जाने कौन हैं IRS निशा उरांव ? धर्मांतरण के खिलाफ खोला मोर्चा, हर किसी को कर रही जागरूक
Udaipur Times : धर्मांतरण के खिलाफ झारखंड में एक नया अभियान चलाया जा रहा है। झारखंड में बहुत ज्यादा आदिवासी लोग रहते है जिन्हे धर्मांतरण की जानकारी बिल्कुल ही कम है। झारखंड के आदिवासी बहुल ग्रामीण इलाकों में IRS की अधिकारी निशा उरांव के नेतृत्व में इन दिनों धर्मांतरण के खिलाफ ये अभियान चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, वो लगातार गांवों का दौरा कर आदिवासी समुदायों को उनकी समृद्ध संस्कृति, अनूठे गीत-संगीत और गौरवशाली इतिहास के प्रति जागरूक कर रही हैं। Nesha Oraon
असमय ही मर जाएगा
जानकारी के मुताबिक, निशा उरांव ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा -इस बड़े से पेड़ को देखिए, इसकी मजबूती इसकी जड़ों में है। हमारी सदियों पुरानी परंपराएं ही हमारी जड़े हैं। अगर हम इन जड़ों में पूजा, आस्था विश्वास रूपी खाद-पानी डालेंगे, तो हमारा समाज हमेशा हरा-भरा रहेगा। लेकिन यदि इस पेड़ की जड़ में नमक डाल दिया जाए, तो पेड़ असमय ही मर जाएगा। Nesha Oraon
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति लालच या किसी अन्य वजह से अपना धर्म और आस्था छोड़ता है, तो वह वास्तव में अपनी संस्कृति की जड़ में नमक डालने का काम कर रहा होता है।
परंपरा और संस्कृति
मिली जानकारी के अनुसार, निशा उरांव ने अपने समाज के लोगों के अपील करते हुए कहा कि लोगों को अपने पूर्वजों, देवी-देवताओं और पारंपरिक लोकगीतों को कभी नहीं भूलना चाहिए। अगर लोग अपनी पहचान खो देंगे, तो अपनी परंपराओं का यह पेड़ हमेशा के लिए सूख जाएगा। Nesha Oraon
अभियान को समर्थन
जानकारी के मुताबिक, IRS अधिकारी निशा उरांव इस अभियान के जरिए आदिवासियों को यह समझाने में सफल हो रही हैं कि धर्म परिवर्तन सिर्फ पूजा पद्धति बदलना नहीं, बल्कि अपनी सदियों पुरानी पहचान को खुद मिटा देना है। उनके इस जमीनी प्रयास के ग्रामीण इलाकों में काफी समर्थन मिल रहा है। Nesha Oraon
कौन हैं निशा उरांव
मिली जानकारी के अनुसार, IRS निशा उरांव पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव की बेटी हैं। IRS अधिकारी रहने दौरान वो लगातार सामाजिक कार्यक्रमों में भी भाग लेती है। जानकारी के मुताबिक, पिछले दिनों जब झारखंड कैबिनेट से पेसा नियमावली को मंजूरी मिली थी, Nesha Oraon तो उन्होंने इसे आदिवासी समाज के लिए बड़ी जीत करार दिया था, लेकिन बाद में नियमावली के प्रावधान के खिलाफ भी आवाज उठाने का काम किया।
