IAS और IPS अधिकारियों का ट्रांसफर करने का अधिकार किसके पास होता है ? यहां जानिए
Udaipur Times, Who transfers IAS and IPS officers : 21 सितंबर, 2026 की देर रात उत्तर प्रदेश में 34 IAS अधिकारियों का तबादला किया गया। इस फेरबदल में 14 जिलों के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) बदले गए, जिनमें कानपुर नगर, मुरादाबाद, हरदोई, एटा, कुशीनगर, अमेठी, पीलीभीत, बलिया, बागपत, महोबा, संत कबीर नगर, बिजनौर, हाथरस और हमीरपुर शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश में 34 IAS अधिकारियों के हालिया तबादलों के बाद, यह सवाल फिर से चर्चा में है कि IAS और IPS जैसे सीनियर अधिकारियों की पोस्टिंग बदलने का अधिकार किसके पास है। इन अधिकारियों का करियर सिर्फ़ परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं होता; उनकी पोस्टिंग, कैडर और तबादले खास प्रशासनिक नियमों से तय होते हैं। आइए समझते हैं कि IAS और IPS अधिकारियों का तबादला कौन करता है।
कौन करता है IAS और IPS अधिकारियों का ट्रांसफर?
IAS और IPS अधिकारी 'ऑल इंडिया सर्विसेज़' (अखिल भारतीय सेवा) का हिस्सा होते हैं। उनके तबादले इस बात पर निर्भर करते हैं कि वे राज्य सरकार के साथ काम कर रहे हैं या केंद्र सरकार के साथ। राज्य कैडर में काम करने वाले अधिकारियों की पोस्टिंग और तबादले के फ़ैसले आम तौर पर राज्य सरकार लेती है, जिसमें सिविल सर्विस बोर्ड सलाह देने का काम करता है। इसके उलट, सेंट्रल डेप्युटेशन (केंद्रीय प्रतिनियुक्ति) पर तैनात अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले केंद्र सरकार के नियमों के तहत होते हैं।
यह अधिकार किसके पास है?
IAS और IPS अधिकारियों के लिए अलग-अलग कैडर नियम हैं। IAS कैडर नियम, 1954 के अनुसार, राज्य कैडर में तैनात अधिकारियों का एक ज़िले से दूसरे ज़िले या किसी दूसरे विभाग में तबादला करने का फ़ैसला राज्य सरकार करती है। इसमें DM, कलेक्टर, SP और सेक्रेटरी जैसे पदों पर पोस्टिंग शामिल है। ऐसे तबादलों के फ़ैसले आम तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय या संबंधित विभाग से जुड़ी प्रक्रियाओं के बाद लिए जाते हैं।
हालांकि, अगर कोई IAS या IPS अधिकारी केंद्र सरकार के किसी मंत्रालय या विभाग में डेप्युटेशन पर है, तो उनकी नियुक्ति और तबादले से जुड़े फ़ैसले केंद्रीय स्तर पर लिए जाते हैं। इस प्रक्रिया में कैबिनेट की अपॉइंटमेंट्स कमिटी (ACC) की भूमिका होती है, जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।
क्या हर ट्रांसफर तुरंत किया जा सकता है?
अधिकारियों की पोस्टिंग के लिए कम से कम कार्यकाल (टेन्योर) का भी प्रावधान है। नियमों के तहत, दो साल का स्टैंडर्ड मिनिमम टेन्योर प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए रखा गया है। तय समय पूरा होने से पहले किसी भी तबादले के लिए एक तय कमिटी की सिफ़ारिश ज़रूरी होती है। IAS कैडर के नियमों के तहत, तय न्यूनतम कार्यकाल पूरा होने से पहले किए जाने वाले तबादलों के लिए भी एक समिति की सिफारिश ज़रूरी है।
सिविल सर्विसेज़ बोर्ड का क्या काम है?
सिविल सर्विसेज़ बोर्ड तबादलों और पोस्टिंग में भूमिका निभाता है। यह तबादलों और न्यूनतम कार्यकाल जैसे मामलों पर सिफारिशें करता है। हालांकि, अंतिम फैसला सरकार का होता है।