रेलवे का बड़ा कमाल ! ट्रेन की छत पर लगेंगे सोलर सिस्टम, अब चलते-चलते बनेगी बिजली

 | 
रेलवे का बड़ा कमाल ! ट्रेन की छत पर लगेंगे सोलर सिस्टम, अब चलते-चलते बनेगी बिजली 

Udaipur Times, First Solar-Powered Railway Coach : भारतीय रेलवे स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी मिलने के बाद अब उत्तर मध्य रेलवे ने एक सोलर-असिस्टेड पैसेंजर कोच तैयार किया है। इस कोच की छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो बिजली पैदा कर कोच के अंदर की कई सुविधाओं को संचालित करेंगे। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है।

छत पर लगे 21 सोलर पैनल (Solar panel)

प्रयागराज मंडल ने इस खास कोच को लॉन्च किया है। कोच की छत पर 6.93 किलोवाट क्षमता के 21 सोलर पैनल लगाए गए हैं। ये पैनल हर साल करीब 13,400 यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा करेंगे। इस बिजली का उपयोग कोच के पंखे, लाइट, चार्जिंग पॉइंट और अन्य जरूरी इलेक्ट्रिकल सिस्टम चलाने में किया जाएगा। इससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

रेलवे को होगी 2.80 लाख  रुपये की सालाना बचत

रेलवे के मुताबिक, एक सोलर कोच से हर साल लगभग 2.80 लाख रुपये की बिजली लागत बचेगी। इसके साथ ही यह तकनीक सालाना करीब 11 टन कार्बन उत्सर्जन कम करेगी। यानी यह पहल आर्थिक बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बैटरी में स्टोर होगी सौर ऊर्जा

उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा के अनुसार, सोलर पैनलों से बनने वाली बिजली पहले बैटरी बैंक में संग्रहित होगी। इसके बाद उसी ऊर्जा से कोच के भीतर लगे पंखे, लाइट और अन्य उपकरण संचालित किए जाएंगे। इससे बिजली की आपूर्ति अधिक भरोसेमंद रहेगी और स्वच्छ ऊर्जा का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

हर महीने तैयार होंगे दो नए सोलर कोच

मुख्य अभियंता पुलकित श्रीवास्तव ने बताया कि इस परियोजना का अधिकांश कार्य रेलवे ने अपने संसाधनों से पूरा किया है। झांसी स्थित रेलवे की दोनों प्रमुख वर्कशॉप अब हर महीने दो सोलर-असिस्टेड कोच तैयार करेंगी। निर्माण पूरा होने के बाद इन कोचों को अलग-अलग ट्रेनों में शामिल किया जाएगा।

ग्रीन रेलवे (Green Railway) की दिशा में बड़ा कदम

रेलवे का मानना है कि यदि यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में देशभर की कई ट्रेनों में सोलर-असिस्टेड कोच लगाए जा सकते हैं। इससे रेलवे का ऊर्जा खर्च कम होगा, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय रेलवे का कार्बन फुटप्रिंट भी घटेगा।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News