उदयपुर में 9 और सलुंबर में 2 पशु अस्पतालों का होगा निर्माण
उदयपुर 2 जनवरी 2026। उदयपुर और सलूंबर ज़िले सहित राजस्थान के 39 ज़िलों में 310 वेटनरी हॉस्पिटल के निर्माण के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने 137.18 करोड़ रुपए का ऋण स्वीकृत किया है। योजना में कुल 144.15 करोड़ रुपए खर्च होंगे। शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी। इनमें उदयपुर ज़िले में 9 और सलूंबर ज़िले में 2 पशु चिकित्सालय का निर्माण होगा।
संयुक्त निदेशक पशुपालन डॉ सुरेश कुमार जैन ने बताया कि यह परियोजना RIDF-XXXI के तहत लागू की जा रही है और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबुत करना, पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन में सुधार लाना तथा किसानों को बेहतर पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। अभी इन जगहों पर अस्थाई रूप से ही अस्पताल संचालित है।
अस्पताल खुलने पर पशुपालकों की मिलेगी मदद
उदयपुर ज़िले में परियोजना के तहत 9 हॉस्पिटल्स का निर्माण प्रमुख स्थानों पर किया जाएगा। इनमें एक पशु अस्पताल पंचायत समिति झाडोल के ग्राम पंचायत गोराणा में एवं एक पंचायत समिति फलासिया के गॉव ग्राम पंचायत पानरवा, दो अस्पताल पंचायत समिति मावली के फलिचडा, साकरिया खेडी, तीन अस्पताल पंचायत समिति गिर्वा के बारापाल, पाटीया, एवं डोडावली, एक अस्पताल वल्लभनगर के भटेवर, एक अस्पताल पंचायत समिति कुराबड के वली में बनेगा।
पशु चिकित्सालय के निर्माण में 46.50 लाख रूपये खर्च होंगे। इसमें तीन किस्तों में 44.17 लाख रूपए RIDF के तहत मिलेंगें और 2.33 लाख रूपये राज्य सरकार वहन करेगी। कुल मिलाकर उदयपुर में वेटरनरी हॉस्पिटल्स की यह परियोजना ग्रामीण पशु पालकों के लिए एक बडी राहत साबित होगी और राज्य के पशु स्वास्थ्य ढांचे को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगें।
इसी प्रकार सलूंबर ज़िले में पशु चिकित्सालय झल्लारा एवं पशु चिकित्सालय बनोडा के लिए 44.17 लाख रूपये खर्च होंगे। संयुक्त निदेशक डॉ. जैन ने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण किसानों और पशुपालकों को आधुनिक वेटरनरी सुविधाएं प्रदान करना है। इससे पशुओं के इलाज में तेजी आएगी, पशु रोग नियंत्रण आसान होगा और मवेशियों की सेहत बेहतर होगी। लंबे समय से इससे डेयरी, मांस उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सुधार होगा। इस परियोजना के क्रियान्वयन से ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों को अस्पताल खुलने से लोगों को काफी राहत एवं फायदा होगा।
पशुओं की मृत्युदर होगी कम
उदयपुर व सलूंबर ज़िले में इन अस्पतालों के निर्माण से पशुपालको को स्थानीय स्तर पर इलाज, टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य, पशु बीमा कृत्रिम गर्भाधान जैसी आवश्यक सेवाएं सुगमता से मिलेंगी। इससे पशुओं की मृत्यु दर कम होगी और उत्पादकता बढेगी। ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को सुदूर शहर में जाकर इलाज कराने की जरूरत नहीं होगी, जिससे समय व धन दोनों की बचत होगी।
इन संस्थानों में बनेगी चारदीवारी
ज़िले की विभिन्न विभागीय कार्यालय/संस्थाओं में चार दीवारी/मरम्मत कार्यों के लिए भीराशि आवंटित की गई। इसमें ज़िला उदयपुर में पशु चिकित्सालय, चित्तौड़ा-नयागांव, मावली, घासा, ईसवाल, भीण्डर प्रत्येक के लिए 8 लाख रूपये एवं बड़गांव (मावली) के लिए 7.96 लाख स्वीकृत किए गए हैं।
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