेश और ऋचा की सफलता की सबसे खास बात उनका आपसी सहयोग रहा। दोनों ने एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय एक-दूसरे को आगे बढ़ाने का काम किया।
जब पढ़ाई के दौरान किसी एक का मनोबल कमजोर होता तो दूसरा उसे प्रोत्साहित करता। इसी सहयोग और लगातार मेहनत ने दोनों को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की।
परिवार में खुशी का माहौल
NEET UG 2026 का परिणाम आने के बाद रितेश और ऋचा के परिवार में खुशी का माहौल है। एक ही परिवार के दो बच्चों का एक साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल करना परिवार के लिए गर्व का क्षण है।
रितेश और ऋचा की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है, जो किसी परीक्षा के पहले प्रयास में सफलता हासिल नहीं कर पाते। दोनों ने साबित किया कि असफलता अंत नहीं होती। अगर गलतियों से सीखकर सही रणनीति और लगातार मेहनत के साथ दोबारा प्रयास किया जाए तो सफलता जरूर हासिल की जा सकती है। रितेश और ऋचा ने साथ पढ़ाई की, साथ संघर्ष किया और अब साथ ही अपनी सफलता का जश्न मना रहे हैं। उनकी यह कहानी भाई-बहन के रिश्ते, परिवार के सहयोग और मेहनत की ताकत की शानदार मिसाल बन गई है।