मकान की सिर्फ रजिस्ट्री करवाने से नहीं बनेंगे आप मालिक ? इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत
Udaipur Times, Property ownership rights : घर खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय निवेश होता है। अक्सर लोग मानते हैं कि पूरी कीमत चुकाकर और रजिस्ट्री अपने नाम कराने के बाद वे उस संपत्ति के कानूनी मालिक बन जाते हैं। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार सिर्फ रजिस्ट्री होना मालिकाना हक का अंतिम और पुख्ता प्रमाण नहीं माना जाता। किसी भी प्रॉपर्टी पर वैध स्वामित्व साबित करने के लिए उसके टाइटल, पुराने दस्तावेज और अन्य कानूनी रिकॉर्ड की भी जांच जरूरी होती है।
रजिस्ट्री (Registry) का क्या मतलब होता है?
ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 और रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के अनुसार 100 रुपये से अधिक मूल्य की अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से ही वैध मानी जाती है। रजिस्ट्री से यह साबित होता है कि संपत्ति का हस्तांतरण हुआ है और उसका रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हो गया है।
सिर्फ रजिस्ट्री (Registry) क्यों नहीं है पर्याप्त?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रॉपर्टी के पुराने मालिकाना हक, टाइटल या दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी हो तो भविष्य में कानूनी विवाद हो सकता है। इसलिए घर खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विक्रेता वास्तव में संपत्ति का कानूनी मालिक है और उस पर किसी अन्य व्यक्ति का दावा या विवाद लंबित नहीं है।
क्या होता है प्रॉपर्टी टाइटल (Property Title)?
प्रॉपर्टी टाइटल किसी संपत्ति के कानूनी मालिकाना हक को दर्शाता है। यह किसी एक दस्तावेज से साबित नहीं होता, बल्कि कई रिकॉर्ड और दस्तावेज मिलकर यह प्रमाणित करते हैं कि संपत्ति का स्वामित्व वैध है और सही तरीके से एक मालिक से दूसरे मालिक को हस्तांतरित हुआ है।
म्यूटेशन (Mutation) क्यों जरूरी है?
घर खरीदने के बाद खरीदार को प्रॉपर्टी का म्यूटेशन भी कराना चाहिए। इससे नगर निगम या राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज हो जाता है और प्रॉपर्टी टैक्स सहित अन्य सरकारी रिकॉर्ड अपडेट हो जाते हैं। हालांकि, म्यूटेशन से मालिकाना हक नहीं मिलता, बल्कि यह केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया है।
घर खरीदते समय इन दस्तावेजों की जरूर करें जांच
रजिस्टर्ड सेल डीड (Registered Sale Deed)
ओरिजिनल टाइटल डीड (Original Title Deed)
एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate-EC)
म्यूटेशन रिकॉर्ड (Mutation Record)
प्रॉपर्टी टैक्स रसीद
पजेशन लेटर (Possession Letter)
ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (Occupancy Certificate-OC)
अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान
कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (Completion Certificate-CC)
पूरी टाइटल चेन (Complete chain of title) की जांच क्यों जरूरी?
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले यह देखना चाहिए कि मालिकाना हक सही तरीके से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित हुआ है या नहीं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि कोई जरूरी दस्तावेज गायब न हो और संपत्ति पर कोई कानूनी विवाद लंबित न हो।
घर खरीदने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
विक्रेता के मालिकाना हक की पूरी जांच करें।
प्रॉपर्टी की टाइटल हिस्ट्री जरूर देखें।
एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) प्राप्त करें।
बिल्डिंग की सभी मंजूरियां, OC और CC की जांच करें।
रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन जरूर कराएं।
बिजली, पानी और अन्य कनेक्शन अपने नाम पर ट्रांसफर कराएं।
कानूनी जांच क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, घर खरीदने से पहले सभी कानूनी दस्तावेजों की जांच करने से मालिकाना हक के विवाद, धोखाधड़ी, विरासत संबंधी दावों, होम लोन की समस्याओं और भविष्य में संपत्ति बेचने के दौरान आने वाली दिक्कतों से बचा जा सकता है। बड़ी कीमत की संपत्ति खरीदने से पहले किसी अनुभवी कानूनी विशेषज्ञ की सलाह लेना भी बेहतर माना जाता है।
