देश के दो गांव बने अफसरों की फैक्ट्री, एक ही परिवार से निकले 11 IAS, हर घर बन रहा अधिकारियों की खान

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देश के दो गांव बने अफसरों की फैक्ट्री, एक ही परिवार से निकले 11 IAS, हर घर बन रहा अधिकारियों की खान 

Udaipur Times, village of officers : देश में ऐसे बहुत कम गांव हैं, जिन्हें अफसरों की फैक्ट्री कहा जाता है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले का माधोपट्टी गांव और राजस्थान के नीम का थाना जिले का नयाबास गांव ऐसी ही मिसाल हैं। इन गांवों की पहचान इसलिए बनी है क्योंकि यहां से बड़ी संख्या में IAS, IPS और अन्य सरकारी अधिकारी निकले हैं। कहा जाता है कि इन गांवों में बचपन से ही बच्चों का सपना जिला कलेक्टर या पुलिस अधीक्षक (SP) बनने का होता है।

माधोपट्टी: छोटे से गांव से निकले दर्जनों अफसर

जौनपुर मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर स्थित माधोपट्टी गांव में लगभग 75 से 80 परिवार रहते हैं। इसके बावजूद इस गांव से 40 से अधिक IAS, IPS और PCS अधिकारी बनने का दावा किया जाता है। गांव के पहले IAS अधिकारी विनय कुमार थे, जिनके बाद कई अन्य युवाओं ने सिविल सेवा में सफलता हासिल की।

देश के दो गांव बने अफसरों की फैक्ट्री

एक ही परिवार में 11 IAS अधिकारी

माधोपट्टी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां एक परिवार से 11 IAS अधिकारी निकले हैं। इस परिवार के चार सगे भाई IAS रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यहां के अधिकांश छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रयागराज (इलाहाबाद) जाते हैं। बचपन से ही बच्चों में अनुशासन, मेहनत और प्रतियोगी भावना विकसित की जाती है, जिससे वे बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित होते हैं।

अब गांव में कम हुई सफलता की रफ्तार

गांव के लोगों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में माधोपट्टी से कोई नया IAS या IPS चयनित नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव से निकले कई अधिकारी बाहर बस गए और गांव के विकास में उनकी भूमिका सीमित रही। इसके कारण गांव आज भी विकास के मामले में अपेक्षाकृत पिछड़ा माना जाता है।

राजस्थान का नयाबास भी बना अधिकारियों की खान

राजस्थान के नीम का थाना जिले का नयाबास गांव भी अधिकारियों के गांव के रूप में जाना जाता है। कभी चोरी और डकैती के लिए बदनाम रहा यह गांव अब शिक्षा के दम पर नई पहचान बना चुका है। लगभग 800 घरों वाले इस गांव से 500 से अधिक सरकारी अधिकारी निकले हैं। इनमें 25 सिविल सेवा अधिकारी शामिल हैं, जिनमें 15 कलेक्टर, 5 पुलिस अधीक्षक (SP) और 3 भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी बताए जाते हैं। इसके अलावा 1,600 से अधिक लोगों ने सरकारी नौकरियां हासिल की हैं।

1972 की घटना ने बदल दी गांव की सोच

ग्रामीणों के अनुसार जून 1972 में हुई एक घटना ने नयाबास गांव की दिशा बदल दी। गांव के निवासी के.एल. मीणा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में सब-इंस्पेक्टर चुने गए थे। उसी दौरान एक चोरी के मामले में पुलिस गांव पहुंची और ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार हुआ। इस घटना ने गांव के युवाओं को शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं की ओर प्रेरित किया। बाद में के.एल. मीणा पहले प्रयास में IAS बने और इसके बाद गांव में सिविल सेवा की तैयारी का माहौल बन गया। आज स्थिति यह है कि कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेने को तैयार रहते हैं।

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