बिना कोचिंग ऐश्वर्यम ने UPSC में रचा इतिहास, YouTube से स्ट्रैटजी सीख बनी IAS अफसर

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बिना कोचिंग ऐश्वर्यम ने UPSC में रचा इतिहास, YouTube से स्ट्रैटजी सीख बनी IAS अफसर 

Udaipur Times, IAS Aishwaryam Prajapati Success Story : बचपन में जब किसी से पूछा जाता था कि बड़ी होकर क्या बनना है, तो ऐश्वर्यम प्रजापति का जवाब पहले से तय रहता था—उन्हें डीएम बनना है। बचपन में देखा गया यह सपना समय के साथ उनके जीवन का लक्ष्य बन गया। पढ़ाई, नौकरी और यूपीएससी की तैयारी के बीच कई उतार-चढ़ाव आए, पहली कोशिश में उन्हें प्रीलिम्स में ही असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

दूसरी कोशिश में ऐश्वर्यम प्रजापति ने अपनी पिछली गलतियों से सीखते हुए तैयारी की और UPSC Civil Services Examination में ऑल इंडिया रैंक 10 (AIR-10) हासिल की। उनकी सफलता की खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान किसी कोचिंग संस्थान पर निर्भर रहने के बजाय सेल्फ स्टडी, YouTube से मिली जानकारी, ऑनलाइन कंटेंट और टेस्ट प्रैक्टिस को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया।

बिना कोचिंग ऐश्वर्यम ने UPSC में रचा इतिहास

दूरदर्शन के टॉपर इंटरव्यू से मिली थी IAS बनने की प्रेरणा

ऐश्वर्यम प्रजापति की जड़ें लखनऊ, उत्तर प्रदेश से जुड़ी हैं। बचपन से ही उनके मन में प्रशासनिक सेवा को लेकर आकर्षण था। वह दूरदर्शन पर यूपीएससी टॉपर्स के इंटरव्यू देखा करती थीं। इन इंटरव्यू के जरिए उन्हें सिविल सेवा की तैयारी और आईएएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों के बारे में जानने का मौका मिला।

धीरे-धीरे आईएएस बनने का सपना उनके लिए सिर्फ एक इच्छा नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे अपना लक्ष्य बना लिया। पढ़ाई में अच्छी ऐश्वर्यम ने 12वीं के बाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, उत्तराखंड से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। हालांकि कॉलेज के दौरान एक ऐसा अनुभव हुआ, जिसने उनके करियर की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।

मलेथा गांव के सरकारी स्कूल ने बदली सोच

इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष में ऐश्वर्यम को उत्तराखंड के मलेथा गांव के एक सरकारी स्कूल में जाने का मौका मिला। वहां उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूल की समस्याओं को करीब से देखा।स्कूल के शिक्षकों ने उन्हें वहां की कई चुनौतियों के बारे में बताया और उम्मीद जताई कि वह इन समस्याओं को दूर करने की दिशा में कुछ मदद कर सकती हैं। इस अनुभव ने ऐश्वर्यम को सोचने पर मजबूर किया कि अगर समाज में बड़े स्तर पर बदलाव लाना है तो प्रशासनिक भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।

बिना कोचिंग ऐश्वर्यम ने UPSC में रचा इतिहास

यही अनुभव उनके लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। बचपन में देखा गया डीएम बनने का सपना एक बार फिर उनके मन में मजबूत हो गया और उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया।

L&T में मिली नौकरी, लेकिन नहीं छोड़ा UPSC का सपना

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद ऐश्वर्यम का प्लेसमेंट लार्सन एंड टूब्रो (L&T) में हुआ। उस समय कोरोना महामारी के कारण देश में परिस्थितियां सामान्य नहीं थीं। परिवार चाहता था कि वह नौकरी ज्वाइन करें। ऐश्वर्यम ने भी नौकरी करने का फैसला किया, लेकिन इसके साथ उन्होंने अपने पिता के सामने एक शर्त रखी। उन्होंने तय किया कि वह करीब एक साल तक नौकरी करेंगी और इसके बाद पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में जुट जाएंगी। उनकी बात मान ली गई। 

