प्लास्टिक बोतल में पानी भरकर छत पर रखने से क्या होता है ? कई देशों में बना चर्चा का विषय, जाने कारण

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प्लास्टिक बोतल में पानी भरकर छत पर रखने से क्या होता है ? कई देशों में बना चर्चा का विषय, जाने कारण 

Udaipur Times, Moser Lamp : क्या आपने कभी सोचा है कि पानी से भरी एक साधारण प्लास्टिक की बोतल दिन के समय बिना बिजली खर्च किए किसी अंधेरे कमरे को रोशन करने में मदद कर सकती है? यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन 'मोजर लैंप' नाम की एक तकनीक इसी सिद्धांत पर काम करती है। इसमें पारदर्शी प्लास्टिक की बोतल में पानी भरकर उसे इस तरह लगाया जाता है कि सूर्य की रोशनी पानी से होकर कमरे के अंदर पहुंचे।

यह तकनीक खास तौर पर उन जगहों पर उपयोगी मानी गई, जहां बिजली की सुविधा सीमित थी या ऐसे कमरे थे जिनमें खिड़कियों से पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी नहीं पहुंचती थी। करीब ढाई दशक पहले ब्राजील से शुरू हुआ यह प्रयोग बाद में कई देशों में पहुंचा और 'लीटर ऑफ लाइट' जैसे अभियानों के जरिए इसे वैश्विक स्तर पर पहचान मिली।

ब्राजील से शुरू हुआ था मोजर लैंप का प्रयोग

मोजर लैंप की शुरुआत ब्राजील के उबेराबा शहर से जुड़ी बताई जाती है। साल 2000 के आसपास ब्राजील में बिजली संकट के दौरान स्थानीय मैकेनिक अल्फ्रेडो मोजर ने इस आसान तरीके का प्रयोग किया। उनका उद्देश्य ऐसे घरों में दिन के समय रोशनी पहुंचाना था, जहां बिजली की सुविधा या पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने पारदर्शी प्लास्टिक की बोतल में पानी भरकर उसे छत के एक हिस्से में इस तरह फिट किया कि बोतल का एक हिस्सा बाहर सूर्य की रोशनी में रहे और दूसरा हिस्सा कमरे की तरफ। सूर्य की किरणें पानी से होकर गुजरती हैं और कमरे के अंदर फैलती हैं। इसी प्रयोग को बाद में उनके नाम पर Moser Lamp कहा जाने लगा।

30 से ज्यादा देशों तक पहुंची तकनीक

इस तकनीक को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में फिलीपींस के Liter of Light अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 2011 के आसपास शुरू हुए इस अभियान के जरिए पानी से भरी प्लास्टिक बोतलों को घरों में दिन के समय प्राकृतिक रोशनी के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने का तरीका कई समुदायों तक पहुंचाया गया।धीरे-धीरे यह विचार दूसरे देशों में भी अपनाया गया। इसका सबसे बड़ा फायदा यह माना गया कि इसमें आसानी से उपलब्ध प्लास्टिक की बोतल और पानी जैसी सामान्य चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों और संस्थाओं की ओर से इसकी पहुंच को लेकर आंकड़े अलग-अलग मिल सकते हैं, इसलिए किसी एक संख्या को सार्वभौमिक आंकड़ा मानना उचित नहीं है।

पानी से भरी बोतल रोशनी कैसे फैलाती है?

मोजर लैंप का काम मुख्य रूप से प्रकाश के अपवर्तन और प्रकीर्णन के सिद्धांत से समझा जा सकता है। जब सूर्य की किरणें बोतल के अंदर मौजूद पानी से होकर गुजरती हैं तो पानी और बोतल की पारदर्शी सतह के कारण प्रकाश की दिशा में बदलाव होता है। इसके बाद रोशनी कमरे के अंदर अलग-अलग दिशाओं में फैलती है। इस वजह से छत में एक छोटे से खुले हिस्से से आने वाली धूप कमरे के अपेक्षाकृत बड़े हिस्से में फैल सकती है। इसी कारण इसे दिन के समय एक साधारण इलेक्ट्रिक बल्ब जैसी रोशनी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर हर स्थिति में 60 वाट के बल्ब के बराबर मानना सही नहीं होगा। कमरे का आकार, बाहर की धूप, बोतल की स्थिति, पानी की साफ-सफाई और इंस्टॉलेशन का तरीका रोशनी की मात्रा को प्रभावित करते हैं।

बोतल में पानी के साथ ब्लीच क्यों मिलाया जाता है?

