IAS अफसर को कौन कर सकता है सस्पेंड ! जाने किसके पास होती है सबसे बड़ी पावर ?
Udaipur Times, New Delhi : किसी IAS अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई या उसके निलंबन की खबर सामने आते ही अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर किसी IAS अधिकारी को सस्पेंड करने का अधिकार किसके पास होता है? क्या राज्य सरकार अपने स्तर पर किसी IAS अधिकारी को निलंबित कर सकती है या इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है?IAS अधिकारी ऑल इंडिया सर्विस का हिस्सा होते हैं। । इसमें केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिका, अधिकारी की पोस्टिंग और लागू नियमों के आधार पर तय होती है।
IAS अधिकारी के सस्पेंशन का नियम क्या है?
IAS अधिकारियों के निलंबन से जुड़े नियम All India Services (Discipline and Appeal) Rules, 1969 के तहत तय किए गए हैं। इन नियमों में बताया गया है कि किन परिस्थितियों में किसी IAS अधिकारी को निलंबित किया जा सकता है और किस सरकार या प्राधिकरण के पास इसके लिए अधिकार होता है। यानी सिर्फ इतना समझना सही नहीं होगा कि IAS अधिकारी को केवल केंद्र सरकार ही सस्पेंड कर सकती है। अधिकारी उस समय किस सरकार के अधीन काम कर रहा है और मामला किस प्रकृति का है, इसके आधार पर संबंधित प्राधिकरण की भूमिका तय होती है।
क्या राज्य सरकार IAS अधिकारी को सस्पेंड कर सकती है?
हां, कुछ परिस्थितियों में राज्य सरकार IAS अधिकारी को निलंबित कर सकती है। अगर कोई IAS अधिकारी राज्य सरकार के अधीन काम कर रहा है और उसके खिलाफ ऐसी स्थिति पैदा होती है जिसमें तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी समझी जाती है, तो राज्य सरकार निलंबन का आदेश जारी कर सकती है। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा निलंबन किए जाने के बाद इसकी जानकारी संबंधित काडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी और केंद्र सरकार को नियमों के मुताबिक देनी होती है। यही वजह है कि IAS अधिकारी के निलंबन के मामलों में केंद्र और राज्य दोनों स्तरों की भूमिका दिखाई देती है।
निलंबन के बाद केंद्र को देनी होती है जानकारी
IAS अधिकारी को निलंबित करने के बाद प्रक्रिया वहीं खत्म नहीं हो जाती। संबंधित सरकार को नियमों के तहत निलंबन की जानकारी और उससे जुड़े कारणों की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजनी होती है।इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई नियमों के अनुरूप हो और केंद्र सरकार के स्तर पर भी इसकी जानकारी उपलब्ध रहे।इसलिए किसी IAS अधिकारी के निलंबन में सिर्फ आदेश जारी करना ही पूरी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उसके बाद भी कई प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं।
क्या है 30 दिन वाला नियम?
IAS अधिकारियों के निलंबन से जुड़े नियमों में 30 दिनों की अवधि को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। राज्य सरकार द्वारा किए गए निलंबन को आगे जारी रखने के लिए निर्धारित समय के बाद केंद्र सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।। यानी राज्य सरकार द्वारा किया गया निलंबन अनिश्चित समय तक अपने आप जारी नहीं रह सकता। निलंबन की अवधि बढ़ाने के लिए नियमों के मुताबिक आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।यही कारण है कि IAS अधिकारी के निलंबन के मामलों में यह देखना जरूरी होता है कि निलंबन किस प्राधिकरण ने किया है, किस आधार पर किया गया है और उसके बाद नियमों के तहत क्या प्रक्रिया अपनाई गई है।
अगर IAS अधिकारी केंद्र सरकार के अधीन काम कर रहा हो तो? अगर कोई IAS अधिकारी केंद्र सरकार के अधीन प्रतिनियुक्ति पर काम कर रहा है, तो उसकी स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे मामलों में निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े अधिकार संबंधित केंद्रीय प्राधिकरण और लागू नियमों के अनुसार तय होते हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर IAS अधिकारी को सस्पेंड करने की शक्ति हमेशा राज्य सरकार या हमेशा केंद्र सरकार के पास ही होती है। अधिकारी की पोस्टिंग, कैडर और मामले की परिस्थितियां इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
क्या निलंबन का मतलब नौकरी से निकालना होता है?
नहीं। सस्पेंशन यानी निलंबन नौकरी से बर्खास्तगी नहीं है।
निलंबन के दौरान अधिकारी को अपने पद के सामान्य अधिकारों और जिम्मेदारियों से अलग रखा जाता है, जबकि उसके खिलाफ जांच या अनुशासनात्मक प्रक्रिया आगे चल सकती है। जांच पूरी होने और मामले में अंतिम निर्णय आने के बाद अधिकारी के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है। परिस्थितियों के आधार पर उसे आरोपों से मुक्त किया जा सकता है या फिर नियमों के तहत अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
तो आखिर IAS अधिकारी को सस्पेंड करने की पावर किसके पास है?
सीधे शब्दों में कहें तो IAS अधिकारी के निलंबन की शक्ति परिस्थितियों और अधिकारी की सेवा स्थिति के आधार पर तय होती है। राज्य सरकार के पास भी कुछ परिस्थितियों में IAS अधिकारी को निलंबित करने का अधिकार होता है, जबकि केंद्र सरकार के पास भी नियमों के तहत महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं।इसलिए हर मामले में यह देखना जरूरी है कि अधिकारी उस समय किस सरकार के अधीन कार्यरत था और निलंबन किस नियम के तहत किया गया है।
IAS अधिकारी को सस्पेंड करने की प्रक्रिया All India Services (Discipline and Appeal) Rules, 1969 के तहत चलती है। राज्य सरकार कुछ परिस्थितियों में IAS अधिकारी को निलंबित कर सकती है, लेकिन इसके बाद नियमों के मुताबिक केंद्र सरकार को सूचना और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होती है। वहीं, केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत IAS अधिकारी के मामलों में संबंधित केंद्रीय प्राधिकरण की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए किसी IAS अधिकारी के निलंबन को समझने के लिए केवल यह सवाल काफी नहीं है कि “किसके पास पावर है?” बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि अधिकारी की पोस्टिंग कहां है, कार्रवाई किस आधार पर हुई है और संबंधित नियम उस मामले में क्या कहते हैं।