दिल्ली-वाराणसी-पटना बुलेट कॉरिडोर परियोजना पर तेजी से कार्य जारी, NHSRCL ने रेल मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट
Udaipur Times, Delhi-Patna High-Speed Rail Corridor : नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने वाराणसी और पटना होते हुए दिल्ली को सिलीगुड़ी से जोड़ने वाले प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करके रेल मंत्रालय को सौंप दी है।
इस प्रस्तावित कॉरिडोर की लंबाई लगभग 865 किलोमीटर होने की उम्मीद है। बिहार में, यह रूट पटना और दूसरे जिलों से होकर गुजरेगा, जिससे राज्य और उत्तर भारत के बड़े शहरों के बीच हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है।
परियोजना को गति देने की देने की तैयारियां तेज
यह प्रोजेक्ट अपनी एडमिनिस्ट्रेटिव और टेक्निकल टीम को मजबूत करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार, इंडियन रेलवे ने सीनियर अधिकारियों से आवेदन मंगाए हैं और नियुक्तियां 30 दिनों के भीतर पूरी होने की उम्मीद है।
वरिष्ठ अधिकारियों की जाएगी नियुक्ति
7 सितंबर को जारी दो नोटिफिकेशन्स में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) और असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM) लेवल पर नियुक्तियों की जानकारी दी गई। प्रोजेक्ट से जुड़े कामों की देखरेख के लिए हर लेवल पर तीन अधिकारियों को नियुक्त करने का प्रस्ताव है। जैसे-जैसे प्रस्तावित कॉरिडोर पर काम आगे बढ़ेगा, अधिकारी पटना, दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी और नोएडा में ऑपरेशन्स से जुड़ेंगे।
पटना-दिल्ली का सफर हो सकता है तेज
एक बार कॉरिडोर के चालू हो जाने पर, प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल सर्विस पटना और दिल्ली के बीच यात्रा के समय को मौजूदा 10-12 घंटे से घटाकर लगभग चार से पांच घंटे कर सकती है। बिहार और दिल्ली-NCR के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए, कम समय की यात्रा से रोजगार, शिक्षा और बिजनेस के मौकों तक पहुंच बेहतर हो सकती है। इससे दिवाली और छठ जैसे पीक समय में यात्रा करना भी अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
बिजनेस यात्रा, टूरिज्म, शिक्षा और इन्वेस्टमेंट को मिलेगा बढ़ावा
अगर प्लान किया गया रूट लागू होता है, तो प्रस्तावित कॉरिडोर के फायदे पटना से आगे तक भी पहुंचेंगे। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और दूसरे बड़े सेंटर्स के साथ तेज़ कनेक्टिविटी से बिजनेस यात्रा, टूरिज्म, शिक्षा और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि, यह प्रोजेक्ट अभी प्लानिंग और डेवलपमेंट के स्टेज पर है। DPR रेल मंत्रालय को सौंप दी गई है, जबकि आगे की मंजूरियां, प्लानिंग और लागू करने के स्टेप्स से ही प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और आखिरकार इसके ऑपरेशन के बारे में पता चलेगा।