ऐश्वर्यम ने विशाखापट्टनम में करीब एक साल तक नौकरी की। इस दौरान उन्हें कॉरपोरेट वर्क कल्चर का अनुभव मिला और आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी एहसास हुआ। लेकिन उनके मन में आईएएस बनने का लक्ष्य लगातार बना रहा। एक साल की नौकरी पूरी करने के बाद उन्होंने अगस्त में इस्तीफा दिया और यूपीएससी की तैयारी के लिए वापस लौट आईं।

पहली कोशिश में प्रीलिम्स भी नहीं कर पाईं क्लियर

यूपीएससी की तैयारी शुरू करने के लिए ऐश्वर्यम ने इलाहाबाद का रुख किया। शुरुआत में उन्हें परीक्षा के पूरे पैटर्न और तैयारी की रणनीति की ज्यादा जानकारी नहीं थी। ऐसे में उन्होंने YouTube पर टॉपर्स के इंटरव्यू और उनकी तैयारी की रणनीतियां देखनी शुरू कीं। उन्होंने सोशियोलॉजी को अपना ऑप्शनल विषय चुना और तैयारी शुरू कर दी। लेकिन पहली कोशिश में उनसे एक बड़ी रणनीतिक गलती हो गई। 

वह मेंस की तैयारी और आंसर राइटिंग पर इतना ज्यादा ध्यान देने लगीं कि प्रीलिम्स की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा। इसका सीधा असर परिणाम पर पड़ा और पहली कोशिश में वह यूपीएससी प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर सकीं।यह उनके लिए काफी मुश्किल दौर था। जिस परीक्षा को पास करने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ी थी, उसी परीक्षा के पहले चरण में ही उन्हें असफलता मिली थी। लेकिन उन्होंने इस असफलता को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय उससे सीखने का फैसला किया।

दूसरी कोशिश में लखनऊ लौटीं, मां ने दिलाया अलग कमरा

पहली असफलता के बाद ऐश्वर्यम ने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया। दूसरी कोशिश के लिए वह लखनऊ वापस आ गईं। घर में छोटी बहन होने के कारण उन्हें पढ़ाई के लिए हमेशा ऐसा शांत माहौल नहीं मिल पाता था, जिसमें लंबे समय तक एकाग्र होकर पढ़ाई की जा सके। ऐसे में उनकी मां ने घर से महज पांच मिनट की दूरी पर एक कमरा किराए पर दिला दिया। इस छोटे से बदलाव ने उनकी तैयारी में बड़ा फर्क पैदा किया। अब उनके पास पढ़ाई के लिए अलग जगह थी और वह बिना ज्यादा व्यवधान के अपनी तैयारी पर ध्यान दे सकती थीं।

लैपटॉप की स्प्रेडशीट में रोज का हिसाब रखती थीं

दूसरी कोशिश में ऐश्वर्यम ने सिर्फ ज्यादा घंटे पढ़ने के बजाय पढ़ाई को व्यवस्थित तरीके से ट्रैक करने पर जोर दिया। उन्होंने अपने लैपटॉप में एक स्प्रेडशीट बनाई, जिसमें वह रोज की पढ़ाई का हिसाब रखती थीं। वह प्रतिदिन करीब 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं और यह भी देखती थीं कि दिनभर में वास्तव में कितना पढ़ा गया और उनकी तैयारी किस दिशा में आगे बढ़ रही है। 

इस तरीके से उन्हें अपनी कमजोरियों और कमियों को पहचानने में मदद मिली। यानी उनका फोकस सिर्फ घंटों तक किताब के सामने बैठने पर नहीं था, बल्कि पढ़ाई के आउटकम और निरंतरता पर भी था।

अच्छे टेस्ट स्कोर को दीवार पर चिपकाती थीं

ऐश्वर्यम की तैयारी का एक दिलचस्प तरीका उनके टेस्ट स्कोर से जुड़ा था। जब किसी टेस्ट में उन्हें अच्छे नंबर मिलते थे तो वह उन नंबरों को लाल पेन से लिखकर दीवार पर चिपका देती थीं रात में सोने से पहले जब उनकी नजर इन स्कोर पर पड़ती थी तो उन्हें अपनी मेहनत का एहसास होता था। इससे उन्हें आगे भी इसी तरह मेहनत करते रहने का आत्मविश्वास मिलता था। यह तरीका उनकी तैयारी में एक तरह से सेल्फ-मोटिवेशन टूल की तरह काम करता था।

