गांव की बेटी ने PCS में लहराया परचम, 34वीं रैंक से बनी SDM; पद संभालते ही कर दी बड़ी कार्रवाई
Udaipur Times, Success Story : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के बांसगांव की रहने वाली क्षिप्रा पाल सूर्यवंशी ने अपनी मेहनत और लगन से प्रशासनिक सेवा में खास मुकाम हासिल किया है। यूपी पीसीएस जैसी कठिन परीक्षा में उन्होंने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल करते हुए 34वीं रैंक प्राप्त की और SDM के पद तक पहुंचीं। उनकी सफलता ने परिवार के साथ-साथ गांव का भी नाम रोशन किया है।
क्षिप्रा की कहानी सिर्फ परीक्षा में सफलता तक सीमित नहीं है। अधिकारी बनने के बाद उनके एक फैसले ने भी खूब चर्चा बटोरी। उन्होंने स्कूल के गेट के पास चल रही गुटखा और बीड़ी की दुकान को हटाने के निर्देश दिए। स्कूल के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर कार्रवाई को लेकर उनका यह कदम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

बस्ती के बांसगांव की रहने वाली हैं क्षिप्रा पाल।
क्षिप्रा पाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की रहने वाली हैं। उनका पैतृक गांव मुंडेरवा थाना क्षेत्र का बांसगांव बताया जाता है। प्रशासनिक सेवा में चयन के बाद उनके परिवार और गांव में खुशी का माहौल है।
क्षिप्रा ने यूपी पीसीएस परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई और SDM के पद पर तैनाती हासिल की। उनकी सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने यह मुकाम अपनी पहली ही कोशिश में हासिल किया।
पहली कोशिश में हासिल की 34वीं रैंक
यूपी पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल करना हजारों अभ्यर्थियों का सपना होता है। इसके लिए लंबे समय तक पढ़ाई और लगातार मेहनत की जरूरत होती है। क्षिप्रा पाल ने पहली ही कोशिश में परीक्षा पास करने के साथ 34वीं रैंक हासिल की।
उनकी सफलता यह दिखाती है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में सही रणनीति, निरंतर मेहनत और लक्ष्य के प्रति गंभीरता कितनी महत्वपूर्ण होती है।

क्षिप्रा पालपिता भी हैं IPS अधिकारी
क्षिप्रा पाल को प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवा का माहौल परिवार से ही मिला। उनके पिता ओमप्रकाश पाल छत्तीसगढ़ में IPS अधिकारी हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता को प्रशासनिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए देखा।
हालांकि, पारिवारिक माहौल के बावजूद अपनी पहचान बनाना क्षिप्रा के लिए अलग चुनौती थी। उन्होंने अपनी पढ़ाई और तैयारी पर लगातार मेहनत की और यूपी पीसीएस में सफलता हासिल कर अपनी अलग पहचान बनाई।
रायपुर से दिल्ली और फिर JNU जाकर की पढ़ाई
क्षिप्रा पाल की स्कूली शिक्षा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हुई। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया।
ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से MA की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के अलावा क्षिप्रा की रुचि रचनात्मक गतिविधियों में भी रही है। उन्हें फोटोग्राफी और पेंटिंग का शौक बताया जाता है।
इससे पता चलता है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ उन्होंने अपनी रचनात्मक रुचियों को भी बनाए रखा।

SDM बनते ही मादक पदार्थो पर कसा शिकंजा फैसला
अधिकारी बनने के बाद क्षिप्रा पाल का एक फैसला खास तौर पर चर्चा में आया। उन्होंने स्कूल के गेट के पास चल रही गुटखा और बीड़ी की दुकान को हटाने के निर्देश दिए।
स्कूल के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। ऐसे स्थानों पर बच्चों और युवाओं की आवाजाही अधिक होती है। ऐसे में स्कूल के आसपास इस तरह की दुकानों पर कार्रवाई को लेकर क्षिप्रा के फैसले को सख्त प्रशासनिक कदम के तौर पर देखा गया।
प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ अलग अंदाज
क्षिप्रा पाल की कहानी में एक तरफ प्रतियोगी परीक्षा में पहली कोशिश में मिली सफलता है, तो दूसरी तरफ अधिकारी बनने के बाद लिए गए फैसलों से उनकी प्रशासनिक सक्रियता भी नजर आती है।
बस्ती के छोटे से गांव से निकलकर PCS परीक्षा में 34वीं रैंक हासिल करने और SDM बनने तक का उनका सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखते हैं।
