मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के विवेकानन्द सभागार में चल रहे 11 वें इंटरनेशनल राइटर्स फेस्टिवल में शनिवार को दूसरे और अन्तिम दिन नवोदित एवं युवा रचनाकारों ने अपनी संवदेनाओं और भावनात्मक अभिव्यक्ति के जरिए श्रोताओं को अभिभूत कर दिया।
सुविवि के अंग्रेजी विभाग और इंडिया इंटर कांटिनेंटल कल्चरल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे इस भव्य लिटरेचर फेस्ट में युवा रचनाकारों के सत्र में युवा लेखकों ने अपनी कविताओं से खूब वाहवाही बटोरी।
प्रो अवधेश सिंह की अध्यक्षता में हुए इस सत्र में युवा रचनाकार दीपिका लाहोटी ने “अमन” शीर्षक की कविता से विश्व शान्ति एवं भाईचारे का सन्देश दिया। महेन्द्र सिंह पुराहित ने “लाइफ एंड डेथ” रचना में जीवन की नश्वरता एवं जीवन सौन्दर्य का चित्रण किया। डा. कुंजन आचार्य ने अपनी कृष्ण शृंंखला की रचना- “मन की कुछ कोरी दीवारें, उन पर तेरा नाम लिखा… नाम लिखा तो उसके भीतर कान्हा का चितराम दिखा” सुना कर श्रोताओं का मन मोह लिया। भनुप्रिया रोहिला ने -“लाइट आफ लाइफ” रचना में मन की शान्ति को जीवन का सूत्र बताया। नवोदित कवयित्री आरुषि व्यास ने- “उन गिरहों में कैद ना जाने कितने कैदी थे, मेरे मुल्क की कुछ सांसे वो बरसों से लिए बैठे थे।” सुना कर समां बांध दिया। रश्मि चौधरी ने “द होप” रचना में आशा को अमरधन बताया वहीं चिराग बाफना ने देशभक्ति से ओतप्रोत रचना का पाठ किया। इस अवसर पर डा वैभव शाह, निखिल मेहता, कोमल धाकड, सेतु भटनागर, अजय गोस्वामी, कृति लोढा और आयुरा ने अपनी मौलिक रचनाअें का पाठ कर खूब वाहवाही बटोरी।
राइटर्स फेस्ट की आयोजक प्रो सीमा मलिक ने बताया कि दूसरे दिन सुबह तीन अलग अलग चर्चा सत्र हुए जिनमें वैश्विक साहित्यिक परिदृश्य पर चर्चा मन्थन हुआ। पहले सत्र में कनाडा, उज्बेकिस्तान, फिलिपिन्स, श्रीलंका, कोस्टेरिका तथा बांग्लादेश के रचनाकारों ने अपनी अपनी भाषाओं में रचना पाठ किया। इस सत्र की अध्यक्षता अमेरिका से आई वर्ल्ड फेस्टिवल आफ पोयट्री की प्रबन्ध निदेशक लूज मारिया लोपेज ने की। लोपेज ने इस अवसर पर अपने संस्थान की ओर से श्रेष्ठ रचनाकारों को प्रमाण पत्र भी दिए।
शनिवार शाम को फेस्टिवल का समापन समारोह हुआ जिसमें आयोजक अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष प्रो सीमा मलिक तथा एसोसिएशन के अध्यक्ष देव भारद्वाज ने दो दिन के इस आयोजन का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इससे पूर्व विश्व शान्ति, सद्भाव और समकालीन विश्व साहित्य पर 10 देशों के लेखकों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
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