सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बीच क्रैक किया UPSC, ऐसे बनी राज्य की पहली मुस्लिम महिला IAS अफसर
Udaipur Times, IAS Rena Jameel : जो मेहनत करते हैं वो एक दिन सफलता जरुर हासिल करते हैं इस कहानी को सच करके दिखाया है रेना जमील ने। झारखंड में धनबाद के कतरास स्थित छातावाद की एक बेटी पर पूरा जिला गर्व महसूस कर रहा है। भूधंसान से प्रभावित इलाके में रहने वाली रेना जमील UPSC की सबसे कठिन परीक्षा को पास कर भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुईं। वो संभवतः झारखंड की पहली महिला IAS हैं।
जानकारी के लिए आपको बता दें की रेना जमील की प्राथमिक शिक्षा सरकारी स्कूल से हुई। जिसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत, संघर्ष और अटूट विश्वास के दम पर यह साबित कर दिया कि अगर इंसान ठान ले, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। रेना जमील छत्तीसगढ़ कैडर की 2019 बैच की IAS अधिकारी हैं।
रेना जमील का जन्म 25 दिसंबर 1988 को धनबाद जिले के छाताबाद गांव में हुआ। वे एक साधारण परिवार से आती हैं। रेना चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनसे बड़े एक भाई है, जबकि उनसे छोटा एक भाई और बहन हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव से ही पूरी की। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम से उन्होंने चौथे प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IAS बनने का सपना पूरा किया।
IAS रेना जमील के पिता मोहम्मद जमील अंसारी टाटा स्टील कंपनी में एक मैकेनिक के रूप में छोटी सी नौकरी करते थे, जबकि उनकी माता नसीम आरा एक गृहिणी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई गांव की सरकारी उर्दू मिडिल स्कूल से आठवीं तक पूरी की। रेना की प्रारंभिक शिक्षा उर्दू माध्यम से हुई, जो आगे चलकर उनके लिए एक चुनौती बनी। आठवीं के बाद उन्होंने गांव की सरकारी डीएवी पब्लिक स्कूल में नौवीं से 12वीं तक की पढ़ाई की।
रेना के गांव में रहने वाले लोगों का कहना है कि वो शुरुआत में एक औसत छात्रा थीं। दसवीं कक्षा में उनके केवल 55 प्रतिशत अंक आए थे, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। लगातार मेहनत, आत्मविश्वास और सुधार के जज्बे के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई का स्तर बढ़ाया। इसका परिणाम यह रहा की 12वीं में उनके अंक बढ़कर 67 प्रतिशत हो गए। ग्रेजुएशन के बाद रेना जमील की मास्टर्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप किया। रेना ने साल 2014 में UPSC की तैयारी शुरू की।
रेना ने कड़ी मेहनत के बाद दूसरे प्रयास में 2016 में 882वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के आधार पर उनका चयन इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस (आईआईएस) में हो गया और उन्होंने इस सेवा को ज्वाइन भी कर लिया। लेकिन उनका लक्ष्य इससे बड़ा था। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 2017 में फिर से सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन इस बार उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा और वह प्रीलिम्स में ही फेल हो गईं। 2017 में प्रीलिम्स में असफल होने के बाद उन्होंने अपनी कमियों को पहचान और उन्हें सुधारने पर काम किया।
इसके बाद रेना ने साल 2018 में कुछ समय की छुट्टी लेकर फिर से पूरी लगन के साथ तैयारी की और दोबारा सिविल सेवा की परीक्षा दी। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई उन्हें 380 वीं रैंक हासिल हुई और उनका चयन IAS के लिए हो गया। साल 2019 में उन्हें ट्रेनिंग के दौरान पहली पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में मिली। इसके बाद उनकी अगली पोस्टिंग सक्ती में एसडीएम के पद पर हुई।