IAS या IFS किसमें ज्यादा सैलरी मिलती है, रिटायरमेंट के बाद किसकी सुविधा होती है ज्यादा ?
Udaipur Times, IAS or IFS which one offers a higher salary : यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की सिविल सर्विस परीक्षा देश की सबसे मुश्किल और प्रतिष्ठित परीक्षा है। हर साल UPSC के नतीजे आने के बाद एक खास ट्रेंड देखने को मिलता है: ज़्यादातर टॉपर्स की पहली पसंद 'IAS' (इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस) होती है।
लोग किसी जिले की जिम्मेदारी संभालने और सीधे जनता के साथ काम करने को ही असली ताकत मानते हैं। IAS का मतलब है रुतबा, सरकारी गाड़ियां, सरकारी बंगले और सबसे ज़्यादा अधिकार ये ऐसी खूबियां हैं जो IFS (इंडियन फॉरेन सर्विस) के आकर्षण पर भारी पड़ती हैं।
क्या आप जानते हैं कि जब रुतबे की इस दौड़ में पैसे की बात आती है, तो आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं?
मशहूर कंटेंट क्रिएटर और एंटरप्रेन्योर अंकुर वारिकू ने IAS और IFS अधिकारियों की सैलरी और भत्तों के बारे में दिलचस्प जानकारी शेयर की है। वारिकू के अनुसार, भले ही देश में IAS का सबसे ज़्यादा क्रेज़ हो, लेकिन कमाई के मामले में IFS अधिकारी असल में IAS अधिकारियों से आगे निकल जाते हैं। आइए, IAS और IFS के बीच सैलरी, भत्तों और करियर में आगे बढ़ने के मौकों में अंतर को समझते हैं।
IAS या IFS: कौन ज़्यादा कमाता है?
हालांकि IAS और IFS अधिकारी एक ही UPSC परीक्षा, मेरिट लिस्ट और ट्रेनिंग प्रोग्राम से आते हैं, लेकिन उनके करियर का रास्ता पहले दिन से ही अलग हो जाता है। शुरुआत में, उनकी बेसिक सैलरी लगभग एक जैसी होती है; लेकिन पांच साल के अनुभव के बाद, उनके काम की दुनिया में काफ़ी बदलाव आ जाता है।
IAS अधिकारी जमीनी स्तर पर प्रशासन संभालते हैं और अपने होम कैडर में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के तौर पर काम करते हैं। इसके उलट, IFS अधिकारियों की पोस्टिंग विदेशों में भारतीय दूतावासों में होती है, और वे आम तौर पर 'थर्ड सेक्रेटरी' के तौर पर शुरुआत करते हैं।
यहीं पर पैसे का गणित बदल जाता है। IFS अधिकारी को मिलने वाला फॉरेन अलाउंस (विदेशी भत्ता) US डॉलर में दिया जाता है और यह टैक्स-फ्री होता है।
IFS अधिकारी अपनी सर्विस का ज़्यादातर समय विदेशों में भारतीय दूतावासों और हाई कमीशन में बिताते हैं। जब उनकी पोस्टिंग ब्रिटेन, अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में होती है, तो डॉलर में मिलने वाला भत्ता उनकी कुल कमाई को काफ़ी बढ़ा देता है।
अंकुर वारिकू के अनुसार, 27 साल की उम्र तक एक IFS अधिकारी की कुल मासिक कमाई ₹3–4 लाख तक पहुंच जाती है। इसके उलट, जहां IAS अधिकारियों को सरकारी बंगले, गाड़ियाँ और स्टाफ़ जैसी सुविधाएँ मिलती हैं, वहीं उनकी इन-हैंड सैलरी इस विदेशी अलाउंस के मुकाबले बहुत कम होती है।
विदेशी पोस्टिंग और डॉलर में होने वाली कमाई का फ़ायदा
रिटायरमेंट के समय कौन आगे रहता है?
सर्विस के 15वें साल तक, IAS अधिकारी आमतौर पर किसी ज़िले या राज्य सचिवालय में अहम ज़िम्मेदारियाँ संभाल रहे होते हैं। वहीं, IFS अधिकारी बड़े देशों में दूतावासों में 'फ़र्स्ट सेक्रेटरी' या 'काउंसलर' जैसे पदों पर पहुँच जाते हैं। इस दौरान, IFS अधिकारियों को शानदार फ़ायदे मिलते हैं, जैसे दूतावास के आलीशान अपार्टमेंट और बच्चों के लिए मुफ़्त शिक्षा।
यह अंतर रिटायरमेंट के समय (लगभग 35 साल की सर्विस के बाद) और भी साफ हो जाता है।
एक IAS अधिकारी 'सेक्रेटरी' के पद से रिटायर होता है; उन्हें पेंशन तो मिलती है, लेकिन उनका सरकारी बंगला और दूसरी सुविधाएं वापस ले ली जाती हैं। इसके उलट, एक IFS अधिकारी 'एम्बेसडर' (राजदूत) के तौर पर रिटायर होता है। चूंकि वे अपने करियर का ज़्यादातर समय टैक्स-फ़्री डॉलर कमाने में बिताते हैं, इसलिए रिटायरमेंट के समय उनकी आर्थिक स्थिति बहुत मज़बूत होती है।
IAS प्रमोशन चार्ट और बेसिक सैलरी का गणित समझें
IAS अधिकारियों की बेसिक सैलरी उनकी सर्विस के सालों और पे-लेवल से तय होती है; इसका स्ट्रक्चर इस प्रकार है:
1–4 साल: SDM/अंडर सेक्रेटरी (लेवल 10) – बेसिक सैलरी: ₹56,100
5–8 साल: ADM/डिप्टी सेक्रेटरी (लेवल 11) – बेसिक सैलरी: ₹67,700
9–12 साल: डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट/डायरेक्टर (लेवल 12) – बेसिक सैलरी: ₹78,800
13–16 साल: DM/सिलेक्शन ग्रेड डायरेक्टर (लेवल 13) – बेसिक सैलरी: ₹1,18,500
16–24 साल: डिविजनल कमिश्नर/जॉइंट सेक्रेटरी (लेवल 14) – बेसिक सैलरी: ₹1,44,200
25–30 साल: प्रिंसिपल सेक्रेटरी/एडिशनल सेक्रेटरी (लेवल 15) – बेसिक सैलरी: ₹1,82,200
34–36 साल: चीफ सेक्रेटरी/सेक्रेटरी (GoI) (लेवल 17) – बेसिक सैलरी: ₹2,25,000
37+ साल: कैबिनेट सेक्रेटरी ऑफ़ इंडिया (लेवल 18) – बेसिक सैलरी: ₹2,50,000