सोना अभी सस्ता होगा या फिर चढ़ेंगे दाम ? जानिए अगले 3 महीने का पूरा अनुमान

 | 
सोना अभी सस्ता होगा या फिर चढ़ेंगे दाम ? जानिए अगले 3 महीने का पूरा अनुमान 

Udaipur Times, Gold Price Prediction : बीते दो सालों से सोना निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ था। जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,100 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई, जबकि भारत में यह 1,79,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।

हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों में सोने की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून तिमाही सोने के लिए पिछले लगभग एक दशक की सबसे कमजोर तिमाही साबित हो सकती है।

अगले एक महीने तक दबाव में रह सकता है सोना, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

सोने की कीमतों में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के चलते अगले एक महीने तक सोने के दामों पर दबाव बना रह सकता है। इसके पीछे अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों को प्रमुख वजह माना जा रहा है।

कोटक नियो के कमोडिटी रिसर्च के सीनियर मैनेजर रितेश साहू के मुताबिक, सोने ने अपने सात महीने के निचले स्तर से कुछ रिकवरी जरूर दिखाई है, लेकिन इसका समग्र रुझान अभी भी उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं है। उनका कहना है कि जब तक बाजार को कोई नया सकारात्मक ट्रिगर नहीं मिलता, तब तक सोने की कीमतों में इसी तरह की उठा-पटक जारी रह सकती है।

जानिए सोने के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

निवेशकों के लिए सोने के प्रमुख स्तरों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। फिलहाल एमसीएक्स पर सोना 1,43,127 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है।

रितेश साहू के अनुसार, सोने का पहला मजबूत सपोर्ट 1,37,500 रुपये पर है। यदि कीमतें इस स्तर से नीचे जाती हैं तो सोना 1,34,000 रुपये से लेकर 1,25,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल सकता है।

वहीं, ऊपरी स्तर की बात करें तो सोने का पहला बड़ा रेजिस्टेंस 1,45,500 रुपये पर है। अगर कीमतें इस स्तर को पार कर जाती हैं, तो सोना 1,52,000 रुपये से लेकर 1,60,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

अगले तीन महीनों के लिए क्या है अनुमान?

एसएमसी ग्लोबल सिक्योरिटीज के रविंद्र कुमार के मुताबिक, एमसीएक्स पर सोने को 1,30,000 रुपये के स्तर पर मजबूत सपोर्ट मिल सकता है।

वहीं, केडिया एडवाइजरी के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट अमित गुप्ता का मानना है कि अगले तीन महीनों में एमसीएक्स गोल्ड को 1,35,000 रुपये के आसपास सपोर्ट मिलेगा और इसकी कीमत बढ़कर 1,60,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

चांदी की बात करें तो विशेषज्ञों का अनुमान है कि एमसीएक्स सिल्वर को 1,90,000 रुपये के स्तर पर सपोर्ट मिल सकता है और इसकी कीमत अगले तीन महीनों में बढ़कर 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है।
आखिर क्यों गिर रही हैं सोने की कीमतें?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने में आई गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं।

1. अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदें

इस साल की शुरुआत में बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करेगा, जिससे सोने को समर्थन मिलता। लेकिन मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और लगातार बनी हुई महंगाई ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कमजोर कर दिया।

2. मजबूत हुआ अमेरिकी डॉलर

अमेरिकी डॉलर में मजबूती आने से सोना अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग पर असर पड़ता है।

3. निवेशकों की मुनाफावसूली

लगातार रिकॉर्ड तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे सोने पर दबाव बढ़ा।

4. भू-राजनीतिक तनाव में कमी

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव कम होने से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग कुछ कमजोर हुई है।

क्या सोना अपनी चमक खो रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट का मतलब यह नहीं है कि सोना अपनी अहमियत खो रहा है। इतिहास गवाह है कि सोने में तेजी के बाद अक्सर कुछ समय के लिए करेक्शन देखने को मिलता है।
कई ऐसे कारण अभी भी मौजूद हैं जो लंबी अवधि में सोने को समर्थन दे सकते हैं, जिनमें वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई का दबाव, दुनिया भर में बढ़ता सरकारी कर्ज और केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद  शामिल हैं।

केंद्रीय बैंक लगातार खरीद रहे हैं सोना

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने हर साल औसतन 1,000 टन सोना खरीदा है। यह पिछले दशक के औसत 500 टन से कहीं अधिक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह रुझान बताता है कि सोना अभी भी वैश्विक स्तर पर एक सुरक्षित निवेश विकल्प माना जा रहा है।

भारत में कैसा रहा सोने का प्रदर्शन?

भारत में सोने ने 2024 और 2025 में शानदार रिटर्न दिया। 2026 की पहली तिमाही में भी इसमें करीब 10 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। हालांकि, दूसरी तिमाही में कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।

ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी की मांग में भी कमी आई है, जबकि गोल्ड ETF में कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली की है।

निवेशकों और खरीदारों के लिए क्या है सलाह?

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट एक बेहतर एंट्री पॉइंट साबित हो सकती है। हालांकि, निवेशकों को अपने कुल पोर्टफोलियो का केवल 5 फीसदी हिस्सा ही सोने में निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

वहीं, शादी, त्योहार या व्यक्तिगत जरूरत के लिए सोना खरीदने वाले लोगों के लिए यह गिरावट राहत लेकर आ सकती है, क्योंकि कम कीमतों पर खरीदारी का अवसर मिल सकता है।

आगे क्या रहेगा सोने का रुख?

आने वाले महीनों में सोने की दिशा मुख्य रूप से चार कारकों पर निर्भर करेगी—

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी

वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम

भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों की मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट सिर्फ एक अस्थायी ठहराव है और सोना अभी भी निवेशकों के लिए एक मजबूत सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News