उदयपुर में न्यायिक अधिकारियों की कार्यशाला, लैंगिक समानता और साइबर अपराध पर हुआ मंथन

उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, सलूम्बर जिले के न्यायिक अधिकारिगण की एक दिवसीय त्रैमासिक कार्यशाला आयोजित

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Udaipur Judicial Workshop

 

 

Udaipur Times, 20 जुलाई 2026। राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर के तत्वावधान में उच्च न्यायलय के न्यायाधिपति विनीत कुमार माथुर की गरिमामय उपस्थिति में न्यायालय परिसर स्थित कांफ्रेंस हॉल में अप्रैल से जुलाई तिमाही की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। उक्त कार्यशाला में उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, सलूम्बर जिले के न्यायिक अधिकारीगण एवं न्यायाधीशगण  ने कार्यशाला में भाग लिया। 

न्यायाधिपति विनीत कुमार माथुर ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यशाला का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उदयपुर जिला एवं सेशन न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश गुप्ता, राजसमंद जिला एवं सेशन न्यायाधीश अल्का शर्मा, चित्तौड़गढ़ जिला एवं सेशन न्यायाधीश मान सिंह चुण्डावत, सलूम्बर जिला एवं सेशन न्यायाधीश रामेश्वर प्रसाद चौधरी मंचासीन रहे। 

कोर्ट मेनेजर सुनील जैन ने बताया कि कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए एजीजे 2 दमयंती पुरोहित एवं सीजेएम मनीष कुमार जोशी। मंच संचालन एनआई एक्ट क्रम संख्या 8 की न्यायिक मजिस्ट्रेट चेताली ने किया।

कार्यशाला में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने में न्यायाधीशों की भूमिका पर चर्चा करते हुए कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव और उत्पीड़न की रोकथाम के लिए पोश अधिनियम, 2013 के प्रावधान और प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार और गरिमा के संबंध में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के संवैधानिक अधिदेश और दिशानिर्देश पर भी चर्चा की गई। न्यायिक कार्यवाहियों और फैसलों में लिंग-तटस्थ शब्दों का उपयोग के संदर्भ में अपर्णा भट बनाम मध्य प्रदेश राज्य और हाल के फैसलों के आलोक में व्यापक विमर्श हुआ।

न्यायिक अधिकारियों को न्यायिक और प्रशासनिक कार्यवाहियों में लैंगिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने, दहेज संबंधी अपराधों के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक आयामों को समझने में उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अज़मल बेग मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के संदर्भ में महिलाओं के खिलाफ अपराध आदि विषयों पर भी वक्ताओं ने अपने वक्तव्य रखे।

डिजीटल अरेस्ट व साइबर अपराध पर हुई चर्चा

कार्यशाला में वर्तमान समय में डिजिटल गिरफ्तारी और अन्य साइबर अपराध में धन की बहाली के संबंध में विभिन्न निर्णयों के आलोक में व्यापक चर्चा की गई। सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सुओ मोटो रिट याचिका (क्रिमिनल) एवं अन्य याचिकाओं के संदर्भ में धन की कस्टडी बहाली और शिकायत निवारण के संबंध में लिए जाने वाले फैसलों की जानकारी विस्तार से दी गई। इस संबंध में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायतों के पंजीकरण की प्रक्रिया एवं उसके व्यापक प्रचार-प्रसार की जरूरत पर बल दिया गया। साथ ही बैंक खातों या संपत्ति को फ्रीज या होल्ड करने और जब्त करने की प्रक्रिया के तहत सक्षम न्यायालय का अधिकार क्षेत्र निश्चित करते हुए होल्ड पर रखी गई या जब्त की गई राशि की कस्टडी देने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इसी प्रकार सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के प्रासंगिक फैसलों का अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों के लिए सुलभ संदर्भ देते हुए तदनुसार निर्णय करने का आह्वान न्यायिक अधिकारियों ने किया।

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