अब मिनटों में चार्ज होंगे EV और स्मार्टफोन? भारतीय शोधकर्ताओं ने बनाया नया बैटरी एनोड
Udaipur Times, Ultra Fast Battery: 17 जुलाई 2026। शोधकर्ताओं ने बेहतर ऊर्जा भंडारण क्षमता वाली लिथियम-आयन बैटरियों के लिए एक नया छिद्रयुक्त कार्बनिक एनोड पदार्थ डिजाइन किया है। इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन, लैपटॉप और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ऊर्जा भंडारण की बढ़ती मांग के साथ, ऐसी बैटरियों की आवश्यकता भी बढ़ रही है जिन्हें जीवनकाल को प्रभावित किए बिना तेजी से चार्ज किया जा सके।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत आने वाले भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ (IACS) और एसएन बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र (SNBNCBS) के शोधकर्ताओं ने इस चुनौती का समाधान करने के लिए, एक नया छिद्रयुक्त कार्बनिक पदार्थ (Covalent Oorganic Framework) विकसित किया है, जो लिथियम आयनों - बैटरी में ऊर्जा संग्रहित करने वाले छोटे आवेशित कणों - को बहुत सरलता से मूव करने में सक्षम बनाता है।
इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (आईएसीएस) की डॉ. उर्मीमाला मैत्रा और एसएन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (SNBNCBS) के डॉ. प्रदीप पचफुले के नेतृत्व में एक सहयोगी अनुसंधान दल ने एक नया कोवेलेंट ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (COF) पदार्थ विकसित किया है जो भविष्य की रिचार्जेबल बैटरियों को टिकाऊ और विश्वसनीय रहते हुए बहुत तेजी से चार्ज करने में मदद कर सकता है।
नवविकसित सामग्री की बदौलत बैटरी महज एक मिनट में 80 प्रतिशत तक चार्ज हो गई और कई बार चार्ज और डिस्चार्ज होने पर भी इसका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि यही सामग्री सोडियम आयनों को संग्रहित कर सकती है, जिससे भविष्य में किफायती सोडियम-आयन बैटरियों के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। एक व्यावहारिक बैटरी उपकरण में इस सामग्री का सफल संचालन वास्तविक दुनिया में इसके उपयोग की क्षमता को और भी स्पष्ट करता है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्शाती है कि कैसे सोच-समझकर की गई सामग्री डिजाइन सुरक्षित, तेजी से चार्ज होने वाली और लंबे समय तक चलने वाली बैटरियों के विकास में सहायक हो सकती है।
यह सहयोगात्मक कार्य रेखांकित करता है कि सहसंयोजक कार्बनिक ढांचों का विवेकपूर्ण आणविक डिज़ाइन किस प्रकार आयन परिवहन, आवेश भंडारण और संरचनात्मक स्थिरता को एक साथ अनुकूलित कर सकता है, जो कम लागत वाले, तेजी से चार्ज होने वाले और टिकाऊ कार्बनिक बैटरी इलेक्ट्रोड विकसित करने की एक प्रभावी कार्यनीति सुलभ कराती है। यह अध्ययन सतत ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों में महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करने में IACS और SNBNCBS के बीच अंतरविषयी सहयोग की शक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