पूरी UPSC तैयारी के दौरान नहीं ली कोई कोचिंग

ऐश्वर्यम प्रजापति की कहानी की सबसे खास बात उनकी बिना कोचिंग की तैयारी है। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के दौरान किसी कोचिंग संस्थान पर नियमित रूप से निर्भरता नहीं रखी।उनकी तैयारी मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी, YouTube पर उपलब्ध टॉपर स्ट्रैटजी, ऑनलाइन कंटेंट, टेस्ट और खुद बनाई गई स्टडी प्लानिंग पर आधारित रही।

हालांकि इंटरव्यू चरण के दौरान मॉक टेस्ट की तैयारी के लिए वह पहली बार दिल्ली की एक कोचिंग में गई थीं। इससे पहले की पूरी तैयारी उन्होंने अपने स्तर पर ही की थी। उनकी कहानी यह बताती है कि यूपीएससी जैसी परीक्षा में कोचिंग मददगार हो सकती है, लेकिन सफलता के लिए सही रणनीति, निरंतरता, टेस्ट प्रैक्टिस और अपनी गलतियों से सीखने की क्षमता भी बेहद महत्वपूर्ण है।

पहली कोशिश की गलती से दूसरी कोशिश में बदली रणनीति

ऐश्वर्यम की सफलता में उनकी पहली असफलता का भी बड़ा योगदान रहा। पहली कोशिश में वह प्रीलिम्स की तैयारी को पर्याप्त समय नहीं दे पाई थीं। दूसरी बार उन्होंने इसी गलती को दोहराने से बचने की कोशिश की। उन्होंने तैयारी को ज्यादा व्यवस्थित किया और हर चरण के लिए समय देने पर ध्यान दिया। रोजाना की पढ़ाई को ट्रैक किया और टेस्ट के जरिए अपनी तैयारी का आकलन करती रहीं। यानी पहली कोशिश में मिली असफलता उनके लिए अंत नहीं बल्कि दूसरी कोशिश की तैयारी का आधार बनी।

दोस्तों से कहती थीं- बस डबल डिजिट रैंक आ जाए

रिजल्ट आने से पहले ऐश्वर्यम दोस्तों के बीच मजाक में अक्सर कहती थीं कि उन्हें बस कोई डबल डिजिट रैंक मिल जाए। उनका कहना था कि वह सिंगल डिजिट रैंक का दबाव नहीं झेलना चाहेंगी। लेकिन जब यूपीएससी का परिणाम आया तो उनकी यह बात एक अलग ही अंदाज में सच हो गई।

उन्हें ऑल इंडिया रैंक 10 मिली।

जिस परीक्षा में पहली कोशिश में वह प्रीलिम्स तक क्लियर नहीं कर पाई थीं, उसी परीक्षा में दूसरी कोशिश में उन्होंने देशभर में 10वीं रैंक हासिल कर ली।

असफलता से AIR-10 तक का सफर

ऐश्वर्यम प्रजापति की UPSC यात्रा को देखें तो इसमें तीन चीजें सबसे ज्यादा नजर आती हैं गलती पहचानना, रणनीति बदलना और लगातार मेहनत करना। उन्होंने पहली असफलता के बाद तैयारी छोड़ने के बजाय यह समझने की कोशिश की कि गलती कहां हुई। दूसरी कोशिश में उन्होंने पढ़ाई को ट्रैक किया, रोजाना 8-10 घंटे की तैयारी की, टेस्ट स्कोर से खुद को मोटिवेट किया और सेल्फ स्टडी पर भरोसा रखा। 

आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और बिना नियमित कोचिंग के UPSC में AIR-10 हासिल करने का उनका सपना पूरा हुआ। उनकी कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो सीमित संसाधनों के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और अपनी रणनीति को लेकर असमंजस में रहते हैं।

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