माता-पिता की हुई मौत तो बहन बनी सहारा ! कड़ी मेहनत से UPSC क्रैक कर दीपांशु बने IAS अफसर
Udaipur Times, Deepanshu Jindal UPSC Success Story : कहते है की मेहनत करने वालों की कभी भी हार नहीं होती है, क्योंकि जो मेहनत करना जानते है वो एक न एक दिन सफल जरूर होते है। आज हम ऐसी ही मेहनत भरी कहानी आपको बताने जा रहे है, जिन्होंने बिना हार माने 2 बार UPSC में फेल होने के आड़ तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की, आज हम आयात कर रहे है आईएएस अफसर दीपांशु जिंदल की।
दीपांशु जिंदल का सफर भी संघर्षों से भरा हुआ है। माता-पिता का साया सिर से उठने के बाद घर खाली हो गया और चारों ओर बस सन्नाटा था। 2 महीने में अपनों को खोने का दर्द, अकेलापन और आर्थिक चुनौतियों के बीच दीपांशु ने अपने माता-पिता के सपनों को सबसे बड़ी ताकत बनाया तो बड़ी बहन ने सहारा दिया और आगे बढ़ने का हौंसला भी। UPSC Success Story
उन्होंने UPSC में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 38 हासिल की और IAS बनने का सपना पूरा किया।
पिता को कैंसर
दीपांशु जिंदल पंजाब के मोगा के रहने वाले हैं। उनके पिता इंजीनियर और उनकी मां घर संभालती थीं। उनकी बहन IAS अधिकारी थीं और घर में सपनों की कोई कमी नहीं थीं। वह 12वीं में थे तो उनके पिता कैंसर हो गया था। एक तरफ उनके पिता का इलाज चलता रहा और दूसरी तरफ दीपांशु की पढ़ाई। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के SRCC जैसे प्रतिष्ठित कॉलेज में प्रवेश लिया और गोल्ड मेडलिस्ट भी बने। UPSC Success Story
जब वह अपने काॅलेज के पहले सेमेस्टर में थे। इस दौरान उनके पिता का निधन हो गया। काॅलेज से छुट्टी न मिल पाने के कारण उन्हें बहुत परेशानी हुई। इसके 2 महीने बाद ही उन्होंने अपनी माताजी को भी खो दिया। इसके बाद वह अंदर से टूट गए थे।
कोविड के दौरान वे घर में अकेले रह गए थे। खामोशी और अकेलापन उनके लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। इस दौरान उनकी बड़ी बहन ने उन्हें संभाला और उनका साथ दिया। उनकी बहन उनसे 5 साल बड़ी हैं और वह भी IAS अधिकारी हैं। दीपांशु उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। UPSC Success Story
UPSC की तैयारी के लिए एक कोचिंग ज्वाइन की थी। हालांकि, उनके लिए UPSC की राह आसान नहीं थी क्योंकि माता-पिता के जाने के बाद चुनौतियों के बीच आगे बढ़ना था। शुरुआत के UPSC के 2 प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना भी करना पड़ा लेकिन उन्होंने कदम पीछे नहीं हटाए। अपनी कमियों में सुधार किया और आगे बढ़ने के फैसले पर डटे रहे। UPSC Success Story
UPSC परीक्षा के अपने तीसरे प्रयास 2025 में दीपांशु ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 38 हासिल की। आज वह एक IAS अधिकारी हैं लेकिन उनकी यह सफलता अपने माता-पिता से किए गए वादे की मिसाल है।
