विटामिन डी, मेनोपोज संबंधित बीमारियों के बचाव में सहायक
जीवन के 45 साल पार करने वाली महिलाएं यदि अपनी लाइफ स्टाइल में परिवर्तन कर लें या षरीर में विटामिन डी की र्प्याप्त मात्रा बनी रहने दे ंतो काफी हद तक मेनोपोज से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। यह बात आईएमएस के दो दिवसीय कांफ्रेंस में अहमदाबाद के वरिष्ठ सर्जन डॉ जिग्नेश शाह ने दी।

जीवन के 45 साल पार करने वाली महिलाएं यदि अपनी लाइफ स्टाइल में परिवर्तन कर लें या षरीर में विटामिन डी की र्प्याप्त मात्रा बनी रहने दे ंतो काफी हद तक मेनोपोज से संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। यह बात आईएमएस के दो दिवसीय कांफ्रेंस में अहमदाबाद के वरिष्ठ सर्जन डॉ जिग्नेश शाह ने दी।
उन्होंने कहा कि मेनोपोज से संबंधित समस्याओं पर यदि प्रारंभिक अवस्था में ही जांच करवा ली जाए तो महिलाएं जटिल शारीरिक समस्याओं से निजात पा सकती है। उन्होनंे कहा कि महज दस मिनट की सर्जरी के बाद महिलाएं पूर्व की तरह आम जीवन जी सकती है तथा उन्हें भविश्य में किसी तरह की समस्या होने की संभावना से मुक्ति मिल सकती है।
गौरतलब है कि आईएमएस की उदयपुर में हुई इस पहली कांफ्रेंस में लाइव सर्जरी के माध्यम से मेनोपोज से संबंधित होने वाली बीमारियों पर बारीकियांे के साथ सर्जरी में आई नई तकनीकों की भी जानकारी दी गई थी। आयोजन सचिव डॉ नाजिमा सलोदा ने बताया कि कांफ्रेंस में फाउंडर सचिव डॉ कौशल चूंूडावत, डॉ संचिता दशोरा, डॉ आशा जैन, डॉ नफीसा दलाल, डॉ नसरीन बानो, डॉ शिल्पा राठौड, डॉ फातिमा सिराज, डॉ अनिता सिमलोत, डॉ शारदा गोयल, डॉ आसित मित्तल, डॉ स्मिता सिंह, डॉ संजय गांधी, डॉ राजरानी शर्मा , डॉ शालिनी भागर्व ने भी मेनोपाज से संबंधित होने वाली बीमारियों के प्रति जानकारी दी। कांफ्रेंस में 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।
जयपुर से आई डॉ रानू पाटनी ने बताया कि भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट के बाद अब बच्चेदानी का कैंसर भी बढ रहा है। जिसकी तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नई तकनीकों के अंतर्गत वर्तमान में बच्चेदानी के कैंसर की स्क्रिनिंग की जा रही है। इससे सही समय पर इस रोग की जानकारी मिल जाती है। सर्वायकल कैंसर के लिए वर्तमान में वैक्सिन भी उपलब्ध हैं, जो एक राहत भरा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा कैंसर को प्रारंभिक चरण में ही डायग्नोस कर लिया जाए तो काफी हद तक इस रोग पर लगाम लगाई जा सकती है।
गुजरात से आए डॉ फागुन शाह ने बताया कि महिलाओं में विटामिन डी एक आवश्यक तत्व है। हालांकि, कई लोग इसे नॉन वेज से भी प्राप्त करते हैं, जो एक उचित माध्यम नहीं है। यह जानकारी विश्व स्तर पर प्रसारित की जा रही है। महिलाओं के लिए नेचुरल रूप से प्राप्त किया गया विटामिन डी सबसे बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इसके लिए सनलाइट सबसे बेहतर माध्यम है। जिसकी भारत में कोई कमी भी नहीं है। महिलाओं को दिनचर्या में इसे ष्षामिल किया जाना चाहिए।
गुजरात के डॉ दिलीप गडवी कहते हैं कि महिलाओं में मेनोपोज से होने वाली समस्याओं को लेकर परिवार और समाज को भी सहयोग करना चाहिए। कारण, यह है कि महिलाएं अपने बच्चे और घर में ही उलझी रहती है। इसके चलते वे ष्षरीर में होने वाली छोटी मोटी बीमारियों की तरफ ध्यान नहीं दे पाती है। इसके लिए परिवार की जिम्मेदार बनती है कि वे अपने घर की महिलाओं में होने वाली ऐसी समस्याओं के प्रति ध्यान केंद्रीत करें।
आयोजन सचिव डॉ नाजिमा सलोदा ने बताया कि कांफ्रेंस में डॉ नितिन मिश्रा ने महिलाओं में होने वाली सर्जरी को लेकर नई तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिकतम दस मिनट की अवधि की सर्जरी में काफी हद तक हम महिलाओं के स्वास्थ्य को दुरूस्त रख सकते है।