भारत में कब चलेगी बुलेट ट्रेन ! जाने किन रूटों भरेगी रफ्तार और कहां -कहां बनेंगे नए स्टेशन ?
Udaipur Times, Bullet train in India : मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि परियोजना तय समय पर ही शुरू होगी और जापान की अगली पीढ़ी की E10 शिंकानसेन ट्रेन का इंतजार नहीं किया जाएगा। इसके बजाय पहले चरण में भारत में विकसित स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन B-28 को ट्रैक पर उतारा जाएगा।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जापान की E10 शिंकानसेन ट्रेन अभी डिजाइन के चरण में है और इसके 2034 से पहले उपलब्ध होने की संभावना नहीं है। ऐसे में परियोजना में देरी से बचने के लिए भारत और जापान ने मिलकर फैसला किया है कि शुरुआती संचालन स्वदेशी B-28 ट्रेन से किया जाएगा।
15 अगस्त 2027 तक शुरू होगा पहला सेक्शन
सरकार का लक्ष्य मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के पहले चरण सूरत से बिलिमोरा के बीच सेवा को 15 अगस्त 2027 तक शुरू करना है। चूंकि उस समय तक जापान की E10 ट्रेन तैयार नहीं होगी, इसलिए इसी रूट पर भारतीय B-28 ट्रेन का संचालन किया जाएगा।
क्या है B-28 की खासियत?
भारत की B-28 बुलेट ट्रेन को 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत विकसित किया जा रहा है। इसका निर्माण बीईएमएल (BEML) और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) मिलकर कर रहे हैं। बेंगलुरु में इसके लिए विशेष निर्माण सुविधा भी तैयार की गई है। ये ट्रेन अधिकतम परिचालन गति 250 से 280 किमी प्रति घंटा से चलेगी। ये 8 कोच वाली ट्रेन होगी। इसमें 560 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी और आधुनिक सुरक्षा और आरामदायक सुविधाओं से लैस होगी।
यूरोपीय सिग्नलिंग सिस्टम से चलेगी ट्रेन
B-28 ट्रेन में यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) का इस्तेमाल किया जाएगा। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की सिग्नलिंग तकनीक है, जिसका उपयोग दक्षिण कोरिया, चीन, ताइवान और कई यूरोपीय देशों में किया जाता है। भारत की नमो भारत (RRTS) ट्रेन भी इसी तकनीक पर आधारित है।
भारत ने क्यों बदली रणनीति?
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए शुरुआत में जापान से तीन प्रमुख तकनीकें ली जानी थीं-
शिंकानसेन बुलेट ट्रेन
सिग्नलिंग सिस्टम
ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (OCC)
जबकि सिविल निर्माण का काम भारत के जिम्मे था।
लेकिन जापान अभी तक E10 ट्रेन, सिग्नलिंग सिस्टम और ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर के लिए अंतिम प्रस्ताव नहीं दे पाया है, क्योंकि E10 ट्रेन अभी विकास के चरण में है। ऐसे में परियोजना 2034 तक टल सकती थी। इसी वजह से भारत ने अपनी हाई-स्पीड ट्रेन विकसित करने का फैसला किया।
भारत की हाई-स्पीड रेल क्षमता होगी मजबूत
सरकार का मानना है कि इस फैसले से न सिर्फ मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना समय पर पूरी होगी, बल्कि भारत हाई-स्पीड रेल तकनीक और निर्माण के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनेगा। इससे भविष्य की बुलेट ट्रेन परियोजनाओं में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।
7 नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर भी काम
सरकार भविष्य में देश में सात और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इनमें प्रमुख कॉरिडोर हैं-
दिल्ली–वाराणसी
मुंबई–पुणे
हैदराबाद–बेंगलुरु
हैदराबाद–चेन्नई
चेन्नई–बेंगलुरु
पुणे–हैदराबाद
दिल्ली–वाराणसी–सिलीगुड़ी
इन परियोजनाओं के पूरा होने से देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार होगा।
