धान में कब-कब और कितनी डालनी चाहिए खाद ? जानिए एक्सपर्ट ने बताई पूरी जानकारी
Udaipur Times, Kisan News, Dhan Fasal : धान की अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ समय पर सिंचाई और निराई-गुड़ाई ही जरूरी नहीं है, बल्कि फसल को सही समय पर पर्याप्त पोषक तत्व मिलना भी बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर धान की फसल में यूरिया की दूसरी और तीसरी खुराक कब और कितनी मात्रा में दी जाए, इसे लेकर किसानों के मन में अक्सर सवाल रहता है। इसी को लेकर धान अनुसंधान केंद्र, बिक्रमगंज, रोहतास के वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश ने किसानों को खाद प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि धान में खाद की मात्रा फसल की अवस्था, मिट्टी की उर्वरता और खेत की स्थिति को ध्यान में रखकर तय करनी चाहिए। जरूरत से ज्यादा खाद डालने के बजाय संतुलित मात्रा में पोषक तत्व देना फसल के लिए अधिक उपयोगी रहता है।
धान की रोपाई के समय दी जाती है पहली खुराक
धान की फसल में खाद की पहली खुराक सामान्य तौर पर रोपाई के समय खेत में दी जाती है। इसके बाद फसल की बढ़वार के साथ पौधों को अतिरिक्त पोषक तत्वों की जरूरत पड़ने लगती है। खासकर कल्ले निकलने की अवस्था में पौधों की वृद्धि के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता बढ़ जाती है। यही वजह है कि पहली खुराक के बाद दूसरी खुराक का समय और मात्रा सही रखना जरूरी होता है। वैज्ञानिक के मुताबिक, किसान को खाद की मात्रा तय करते समय पहले से दी गई खाद और खेत की वास्तविक स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए।
जाने दूसरी खुराक कब डालें?
डॉ. प्रकाश के अनुसार धान में दूसरी खुराक रोपाई के लगभग 20 से 40 दिनों के अंदर दी जा सकती है। इस अवधि में फसल की बढ़वार तेजी से होती है और पौधों में कल्ले निकलने की प्रक्रिया भी चलती है।
ऐसे में खेत की स्थिति और फसल की जरूरत को देखते हुए यूरिया का संतुलित इस्तेमाल किया जाना चाहिए। दूसरी खुराक बहुत देर से देने या जरूरत से ज्यादा यूरिया डालने से बचना चाहिए।
दूसरी खुराक में खेत में कितनी यूरिया दें?
वैज्ञानिक ने बताया कि अगर किसान ने पहली खुराक में एक हेक्टेयर में करीब 240 से 260 किलोग्राम यूरिया का इस्तेमाल किया है, तो दूसरी खुराक में मात्रा को संतुलित रखना चाहिए। उनके अनुसार, दूसरी खुराक में लगभग एक-तिहाई मात्रा के हिसाब से यूरिया का प्रयोग किया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर खेत की माप के आधार पर उन्होंने प्रति बिगहा करीब 20 से 25 किलोग्राम यूरिया देने की जानकारी दी। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में बिगहा के क्षेत्रफल में अंतर होता है। इसलिए किसानों को अपने खेत के वास्तविक क्षेत्रफल के अनुसार खाद की मात्रा तय करनी चाहिए।
धान में जिंक सल्फेट का भी रखें ध्यान
धान की फसल में केवल नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती। अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व भी पौधों की सामान्य वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। डॉ. प्रकाश ने जिंक सल्फेट के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि धान में जिंक की कमी होने पर पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इसलिए जहां मिट्टी या फसल में जिंक की कमी की स्थिति हो, वहां कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार जिंक सल्फेट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
तीसरी खुराक कब दें?
धान की फसल में तीसरी खुराक बालियां निकलने की अवस्था से पहले देने की सलाह दी गई है। यह फसल की ऐसी अवस्था होती है जब पौधे प्रजनन वृद्धि की ओर बढ़ रहे होते हैं। इस समय भी फसल में पोषक तत्वों की उपलब्धता बनाए रखना जरूरी होता है। तीसरी खुराक का उद्देश्य फसल को उसकी आगे की विकास अवस्था के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराना है। हालांकि, इसकी मात्रा खेत और फसल की स्थिति के अनुसार ही निर्धारित की जानी चाहिए।
तीसरी खुराक में यूरिया के साथ जिंक
डॉ. प्रकाश के अनुसार तीसरी खुराक के दौरान यूरिया के साथ जिंक सल्फेट का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने करीब 100 ग्राम जिंक प्रति कट्ठा या लगभग 2 किलोग्राम प्रति बिगहा की दर से देने की जानकारी दी है। हालांकि, किसानों को खाद की मात्रा अपनी इच्छा से बढ़ाकर नहीं डालनी चाहिए। खेत में पहले से मौजूद पोषक तत्व, मिट्टी की स्थिति और फसल की जरूरत को देखते हुए ही खाद का इस्तेमाल करना अधिक उचित है।
जरूरत से ज्यादा यूरिया डालने से बचें
किसानों के लिए यह समझना जरूरी है कि अधिक यूरिया डालने से हमेशा उत्पादन बढ़ेगा, ऐसा नहीं है। जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने पर पौधे अत्यधिक हरे और कमजोर हो सकते हैं। इससे फसल में दूसरी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। वहीं, पोषक तत्वों की कमी होने पर पौधों की वृद्धि और संभावित उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए धान की फसल में खाद का इस्तेमाल संतुलित तरीके से करना जरूरी है।
खाद डालते समय खेत में पर्याप्त नमी जरूरी
धान में खाद डालते समय खेत की नमी का भी ध्यान रखना चाहिए। खाद का सही उपयोग तभी बेहतर तरीके से हो सकता है जब खेत की स्थिति उपयुक्त हो। किसानों को खाद डालने से पहले खेत की स्थिति और फसल की अवस्था का निरीक्षण कर लेना चाहिए। इसके अलावा केवल अनुमान के आधार पर यूरिया की मात्रा बढ़ाने के बजाय मिट्टी जांच और कृषि वैज्ञानिक की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर है।
किसानों के लिए जरूरी बात
धान की फसल में दूसरी और तीसरी खाद की खुराक का समय फसल की अवस्था के हिसाब से तय करना महत्वपूर्ण है। दूसरी खुराक सामान्य तौर पर रोपाई के 20 से 40 दिन के बीच और तीसरी खुराक बालियां निकलने से पहले की अवस्था में दी जाती है। वहीं, यूरिया और जिंक सल्फेट की मात्रा खेत की स्थिति और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार तय करना बेहतर रहेगा।
वैज्ञानिक की सलाह का मुख्य संदेश यही है कि सही समय पर संतुलित मात्रा में खाद का इस्तेमाल करें और जरूरत से ज्यादा यूरिया डालने से बचें। मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर पोषक तत्वों का प्रबंधन करने से किसान खाद की लागत को नियंत्रित रखते हुए फसल की जरूरत के अनुसार पोषण दे सकते हैं।