26 दिन की नवजात बेटी को गोद में लेकर दिया इंटरव्यू, चलने-बैठने में दिक्कत होने के बावजूद वर्षा बनीं DSP

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26 दिन की नवजात बेटी को गोद में लेकर दिया इंटरव्यू, चलने-बैठने में दिक्कत होने के बावजूद वर्षा बनीं DSP

Udaipur Times, MPPSC Topper Varsha Patel Success Story : जब दृढ़ संकल्प, जुनून और लगन एक साथ आते हैं, तो बड़ी से बड़ी चुनौतियां भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन पातीं। मध्य प्रदेश के मैहर की रहने वाली वर्षा पटेल ने अपनी असाधारण यात्रा से यह साबित कर दिया है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की परीक्षा तीसरी बार में पास करने के बाद, उनका चयन पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर हुआ। उनकी इस उपलब्धि को और भी प्रेरणादायक बात यह बनाती है कि उन्होंने अपनी 20 दिन की बेटी श्रीजा को गोद में लेकर इंटरव्यू दिया। उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें महिला उम्मीदवारों में शीर्ष स्थान दिलाया। 

शुरुआती पढ़ाई दमोह में पूरी की

वर्षा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दमोह में पूरी की। उन्होंने कक्षा 12 में 75% अंक प्राप्त किए और बाद में जीव विज्ञान में बीएससी की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की, जिसमें उन्होंने मुख्य रूप से स्व-अध्ययन पर भरोसा किया और केवल छह महीने के लिए इंदौर में कोचिंग क्लास में भाग लिया।

26 दिन की नवजात बेटी को गोद में लेकर दिया इंटरव्यू

कॉलेज आने-जाने की कठिनाइयों के कारण वह कई प्रैक्टिकल असाइनमेंट पूरे नहीं कर पाईं 

वर्षा बचपन से ही एक मेहनती और दृढ़ निश्चयी छात्रा रही हैं। उन्होंने अनेक व्यक्तिगत और शैक्षणिक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का प्रयास जारी रखा। कॉलेज के दिनों में अपने पिता के निधन के बाद, वह दमोह से मैहर चली गईं। कॉलेज आने-जाने की कठिनाइयों के कारण वह कई प्रैक्टिकल असाइनमेंट पूरे नहीं कर पाईं और उन्हें एटीकेटी (ATKT) भी प्राप्त हुआ। फिर भी, उन्होंने इन असफलताओं को अपने भविष्य को निर्धारित करने नहीं दिया। 

सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद भी एमपीपीएससी परीक्षा की तैयारी जारी रखी

प्रेग्नेंसी और सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद भी वर्षा ने एमपीपीएससी परीक्षा की तैयारी जारी रखी। प्रेग्नेंसी के दौरान उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और मनोदशा में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका परिवार हमेशा उनके लिए प्रोत्साहन का स्रोत बना रहा। उनके पति और ननद इंटरव्यू के दौरान उनके साथ गए और उनकी नवजात बेटी की देखभाल की।

डीएसपी बनना यात्रा का अंत नहीं, अब बनना चाहती हैं डिप्टी कलेक्टर 

डीएसपी बनना उनकी यात्रा का अंत नहीं है। उब उनका सपना डिप्टी कलेक्टर बनने का है और वह चौथी बार एमपीपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। तैयारी कर रहे युवा उम्मीदवारों के लिए वर्षा ने कहा कि अपनी तैयारी को कभी बीच में न छोड़ें। सफलता के लिए समय, धैर्य और निरंतर मेहनत आवश्यक है। शैक्षणिक असफलताओं और व्यक्तिगत हानियों से जूझते हुए नवजात शिशु की देखभाल करते हुए डीएसपी बनने तक का उनका अपना सफर इस बात का सशक्त उदाहरण है कि दृढ़ता से प्रयास करने पर कठिन से कठिन परिस्थितियाँ भी सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं।

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