जनजाति क्षेत्र से रूबरू हुआ यूनिसेफ दल

बालश्रम एवं बाल विवाह को यदि जड़ से खत्म कर बाल मित्र समाज की स्थापना करनी है तो ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं समुदाय को मिलकर कार्य करना होगा तभी यह कार्य पूरा हो सकता है।

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जनजाति क्षेत्र से रूबरू हुआ यूनिसेफ दल

बालश्रम एवं बाल विवाह को यदि जड़ से खत्म कर बाल मित्र समाज की स्थापना करनी है तो ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं समुदाय को मिलकर कार्य करना होगा तभी यह कार्य पूरा हो सकता है।

भारत सरकार द्वारा भी इस दिषा में ग्राम पंचायतों को पहली कड़ी मानकर समेकित बाल संरक्षण योजना का संचालन किया जा रहा है एवं इस हेतु सरपंच की अध्यक्षता में ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति का गठन भी किया गया है।

उक्त विचार अन्तर्राष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ, दिल्ली बाल संरक्षण विषेषज्ञ तनिष्ठा दŸाा ने उदयपुर जिले के जनजाति बाहुल्य क्षेत्र सराड़ा पंचायत समिति के थाना ग्राम पंचायत मुख्यालय पर गायत्री सेवा संस्थान द्वारा आयोजित पंचायत जनप्रतिनिधियों की बैठक को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

इस अवसर पर यूनिसेफ राजस्थान कार्यालय जयपुर के बाल संरक्षण अधिकारी संजय कुमार निाराला ने थाना ग्राम पंचायत द्वारा बाल संरक्षण के क्षेत्र में कि जा रही पहल की सराहना करते हुए इसे मॉडल ग्राम पंचायत बनाने की बात कही एवं बताया कि यूनिसेफ द्वारा इस हेतु हर सम्भव मदद पंचायत को कि जाएगी।

गायत्री सेवा संस्थान के संयुक्त निदेषक शैलेन्द्र पण्ड्या ने बताया कि माह अगस्त 2014 से जनजाति क्षेत्र में बाल संरक्षण परियोजना के मार्फत कार्य किया जा रहा है एवं समेकित बाल संरक्षण योजनान्तर्गत गठित समितियों को प्रषिक्षण देकर सषक्त किया जा रहा है।

थाना सरपंच एवं ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति के अध्यक्ष मोहनलाल मीणा ने पधारे यूनिसेफ दल का स्वागत करते हुए बैठक में घोषणा की कि आगामी माह में थाना पंचायत पूर्ण रूप से बालश्रम मुक्त बनकर इस जनजाति क्षेत्र में उदाहरण प्रस्तुत करेंगी।

इस अवसर पर यूनिसेफ जयपुर के प्रतिनिधि दिनेष कुमार, यूनिसेफ उदयपुर कन्सलटेन्ट पंकज कुमारी तिवारी, विद्यालय प्रबन्धन समिति थाना अध्यक्ष नंदलाल मीणा, ग्राम सचिव जयनारायण, वार्डपंच हिरालाल मीणा, शंकरलाल बुनकर, संस्थान प्रेरक रतनलाल मीणा, ब्लॉक समन्वयक रमेषलाल चौधरी, प्रषिक्षण समन्वयक प्रविण कुमार पानेरी सहित स्थानीय ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन सहायक परियोजना समन्वयक उदयपुर दिपल सौलन्की ने किया।

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