सहारा-सेबी मामले में सहारा की लंबे समय से चली आ रही याचना को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सुनना स्वीकार कर लिया है जिसमें गुजारिश की गई है कि शीर्ष न्यायालय द्वारा 31 अगस्त, 2012 को पारित आदेशानुसार सेबी 3 करोड़ निवेशकों का सत्यापन शुरू करे। सुनवाई की तारीख 19 अपेल को सर्वोच्च न्यायालय सत्यापन याचना पर विचार करेगा।
सहारा के वकील गौतम अवस्थी ने कहा कि, ‘अगली सुनवाई की तिथि निश्चित करते हुए माननीय न्यायालय ने इस विषय को लेना स्वीकार किया है कि सहारा मामले में निवेशक दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए जो कि 127 ट्रकों में सेबी को भेजे गए थे। वास्तव में यही इस विवाद को सुलझाने का प्रमुख तरीका है क्योंकि सेबी को दिए गए 31 अगस्त, 2012 के निर्देश के अनुसार सेबी का यह कर्तव्य है कि सहारा द्वारा जमा कराए रिफंड दस्तावेजों का सत्यापन करे।
सहारा ने अपने 95 प्रतिशत ओ.एफ.सी.डी. निवेशकों को उनकी रकम वापस कर दी है। इनसे संबंधी दस्तावेज, मूल वाउचर्स, बॉन्ड सर्टिफिकेट्स, परिपक्वता के अन्य कागजात व रसीदें इत्यादि सेबी को 127 ट्रकों में सहारा द्वारा भुगतान के साक्ष्य के रूप में भेज दिए गए हैं। सेबी ने इन 127 ट्रकों में भरे दस्तावेजों के डिजिटाइज़ेशन के लिए राशि ले ली मगर इस विषय में कुछ नहीं किया है। ऐसा प्रतीत होता है कि किन्हीं कारणों से सेबी इस मामले को सुलझाना ही नहीं चाहता है।
सहारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सहारा-सेबी खाते में निरंतर धन जमा कराता ही रहा है। आज सेबी के पास सहारा का लगभग 19 हजार करोड़ (अर्जित ब्याज सहित) जमा है जबकि दूसरी ओर, सेबी ने विगत 60 महीनों में निवेशकों को मात्र 64 करोड़ रुपए ही वापस किए है। साथ ही, सहारा की 20 करोड़ रुपए की परिसम्पत्तियों के मूल दस्तावेज भी सेबी के पास हैं। सहारा ने यह 19 करोड़ रुपए बावजूद इसके जमा कराए हैं कि वह अपने 95 प्रतिशत ओ.एफ.सी.डी. निवेशकों को पहले ही धन वापसी कर चुका है तथा यह भुगतान एक देनदारी के प्रति दो बार रकम अदायगी है।
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