चीनी के दाम बढ़ने की असली वजह क्या है ? सरकार ने एथेनॉल वाले दावे पर दिया जवाब
Udaipur Times, Sugar Price Hike : चीनी की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 15 दिन पहले जहां चीनी का औसत खुदरा भाव रु48 प्रति किलो था, वहीं अब यह बढ़कर करीब रु56 प्रति किलो पहुंच गया है। यानी कीमत में लगभग रु8 प्रति किलो तक का इजाफा देखने को मिला है। इस बढ़ोतरी के पीछे कुछ लोग एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को जिम्मेदार बता रहे थे। हालांकि, सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए चीनी की कीमत बढ़ने की दूसरी वजहें बताई हैं।
एथेनॉल की वजह से नहीं बढ़े चीनी के दाम
सरकार के मुताबिक, चीनी की हालिया कीमत वृद्धि को एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं है। सरकार ने कहा कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। चालू 2025-26 मार्केटिंग वर्ष में करीब 28 लाख टन चीनी का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए हुआ है।
सरकार का कहना है कि उपलब्ध स्टॉक को देखते हुए एथेनॉल के लिए चीनी के इस्तेमाल को कीमतों में अचानक हुई तेजी का मुख्य कारण नहीं माना जा सकता।
गन्ने की फसल को नुकसान से उत्पादन प्रभावित
चीनी उत्पादन में कमी की एक बड़ी वजह गन्ने की फसल को हुआ नुकसान बताया गया है। सरकार के अनुसार गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसे रोगों का असर पड़ा है। इसके अलावा कई इलाकों में ज्यादा बारिश और जलभराव की वजह से भी फसल प्रभावित हुई है।
मार्केटिंग वर्ष 2025-26 में चीनी उत्पादन का अनुमान पहले 343 लाख टन था, जिसे अब घटाकर करीब 306 लाख टन किया गया है।
देश में चीनी की कितनी जरूरत?
सरकार के अनुसार देश में चीनी की सालाना घरेलू मांग करीब 280-285 लाख टन है। उत्पादन में कमी के बावजूद सरकार का कहना है कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
इसके बावजूद कीमतों में तेजी को सरकार ने उचित नहीं माना है और चीनी की जमाखोरी तथा कालाबाजारी के खिलाफ राज्यों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
जाने सरकार ने उठाए क्या कदम
चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। एहतियाती कदम के तौर पर 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी गई है।
इसके अलावा कारोबारियों और शीतल पेय व आइसक्रीम बनाने वाली कंपनियों जैसे थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की गई है।
चीनी मिलों में जल्द शुरू होगी पेराई
सरकार ने चीनी मिलों में इस साल करीब 15 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कराने की तैयारी करने को कहा है। इससे नई फसल आने के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
जाने कितनी बढ़ी चीनी की कीमत?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 15 दिन पहले खुदरा कीमत करीब रु48 प्रति किलो थी जबकि मौजूदा औसत खुदरा कीमत करीब प्रति किलो हो गयी है जिसजे रु 8 से बढ़ोतरी हुई है, आने वाले समय मैं ये कीमत रुपये 62 तक होने की संभावना है।
क्या एथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी?
सरकार का जवाब है नहीं। सरकार के मुताबिक हालिया तेजी का कोई ऐसा बुनियादी कारण नहीं है, जिससे इसे सीधे एथेनॉल उत्पादन से जोड़ा जाए। फसल को हुए नुकसान, उत्पादन में कमी और बाजार में कीमतों में तेज वृद्धि को देखते हुए सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर कार्रवाई के साथ-साथ आयात और स्टॉक लिमिट जैसे कदम उठाए हैं।