चीनी मिल में यहां लगा बेल्जियम से आया वेसल, भारत के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट से हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार

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चीनी मिल में यहां लगा बेल्जियम से आया वेसल, भारत के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट से हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार 

The country's first bioplastic plant : कुंभी में बायोप्लास्टिक प्लांट की स्थापना का उद्देश्य औद्योगिक विकास को नई गति देना है, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। लगभग 3,080 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाली यह इकाई क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए मौके तैयार करेगी।

इस प्लांट के लगने से आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे व्यापार और सेवा क्षेत्रों को भी लाभ होगा। यह प्लांट लगभग 135 एकड़ क्षेत्र में बनाया जा रहा है। इस औद्योगिक क्षेत्र के विकास से परिवहन, माल ढुलाई, निर्माण, रखरखाव और अन्य सहायक सेवाओं से जुड़े व्यवसायों को भी नई ऊर्जा मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और विभिन्न सेवा प्रदाताओं को भी फायदा होगा। चूंकि यह देश में अपनी तरह का इकलौता प्लांट होगा, इसलिए उम्मीद है कि एक बार जब यह औद्योगिक क्षेत्र पूरी तरह विकसित हो जाएगा, तो यहाँ कई और कारखाने भी स्थापित होंगे।

बायोप्लास्टिक प्लांट कैसे काम करेगा

कुंभी चीनी मिल में स्थापित किया जा रहा यह बायोप्लास्टिक प्लांट सीधे गन्ने, चीनी और शीरे (मोलासेस) से पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक पैलेट (दाने) तैयार करेगा। इन पैलेट का इस्तेमाल बाद में कई तरह के डिस्पोजेबल और पैकेजिंग उत्पाद बनाने के लिए किया जाएगा। गन्ने का रस, शीरा और खोई (गन्ने का बचा हुआ हिस्सा) इसके मुख्य कच्चे माल होंगे। गन्ने से प्राप्त चीनी को जैविक किण्वन (बायोलॉजिकल फर्मेंटेशन) प्रक्रिया से गुजारा जाएगा, जिससे यह लैक्टिक एसिड में बदल जाएगी।

इसके बाद, लैक्टिक एसिड को लैक्टाइड में बदला जाएगा। फिर बेल्जियम से मंगाई गई एक अत्याधुनिक "साइक्लाइजेशन रिएक्टर" मशीन का उपयोग करके इसे पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) में परिवर्तित किया जाएगा। मशीनरी इस PLA को छोटे प्लास्टिक पैलेट में बदल देगी। शुरुआती चरण में, इस प्लांट की दैनिक उत्पादन क्षमता लगभग 80,000 टन होने की उम्मीद है। इससे सिंगल-यूज़ प्लेट, कप, गिलास, चम्मच, कांटे, कैरी बैग और बोतलें जैसी चीजें बनाई जा सकेंगी। इस प्लांट में बनने वाले बायोप्लास्टिक उत्पाद अनुकूल परिस्थितियों में तीन से छह महीने के भीतर प्राकृतिक रूप से सड़कर खाद में बदल जाते हैं, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद है। 

बायोप्लास्टिक प्लांट में नौकरी के लिए आवेदन कैसे करें

कुम्भी शुगर मिल के यूनिट हेड, डॉ. सुनील कुमार यादव ने बताया कि जो लोग भारत के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट में काम करने के इच्छुक हैं जिसे बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड द्वारा स्थापित किया जा रहा है वे बलरामपुर चीनी मिल्स के करियर पेज पर जाकर नौकरियों की जानकारी देख सकते हैं और अपना रिज्यूमे ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।

130 एकड़ जमीन का अधिग्रहण; 100 बिक्री विलेख (सेल डीड) पूरे हुए

तहसीलदार अरुण कुमार सिंह ने बताया कि कुम्भी में बायोप्लास्टिक प्लांट के पास लगभग 200 एकड़ में एक औद्योगिक क्षेत्र (इंडस्ट्रियल ज़ोन) विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) द्वारा किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।

अब तक, 250 से अधिक किसानों की 130 एकड़ जमीन के लिए लगभग 100 बिक्री विलेख (सेल डीड) पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा, 8.7 एकड़ जमीन 'ग्राम समाज' की है। बाकी बची जमीन का अधिग्रहण भी जल्द ही कर लिया जाएगा। बायोप्लास्टिक प्लांट स्थापित हो जाने के बाद, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण इस जगह पर एक औद्योगिक क्षेत्र विकसित करेगा।

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