प्रमिताहार और सात्विक़ आहार के साथ ही योगासन से लाभ संभव
सोसाइटी फॉर माइक्रोवायता रिसर्च एंड इंटीग्रेटेड मेडिसिन की ओर से चल रहे सात दिवसीय योग सेमिनार में उपरोक्त्त
सोसाइटी फॉर माइक्रोवायता रिसर्च एंड इंटीग्रेटेड मेडिसिन की ओर से चल रहे सात दिवसीय योग सेमिनार में उपरोक्त्त वक्तव्य सेमिनार के मुख्य प्रवक्ता डॉ. एस. के. वर्मा ने दिया. उन्होंने कहा की योगासन से समुचित लाभ प्राप्त करने में आहार का भी बड़ा महत्त्व है.
उन्होंने कहा की यदि एक व्यक्ति तामसिक आहार जैसे अंडा, मांस, मछली, प्याज, लहसुन का सेवन करता है और साथ ही योगासन का अभ्यास भी करता है, तो उसे योगासन का उतना लाभ नहीं मिलेगा जितना की सात्विक आहार सेवन करने वाले व्यक्ति को मिलेगा क्योंकि जिस तरह आसन का असर शरीर के ग्रंथि चक्रों पर पड़ता है उसी तरह आहार का प्रभाव भी शरीर की प्रत्येक कोशिका पर पड़ता है और दोनों का सम्मिलित प्रभाव शरीर के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है और सात्विक आहार वह होता है जो शरीर और मन दोनों के लिए हितकारी है जैसे दूध, फल- सब्जी, अनाज.
सात्विक आहार के साथ ही उन्होंने प्रमिताहार की भूमिका भी बताते हुए कहा की भोजन सदैव संतुलित तथा सुपाच्य होना चाहिए और दिन में चार बार से अधिक और एक बार में चार खाद्य वस्तुओं से अधिक का सेवन योगाभ्यास करने वालों के लिए वर्जनीय है. इसके साथ ही डॉ वर्मा ने भोजन की शुरुआत मीठे से करने की प्रचलित भ्रान्ति का निराकरण करते हुए बताया की आयुर्वेद के अनुसार शरीर में निर्धारित छह रसों के अनुकूल भोजन की शुरआत सदैव कसैले, फिर तीक्ष्ण, और अंत मीठे से करना चाहिए.
इसकी वैज्ञानिक प्रमाणिकता बताते हुए उन्होंने कहा की भोजन के शुरुआत में कटु और तीक्ष्ण खाद्य पदार्थ पाचक रसों के स्त्रवण में सहायता करते हैं जबकि मीठे खाद्य पदार्थ पाचक रसों के स्त्राव को कम कर पाचन क्रिया को मंद कर देते हैं .
सोसाइटी सचिव डॉ वर्तिका जैन ने बताया की सेमिनार के तीसरे दिन डॉ वर्मा ने आहार और योगासन से संबधित विज्ञान और उसका शरीर पर प्रभाव की विस्तृत चर्चा की और मुख्य प्रशिक्षक आचार्य ललितकृष्णानद अवधूत ने सभी प्रतिभागियों को अनुकूल योगासनो का अभ्यास कराया. सेमिनार का समापन रविवार को होगा.