मोजर लैंप में इस्तेमाल होने वाली बोतल को लंबे समय तक साफ रखने के लिए पानी में कुछ मात्रा में ब्लीच या क्लोरीन मिलाने की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य पानी में शैवाल यानी काई और अन्य जैविक वृद्धि को रोकना होता है।अगर बोतल में सिर्फ सामान्य पानी भरकर लंबे समय तक तेज धूप में छोड़ दिया जाए तो उसमें काई या अन्य गंदगी विकसित हो सकती है। इससे पानी की पारदर्शिता कम होगी और कमरे के अंदर पहुंचने वाली रोशनी भी घट सकती है। हालांकि, ब्लीच या क्लोरीन की मात्रा का इस्तेमाल बिना जानकारी के नहीं करना चाहिए। किसी भी इंस्टॉलेशन में स्थानीय तकनीकी निर्देशों और सुरक्षित हैंडलिंग का ध्यान रखना जरूरी है।

मोजर लैंप को कैसे इंस्टॉल किया जाता है?

इस तकनीक को लगाने के लिए सबसे पहले एक साफ और पारदर्शी प्लास्टिक की बोतल ली जाती है। उसमें साफ पानी भरा जाता है और निर्धारित तरीके के अनुसार पानी को साफ रखने के लिए उपयुक्त ट्रीटमेंट किया जाता है। इसके बाद छत की संरचना और मटीरियल की जांच करके बोतल के आकार के अनुसार जगह तैयार की जाती है। बोतल को इस तरह फिट किया जाता है कि उसका ऊपर वाला हिस्सा सूर्य की रोशनी प्राप्त कर सके और नीचे का हिस्सा कमरे के अंदर रहे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छत में बोतल लगाने के बाद उसके आसपास का हिस्सा पूरी तरह वॉटरप्रूफ रहे। इसके लिए उपयुक्त सीलेंट या सिलिकॉन का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि बारिश का पानी कमरे के अंदर न आए।

छत की खूबसूरती खराब किए बिना कैसे लगाएं?

मोजर लैंप का सबसे बड़ा व्यावहारिक सवाल यह है कि इसे घर की छत में इस तरह कैसे लगाया जाए कि डिजाइन और फिनिश प्रभावित न हो। इसके लिए किसी भी छत में सीधे छेद करने से पहले उसकी संरचना और वाटरप्रूफिंग की जांच करना जरूरी है।जहां संभव हो, इसे ऐसे हिस्से में लगाया जा सकता है जहां पहले से वेंटिलेशन, स्काइलाइट या अन्य उपयुक्त ओपनिंग मौजूद हो। कमरे के अंदर बोतल के निचले हिस्से को डेकोरेटिव लाइट डिफ्यूजर, कवर या फॉल्स सीलिंग बॉर्डर से फ्रेम किया जा सकता है। इससे बोतल का हिस्सा कम दिखाई देगा और कमरे में आने वाली प्राकृतिक रोशनी को एक डेकोरेटिव लाइटिंग एलिमेंट जैसा रूप दिया जा सकता है। हालांकि, केवल लुक के लिए छत में नया छेद करना सही नहीं है। छत की मजबूती, बिजली की वायरिंग, पाइपलाइन और वाटरप्रूफिंग को ध्यान में रखकर ही ऐसा इंस्टॉलेशन किया जाना चाहिए।

किन जगहों पर ज्यादा उपयोगी हो सकता है यह तरीका?

मोजर लैंप मुख्य रूप से उन कमरों या जगहों के लिए उपयोगी हो सकता है जहां दिन के समय पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी नहीं पहुंचती। बिना खिड़की वाले स्टोर रूम, छोटे वर्क एरिया, ग्रामीण घरों या ऐसे स्थान जहां बिजली की उपलब्धता सीमित हो, वहां दिन के समय अतिरिक्त रोशनी के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि मोजर लैंप रात में काम नहीं करता, क्योंकि इसकी रोशनी पूरी तरह सूर्य की किरणों पर निर्भर होती है। इसलिए इसे बिजली के बल्ब का पूर्ण विकल्प नहीं बल्कि दिन के समय प्राकृतिक रोशनी उपलब्ध कराने का एक तरीका समझना बेहतर है।

कम लागत में दिन की रोशनी पहुंचाने का तरीका

मोजर लैंप की लोकप्रियता का एक कारण इसकी सरलता और कम लागत है। इसमें महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जरूरत नहीं पड़ती और पुरानी पारदर्शी प्लास्टिक बोतल का भी उपयोग किया जा सकता है। इसी वजह से कम संसाधनों वाले समुदायों में इसे दिन के समय रोशनी उपलब्ध कराने के एक आसान उपाय के तौर पर अपनाया गया। कुल मिलाकर, छत में सही तरीके से लगाई गई पानी से भरी पारदर्शी बोतल सूर्य की रोशनी को पानी के माध्यम से कमरे के अंदर फैलाने में मदद कर सकती है। करीब 26 साल पहले ब्राजील में शुरू हुआ यह प्रयोग बाद में कई देशों में पहुंचा और 'मोजर लैंप' के नाम से पहचाना जाने लगा। हालांकि, इसे 60 वाट के बल्ब का निश्चित विकल्प मानना सही नहीं होगा। इसकी रोशनी मौसम, सूर्य की स्थिति, कमरे और इंस्टॉलेशन पर निर्भर करती है। साथ ही छत में इसे लगाते समय वॉटरप्रूफिंग और संरचनात्मक सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

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