कितने प्रकार का होता है सांप का जहर ? काटने पर शरीर के किस अंग पर होता है ज्यादा असर और कितनी देर में बच सकती है जान

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कितने प्रकार का होता है सांप का जहर ? काटने पर शरीर के किस अंग पर होता है ज्यादा असर और कितनी देर में बच सकती है जान  

Udaipur Times, Snake Bite : बारिश के मौसम में सांप के काटने के मामले बढ़ जाते हैं। सांप के जहर को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं—जहर कितने प्रकार का होता है, इसका शरीर पर क्या असर पड़ता है और एंटीवेनम कितनी जल्दी देना चाहिए? सबसे जरूरी बात यह है कि सांप के काटने के बाद समय बर्बाद किए बिना अस्पताल पहुंचना चाहिए। हर सांप जहरीला नहीं होता, लेकिन बिना जांच के यह मान लेना खतरनाक हो सकता है कि काटने वाला सांप जहरीला नहीं था।

भारत में जहरीले सांपों में कोबरा, करैत और कई वाइपर प्रजातियां प्रमुख हैं। इनके जहर का असर मुख्य रूप से नर्वस सिस्टम, खून जमने की प्रक्रिया और काटे गए हिस्से के टिश्यू पर पड़ सकता है।

जाने सांप का जहर कितनी तरह का होता है?

सांप के जहर को उसके शरीर पर होने वाले प्रमुख प्रभावों के आधार पर कई श्रेणियों में समझा जाता है। इनमें न्यूरोटॉक्सिक, हेमोटॉक्सिक और साइटोटॉक्सिक प्रभाव प्रमुख हैं। कई सांपों के जहर में एक से अधिक प्रकार के टॉक्सिन भी हो सकते हैं।

1. न्यूरोटॉक्सिक जहर

यह जहर नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों पर असर डालता है। कोबरा और करैत के जहर में न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव प्रमुख हो सकता है।

इसके लक्षणों में पलकें झुकना, धुंधला दिखाई देना, बोलने या निगलने में परेशानी और मांसपेशियों में कमजोरी शामिल हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में सांस लेने वाली मांसपेशियां प्रभावित हो सकती हैं और मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

2. हेमोटॉक्सिक जहर

हेमोटॉक्सिक प्रभाव मुख्य रूप से खून और रक्तसंचार तंत्र को प्रभावित करता है। वाइपर प्रजातियों के जहर में ऐसे प्रभाव देखे जा सकते हैं।

इससे खून के थक्के बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और शरीर के अंदर रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। गंभीर मामलों में ब्लड प्रेशर गिरना और किडनी समेत दूसरे अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।
3. साइटोटॉक्सिक जहर

साइटोटॉक्सिक प्रभाव मुख्य रूप से काटे गए हिस्से की त्वचा, मांसपेशियों और टिश्यू को नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण तेज दर्द, तेजी से बढ़ती सूजन, छाले और टिश्यू डैमेज हो सकता है। गंभीर स्थिति में टिश्यू के मरने यानी नेक्रोसिस का खतरा भी रहता है।

शरीर के किस अंग पर पड़ता है जल्द असर?

सांप की प्रजाति और जहर के प्रकार के आधार पर इसका असर अलग-अलग हो सकता है।

न्यूरोटॉक्सिक जहर में दिमाग से जुड़ी नसों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है, जिससे निगलने और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

हेमोटॉक्सिक जहर खून के जमने की प्रक्रिया, रक्त वाहिकाओं और कुछ मामलों में किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है।

वहीं साइटोटॉक्सिक प्रभाव मुख्य रूप से काटे गए स्थान के आसपास के टिश्यू को नुकसान पहुंचाता है और गंभीर सूजन व दर्द पैदा कर सकता है।

एंटीवेनम  देने का क्या है सहीं वक्त?

सांप के काटने के बाद एंटी-स्नेक वेनम (ASV) ही विषैले सांप के जहर के खिलाफ मुख्य विशिष्ट उपचार है। लेकिन इसे हर सांप के काटने पर या केवल समय देखकर नहीं दिया जाता। डॉक्टर मरीज के लक्षण, सांप के जहर के संभावित प्रभाव और जरूरी जांच के आधार पर तय करते हैं कि एंटीवेनम देना है या नहीं।

इसलिए 40-45 मिनट या किसी निश्चित समय सीमा का इंतजार नहीं करना चाहिए। सांप के काटने के तुरंत बाद मरीज को ऐसे अस्पताल ले जाना सबसे जरूरी है, जहां जरूरत पड़ने पर एंटीवेनम और सांस संबंधी सहायता उपलब्ध हो।

जहर का असर जितना गंभीर और तेजी से बढ़ रहा हो, इलाज में देरी उतनी ही खतरनाक हो सकती है। कुछ मामलों में मरीज को वेंटिलेटर जैसी जीवनरक्षक सहायता की भी जरूरत पड़ सकती है।

सांप काट ले तो तुरंत क्या करें?

सांप के काटने की स्थिति में मरीज को शांत रखें और ज्यादा चलने-फिरने न दें। काटे गए अंग को यथासंभव स्थिर रखें और तुरंत अस्पताल पहुंचाएं।

सांप काटने इन गलतियों से जरूर बचें:

जख्म पर चीरा न लगाएं।

मुंह से जहर चूसने की कोशिश न करें।

बहुत कसकर रस्सी या पट्टी बांधकर रक्त प्रवाह बंद न करें।

बर्फ, केमिकल या घरेलू नुस्खे लगाने से बचें।

झाड़-फूंक या तांत्रिक के पास जाने में समय बर्बाद न करें।

सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।

अगर सुरक्षित दूरी से सांप की तस्वीर लेना संभव हो तो डॉक्टरों की पहचान में मदद मिल सकती है, लेकिन सांप को पकड़ने के लिए जोखिम बिल्कुल न लें।

सबसे जरूरी बात: समय बर्बाद न करें

सांप के काटने पर सबसे बड़ा खतरा इलाज में देरी से होता है। हर काटना जहरीला नहीं होता, लेकिन घर पर यह तय करना सुरक्षित नहीं है कि जहर शरीर में गया है या नहीं। लक्षणों का इंतजार करने के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।

ऐसे मैं सांप के काटने पर एंटीवेनम की जरूरत और उसकी मात्रा डॉक्टर तय करते हैं। ऊपर दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है; किसी वास्तविक सर्पदंश की स्थिति में इसे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प न मानें। ओर तुरन्त इलाज  के लिए चिकित्सक से परामर्श ले।

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