क्या टीचर्स की जगह अब रोबोट पढ़ाएंगे स्कूलों के बच्चे ? जानिए सरकार का पूरा प्लान

 | 
क्या टीचर्स की जगह अब रोबोट पढ़ाएंगे स्कूलों के बच्चे ? जानिए सरकार का पूरा प्लान 

Udaipur Times, AI Robot Teacher : आज के दौर में हर क्षेत्र में एआई खूब तरक्की कर रहा है। अब तो स्कूलों में पढ़ाने के लिए ह्यूमनायड (मानव जैसी बनावट वाले) रोबोटों के दिशा में दुनिया के कई देश आगे बढ़ रहे हैं। हाल ही में न्यूयॉर्क के एक स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने AI-पावर्ड इंसानों जैसे रोबोट को क्लासरूम में पेश करने की तैयारी थी। लंबे भूरे बालों वाले इस स्टेशनरी रोबोट को सैली(Sally) नाम दिया गया है। इसके हाथ-पैर हिल सकते हैं, लेकिन यह चल नहीं सकती थी। 

छात्रों की डेटा प्राइवेसी, सुरक्षा और रोबोट बनाने वाली कंपनी को लेकर उठी चिंताओं को मद्देनजर रखते हुए इस रोबोट के क्लासरुम में आने से रोक दिया गया। लेकिन विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि आने वाले वक्त में  एआई और ह्यूमनायड रोबोट शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन सकते हैं। 

प्राइवेसी के कारण सैली के प्रयोग को रोका गया

रोबोट सैली को इस तरह विकसित किया गया था कि वह इंसानों की तरह बातचीत कर सके, चेहरे के भाव व्यक्त करे और छात्रों व शिक्षकों के सवालों का जवाब दे सके। उसका डिजिटल संस्करण 24 घंटे ऑनलाइन उपलब्ध रहने के लिए भी तैयार किया गया था।  पेरेंट्स और टीचर्स को डर था कि स्टूडेंट्स की पर्सनल जानकारी का गलत इस्तेमाल हो सकता है। स्टेट एजुकेशन कमिश्नर बेट्टी रोजा (Betty Rosa) ने भी लेटर लिखकर डेटा प्राइवेसी और क्लासरूम में रोबोट के रोल पर सवाल उठाए।

वहीं टीचर्स यूनियन का ऐसा मानना था कि यह असली मानव शिक्षकों को हटाने की दिशा में पहला कदम हो सकता है। इसलिए इस रोबोट का सबने जमकर विराेध किया और अंत में इसे बैन करवा दिया। 

पहले भी कई देशों में हो चुका है प्रयोग

बता दें कि इससे पहले भी  जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोप और पूर्वी एशिया के कई देशों में नाओ जैसे रोबोट भाषा शिक्षण और कोडिंग जैसी तकनीकी पढ़ाई में इस्तेमाल किए जा चुके हैं। न्यूजीलैंड में एलेक्सा और ऑस्ट्रेलिया में जेनरेटिव एआई आधारित टूल भी स्कूलों में सीमित रूप से अपनाए जा रहे हैं। 

रोबोट नहीं बन सकते शिक्षक का विकल्प 

कई विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि बहुत बच्चे मशीन से सवाल करने में उतने नहीं झिझक महसूस करेंगे जितना की शिक्षक से कुछ पूछने में करते हैं। रोबोट सीखने की रणनीतियां विकसित करने और छात्रों को लगातार अभ्यास के लिए प्रेरित करने में भी मददगार साबित हुए हैं। लेकिन इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि रोबोट फिलहाल शिक्षकों का विकल्प नहीं बन सकते। 

शिक्षकों की कमी और बढ़ते कार्यभार के कारण स्कूलों में ह्यूमनायड रोबोट का इस्तेमाल बढ़ेगा

विशेषज्ञों का ऐसा भी मानना है कि आने वाले सालों में शिक्षकों की कमी और बढ़ते कार्यभार के कारण स्कूलों में ह्यूमनायड रोबोट का इस्तेमाल बढ़ेगा, लेकिन इनके लिए स्पष्ट कानूनी नियम, कड़ी निगरानी और जवाबदेही तय करना जरूरी होगा।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News