केन्द्रीय बजट 2026| निर्मला सीतारमण का लगातार 9वां बजट: क्या है भारत के केन्द्रीय बजट की दास्ताँ
2017 में पहली बार केन्द्रीय बजट क तब के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फरवरी 1 को पेश करना प्रारंभ किया
फरवरी 1, 2026 | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार 9 वां बजट फरवरी 1 subah 11 बजे संसद में पेश होगा। बजट हर साल सरकार के लिए एक ज़रूरी फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट होता है, क्योंकि इसमें इकॉनमी के हर सेक्टर के लिए फंडिंग की डिटेल होती है और यह आने वाले फाइनेंशियल ईयर में सुधारों के लिए एक गाइड का काम करता है। इस पोस्ट में आपको बजट का इतिहास बताते हैं।
बजट, तारीख और वक़्त
भारत का केंद्रीय बजट, एक ज़रूरी सालाना वित्तीय डॉक्यूमेंट है, जिसमें आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की अनुमानित आय और खर्च का ब्यौरा होता है। 1947 में भारत की आज़ादी के बाद से, देश में 73 सालाना बजट के साथ-साथ अंतरिम और विशेष बजट भी देखे गए हैं। फरवरी के आखरी कार्य दिवस (Working Day) को पेश किया जाने वाला यह बजट को, 2017 में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फरवरी 1 को पेश करना शुरू किया। साल 1999 में वित्त मंत्री यशवंत सिंह ने बजट का समय शाम 5 बजे से बदल कर सुबह 11 बजे का कर दिया। इसीलिए अब बजट फरवरी 1 को सुबह 11 बजे संसद में पेश होता है। यह पहली बार है की बजट संडे को पेश किया जा रहा है। फरवरी 1 को प्रस्तुत किया गया केंद्रीय बजट अप्रैल 1 को लागू होने से पहले फाइनेंस बिल और एप्रोप्रिएशन बिल के ज़रिए पास होता है।
'हलवा' परंपरा और 'लॉक-इन'
बजट के डाक्यमेन्ट को तयार करने में जो वक़्त लगता है, उसे 'लॉक-इन' कहा जाता है। इसकी शरुआत नॉर्थ ब्लॉक में वित्त मंत्रालय के मुख्यालय में हलवा परंपरा से शुरू होती है और फरवरी 1 को 11 बजे वित्त मंत्री द्वारा संसद में बजट प्रस्तुति पर खत्म होती है। बजट स्पीच के एक हफ्ते पहले वित्त मंत्रालय के अफसर और कर्मी जो बजट की तयारी में शामिल होते हैं, वे नॉर्थ ब्लॉक में वित्त मंत्रालय के मुख्यालय में इकट्ठे होते हैं और वित्त मंत्री उन्हे हलवा परोसते हैं। इसके बाद सभी कर्मी और मंत्री इसी जगह रहते हैं और बाहर नहीं निकलते। इससे बजट की गोपनीयता बनाए रखना सुनिश्चित किया जाता है। पहले लॉक-इन 2 हफ्ते का होता था और अब सिर्फ 5 दिन का है।
प्रेस, ब्रीफकेस और बही-खाता
सन 1980 से ले कर 2020 तक नॉर्थ ब्लॉक के तहखाने में एक बजट प्रेस हुआ करती थी, जहां बजट का डाक्यमेन्ट प्रिन्ट किया जाता था। 2021 में डिजिटल फॉर्मैट होने के बाद कागज का प्रिन्ट काम हो गया और डाक्यमेन्ट मोबाईल एप के ज़रिए और वित्त मंत्रालय की वेबसाईट पर जारी होने लगा। इसी वजह से लॉक-इन दो हफ्ते से घट कर 5 दिन का रह गया है।
भारत के पहले वित्त मंत्री शानमुखम शेट्टी ने बजट के कागज को एक ब्रीफकेस में लाने की परंपरा शुरू की थी, जो 2018 तक चली। इसके बाद 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सिथारमन ने बजट पेपर्स को 'बही-खाते' के रूप में लाना शुरू किया। फरवरी 1, 2021 को यह परामपरा भी खत्म हुई, जब वित्त मंत्री पूरा बगत एक टैबलेट में ले कर आईं। टैबलेट का कवर बही-खाते जैसा बनाया गया था।
बजट घोषणा की परंपरा
फरवरी 1 को संसद में बजट घोषणा से पहले, वित्त मंत्री भारत के राष्ट्रपति से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात करती हैं और उनसे मंजूरी लेती हैं। राष्ट्रपति वित्त मंत्री को रिवाज़ के मुताबिक एक चम्मच दही खिलाती हैं। उसके बाद 10 बजे केंद्रीय कैबिनेट की बैठक होती है। कैबिनेट की मंज़ूरी मिलने के बाद, वित्त मंत्री भारत की संसद में केंद्रीय बजट पेश करते हैं।
बजट घोषणा 2026
इस साल, केन्द्रीय सरकार का यूनियन बजट ग्लोबल इकॉनमी में काफी अनिश्चितता के बीच पेश किया जा रहा है। खासकर, भारत अपने सबसे बड़े सिंगल-कंट्री ट्रेड पार्टनर, अमेरिका के साथ प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के तहत लगाए गए 50% टैरिफ का सामना कर रहा है। आयकर के नवीनतम स्लैब के अलावा भारतीय रेलवे, सड़क और राजमार्ग, रक्षा बजट, कृषि, विनिर्माण, स्टार्टअप और MSMEs, रोजगार सृजन और अपस्किलिंग के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्रमुख फोकस क्षेत्र होने की उम्मीद है।
देशवासियों की उम्मीद है की इस बार का बजट विश्व में चल रहे टैरीफ वार और व्यापार युद्ध में कैसे अपनी सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने की साख बनाए रखता है।
Source: Wikipedia
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