सच्चे भाव रखने से होते हैं कार्य आसान: मुनिश्री प्रणाम सागर
मुनिश्री प्रणाम सागर ने कहा कि जहां भाव है वहां पर काम अपने आप हो जाता है। कोई भी धार्मिक कार्य करने से पूर्व मन में सच्चे मन से भाव बनाना जरूरी है। जिसके भाव सच्चे हैं, कार्य अच्छा है तो परमात्मा भी उसका पूरा साथ देता है। सिद्धचक्र महामंडल विधान ऐसा महान विधान है कि जिसे करने और कराने से स्वयं को तो पुण्य लाभ मिलता ही है साथ ही पूरे परिवार और समाज का भी भला होता है और परमात्मा अपनी कृपा सभी पर बरसाते हैं।

मुनिश्री प्रणाम सागर ने कहा कि जहां भाव है वहां पर काम अपने आप हो जाता है। कोई भी धार्मिक कार्य करने से पूर्व मन में सच्चे मन से भाव बनाना जरूरी है। जिसके भाव सच्चे हैं, कार्य अच्छा है तो परमात्मा भी उसका पूरा साथ देता है। सिद्धचक्र महामंडल विधान ऐसा महान विधान है कि जिसे करने और कराने से स्वयं को तो पुण्य लाभ मिलता ही है साथ ही पूरे परिवार और समाज का भी भला होता है और परमात्मा अपनी कृपा सभी पर बरसाते हैं। वे आदिनाथ भवन सेक्टर 11 में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ में सोमवार को श्रावक-श्राविकाओं और धर्मप्रेमियों के उमड़े रैले को संबोधित कर रहे थे। सेक्टर 11 सहित शहर से भी विधान का लाभ लेने कई जैन श्रावक- श्राविकाएं पहुंचे।विधान में मेवाड़- वागड़ के विभिन्न क्षेत्रों से भी कई परिवार विधान में बैठने का पुण्य लाभ ले रहे हैं।
इस अवसर पर धर्मसभा में मुनिश्री ने कहा कि मन में जब मन्दिर बनाने का भाव आये तो प्रयास प्रारम्भ कर देना चाहिये। अगर शुद्ध मन और वचन से ऐसा करने का भाव मन में आता है परमात्मा की कृपा भी जरूर होगी और जमीन भी उपलब्ध हो जाएगी और मन्दिर निर्माण भी हो जाएगा।
आदिनाथ भगवान को रजत का छत्र चढ़ाया-अशोक शाह ने बताया कि सोमवार को सेक्टर 11 स्थित मन्दिर में आदिनाथ भगवान को बी एल धुलावत परिवार की ओर से रजत छत्र चढ़ाया गया। उनकी भक्ति भावना को देखते हुए धर्मसभा में उनका बहुमान भी किया गया। मदन देवड़ा ने बताया कि प्रातः श्रीजी की शांतिधारा एवं अभिषेक किया गया। आचार्य शांतिसागर की चित्र पट्टिका का अनावरण, दीप प्रज्वलन, मुनिश्री का पाद प्रक्षालन किया गया। शाम को शास्त्र प्रवचन, आनन्द यात्रा, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं मुनिश्री की आरती जैसे धार्मिक आयोजन हुए।
