नक्सल गढ़ से निकलकर क्रैक किया UPSC, जाने IPS से IAS बनी नम्रता जैन की कहानी
Udaipur Times, IAS Officer Namrata Jain : शायद ही किसी ने सोचा होगा कि नक्सल प्रभावित इलाके में स्कूल जाने के लिए रोज़ 8 किलोमीटर का सफ़र तय करने वाली लड़की एक दिन IAS अफ़सर बनेगी। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की पहली महिला IAS अफ़सर नम्रता जैन की कहानी किसी फ़िल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है। दंतेवाड़ा के छोटे से शहर गीदम की रहने वाली नम्रता ने UPSC परीक्षा में 12वीं रैंक हासिल की। आज हम उनके सफर के बारे में बता रहे हैं कि कैसे उन्होंने उस इलाके से आकर अपना सपना पूरा किया, जहां जाने से भी लोग डरते थे।

एक वायरल वीडियो
कुछ समय पहले IAS अफ़सर नम्रता जैन का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित गांव में मोटरसाइकिल चलाती हुई नज़र आ रही थीं। यह राइड सिर्फ़ एक प्रशासनिक निरीक्षण नहीं थी। यह उन जड़ों से दोबारा जुड़ने का एक ज़रिया था जिन्होंने उन्हें बनाया था। नम्रता जैन के लिए उस इलाके में लौटना एक भावुक पल था जिसने उनके बचपन को आकार दिया था। वही जगह जहां वह स्कूल पहुंचने के लिए रोज़ 8 किलोमीटर का सफ़र तय करती थीं।
सालों का संघर्ष
घने जंगलों के बीच से गुज़रते ऊबड़-खाबड़ रास्तों वाला यह इलाका लंबे समय से संघर्ष और तनाव का गवाह रहा है। जब नम्रता जैन स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सरकारी सुविधाओं का निरीक्षण करने के लिए अपनी मोटरसाइकिल पर निकलीं, तो उन्होंने एक ज़बरदस्त मिसाल कायम की एक अफसर उन समुदायों तक पहुंच रहा था जो अक्सर मुख्यधारा से कटे रहते हैं।
रोज़ाना आने-जाने में तय करना पड़ता था 8 किलोमीटर का सफर
नम्रता जैन छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले के छोटे से शहर गीदम की रहने वाली हैं। यह इलाका लंबे समय से हिंसा और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई कारली के निर्मल निकेतन स्कूल से पूरी की, जिसके लिए उन्हें रोज़ाना आने-जाने में 8 किलोमीटर का सफ़र तय करना पड़ता था। उस समय, आस-पास शिक्षा के बेहतर विकल्प नहीं थे और इलाके में तनाव के कारण स्कूल अक्सर महीनों तक बंद रहते थे।

BIT भिलाई से इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्युनिकेशन्स में इंजीनियरिंग की डिग्री
10वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए घर से दूर जाना कोई आसान फ़ैसला नहीं था। छोटे शहरों के माता-पिता की तरह, उनके माता-पिता भी सुरक्षा और खर्चों को लेकर चिंतित थे। फिर भी, नम्रता ने अपने परिवार को मनाया और पढ़ाई के लिए दुर्ग चली गईं। इसके बाद उन्होंने BIT भिलाई से इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्युनिकेशन्स में इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की।
IPS से IAS बनने का सफर
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान, नम्रता ने अपने दूसरे प्रयास में 99वीं रैंक हासिल की और इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) के लिए चुनी गईं। ज़्यादातर लोगों के लिए IPS अधिकारी बनना एक बड़ी उपलब्धि होती, लेकिन नम्रता का सपना IAS अधिकारी बनने का था। हैदराबाद में सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी में कड़ी ट्रेनिंग, परेड और क्लास के बीच भी, जब उन्हें समय मिलता, वे पढ़ाई करती रहीं। उनकी मेहनत रंग लाई; 2018 में, अपने तीसरे प्रयास में, उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 12 हासिल की और IAS अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया।

ज़मीनी स्तर पर बदलाव और शिक्षा पर ध्यान
एक IAS अधिकारी के तौर पर, नम्रता ने उन चुनौतियों को दूर करने पर ध्यान दिया जिनका सामना उन्होंने खुद अपने बचपन में किया था। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने दूर-दराज़ और संवेदनशील इलाकों में 24 नए स्कूल खुलवाए, ताकि बच्चों को शिक्षा के लिए मीलों दूर न जाना पड़े। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य ज़रूरी सरकारी योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।
नम्रता जैन का मानना है कि स्कूल सिर्फ़ साक्षरता दर ही नहीं बढ़ाता, बल्कि पूरे समाज का भविष्य भी बदलता है। उनकी कहानी आगे बढ़ने के लिए किसी इलाके को पीछे छोड़ने की नहीं, बल्कि संघर्षों से गुज़रते हुए अपनी जड़ों को मज़बूत करने की कहानी है