सीधे खड़े सोलर पैनल बनाते है अन्य की तुलना 30% ज्यादा बिजली, दीवारों-बाउंड्री और बालकनी पर कर सकेंगे फिट
Udaipur Times, Vertical Solar Panel : जब आप सोलर पैनल के बारे में अक्सर लोग यही सोचते हैं कि वो छत पर नीली चादर की तरह फैले पैनल होते हैं। लेकिन, शहरों में हर किसी के पास सोलर पैनल लगाने के लिए सही छत नहीं होती। इस समस्या के समाधान के रूप में वर्टिकल सोलर पैनल (Vertical Solar Panel) तकनीक सामने आई है।
छत के बजाय, ये पैनल सीधे दीवारों, बालकनी की रेलिंग या बाउंड्री वॉल पर 90-डिग्री के कोण पर लगाए जाते हैं। सामान्य पैनलों की तुलना में इनके अनोखे इंस्टॉलेशन तरीके के कारण, वर्टिकल सोलर पैनल (Vertical Solar Panel) शहरी बिजली संकट को दूर करने में गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं। ये न केवल जगह की कमी को दूर करते हैं, बल्कि सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान भरपूर बिजली भी पैदा करते हैं।
वर्टिकल सोलर पैनल (Vertical Solar Panel) फोटोवोल्टिक प्रभाव के आधार पर करते हैं काम
सामान्य पैनलों की तरह, वर्टिकल सोलर पैनल भी फोटोवोल्टिक प्रभाव के आधार पर काम करते हैं, लेकिन इन्हें 75 से 90 डिग्री के खड़े कोण पर लगाया जाता है। इस स्थिति के कारण, जब सूरज आसमान में नीचे होता है, तब भी इन्हें सीधी धूप मिलती है। इनमें मौजूद सोलर सेल सूरज की रोशनी को DC बिजली में बदलते हैं, जिसे बाद में इन्वर्टर के ज़रिए AC बिजली में बदलकर घरों में इस्तेमाल किया जाता है या ग्रिड को सप्लाई किया जाता है।
पारंपरिक पैनलों की तुलना में 10% से 30% ज़्यादा बिजली उत्पादन
वर्टिकल सोलर पैनल की एक खास विशेषता बाइफेशियल सेल का इस्तेमाल है, जो दोनों तरफ से बिजली पैदा करते हैं। इससे वे न केवल सामने पड़ने वाली धूप को पकड़ पाते हैं, बल्कि दीवारों, जमीन या आस-पास की चीज़ों से टकराकर पीछे की सतह पर पड़ने वाली रोशनी को भी इस्तेमाल कर पाते हैं। नतीजतन, वे पारंपरिक पैनलों की तुलना में 10% से 30% ज़्यादा बिजली पैदा कर सकते हैं।
बहुत कम तापमान में भी करते रहते हैं काम
एक और फ़ायदा यह है कि इन पर धूल, गंदगी और पक्षियों की बीट आसानी से जमा नहीं होती। ऐसी गंदगी आमतौर पर सामान्य सोलर पैनल की बिजली उत्पादन क्षमता को 20-30% तक कम कर देती है। चूँकि वर्टिकल पैनल सीधे खड़े होते हैं, इसलिए उन पर धूल और कचरा जमा नहीं होता और बारिश से वे अपने आप साफ़ हो जाते हैं। इसके अलावा, बर्फ़बारी वाले इलाकों में जहां सामान्य पैनल अक्सर बर्फ़ के नीचे दब जाते हैं वर्टिकल पैनल बर्फ़ को जमा होने से रोकते हैं और बहुत कम तापमान में भी काम करते रहते हैं।
सीधे इमारतों की बाहरी दीवारों पर लगाया जा सकता है
वर्टिकल सोलर पैनल कई जगहों पर लगाए जा सकते हैं। इन्हें सीधे इमारतों की बाहरी दीवारों पर लगाया जा सकता है, जहां वे बिजली पैदा करने के साथ-साथ इमारत का एक अहम हिस्सा भी बन जाते हैं। इसके अलावा, इन्हें बाउंड्री वॉल या घेरे वाली बाड़ पर भी लगाया जा सकता है, जिससे सुरक्षा और बिजली उत्पादन दोनों का मक़सद पूरा होता है। अपार्टमेंट में रहने वाले लोग भी अपनी बिजली पैदा करने के लिए इन्हें बालकनी की रेलिंग पर लगा सकते हैं।
भारत में वर्टिकल सोलर की कीमत
भारत में वर्टिकल सोलर पैनल उपलब्ध हैं; 1 kW के घरेलू सिस्टम की कीमत लगभग 65,000 रुपये होती है, जबकि 2 kW सिस्टम की कीमत लगभग 1,15,000 रुपये होती है। 3 kW के वर्टिकल सोलर पैनल सिस्टम की कीमत 1,65,000 रुपये तक हो सकती है। बड़े घरों के लिए, 5 kW सिस्टम की कीमत लगभग 2,75,000 रुपये हो सकती है।