भारत की विविधता में एकता का साक्षी बना ‘आदि महोत्सव 2022 कोटड़ा’


भारत की विविधता में एकता का साक्षी बना ‘आदि महोत्सव 2022 कोटड़ा’ 

देश-प्रदेश की सांस्कृतिक झलक देख अभिभूत हुए पर्यटक
 

 
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थिरकी देश भर की जनजाति कला-संस्कृति, परंपरागत खेल और व्यंजनों ने मन मोहा

उदयपुर, 27 सितंबर। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान एवं पर्यटन विभाग के तत्वावधान में जिले के सुदूर आदिवासी अंचल कोटड़ा ब्लॉक में ‘आदि महोत्सव 2022 कोटड़ा’ का आगाज धूमधाम से हुआ। संभागीय आयुक्त राजेंद्र भट्ट व जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा ने विधिवत रूप से दीप प्रज्वलित कर इस रंगारंग महोत्सव का आगाज किया।
 

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पर्यटन के क्षेत्र में विश्व पटल पर अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले उदयपुर में आयोजित यह आदि महोत्सव भारत की विविधता में एकता की विशेषता का साक्षी बना। इस महोत्सव में मेवाड़ की लोक संस्कृति के साथ भारत के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध किया। भारत के विभिन्न प्रांतों से आए लोक कलाकारों ने अपने पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों एवं अपने प्रदेश की पौराणिक कथाओं व संस्कृति पर आधारित कार्यक्रमों की प्रस्तुति से माहौल को रंगीन बना दिया।
समारोह में जिला पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा उदयपुर सांसद अर्जुन लाल मीणा. झाड़ोल विधायक बाबूलाल खराड़ी, समाजसेवी लालसिंह झाला, लक्ष्मीनारायण पंड्या, सुनील भजात, रामलाल गाडरी सहित विभिन्न स्थानीय जनप्रतिनिधि विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं देश विदेश से आए पर्यटक मेहमान और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

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इन क्षेत्रों से आए नृत्य कलाकारों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपने क्षेत्र की उत्सवी परम्पराओं और संस्कृति को समेटे नृत्यों की प्रस्तुतियां देकर उपस्थित दर्शकों को देश के गौरवशाली इतिहास का परिचय कराया। इस दौरान पश्चिम बंगाल के नटुआ नृत्य, ओडिशा के सिंगारी नृत्य, गुजरात के राठवा नृत्य, महाराष्ट्र के सोंगी मुखौवटे नृत्य तथा मध्यप्रदेश के गुटुम्ब बाजा नृत्य की प्रस्तुतियों को दर्शक एकटक निहारते रह गए और भारतवर्ष की विभिन्न परम्परागत नृत्यशैलियों को देख स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया। इस दौरान राजस्थान के पारंपरिक गैर नृत्य, घूमर नृत्य, स्वांग व भवई सहित आदिवासी व जनजाति क्षेत्रों के पारंपरिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी दी गई।

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कार्यक्रम में आए अतिथियों और मेहमानों का स्वागत सत्कार भारतीय संस्कृति के अनुसार तिलक लगाकर, माला पहनाकर व गुड़ खिलाकर किया गया। वहीं अतिथियों और मेहमानों के आगमन के दौरान मुख्य द्वार से दोनों तरफ देश के विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों ने अपने लोक संस्कृति का परिचय देते हुए अगवानी की। इस अवसर पर देशी-विदेशी पर्यटकों ने ठेठ देशी खाने यथा मक्का व बाजरे की रोटी, राबड़ी, साग आदि का जायका लिया और शुद्ध खाने का रसास्वादन कर रोमांचित हो उठे।
 

रंगायन का हुआ विमोचन
आदि महोत्सव में भारतीय लोक कला मंडल के सांस्कृतिक प्रकाशन रंगायन का विमोचन अतिथियों के हाथों किया गया। रंगायन के संपादक भारतीय लोक कला मंडल के निदेशक लईक हुसैन ने बताया कि आदि महोत्सव के उपलक्ष्य में रंगायन का जनजाति विशेषांक प्रकाशित किया गया है जिसमें देश भर की जनजाति कला संस्कृति की जानकारी दी गई है।

 

प्रदर्शनी के माध्यम से दी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी
महोत्सव के शुभारभ के अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा विभागीय उपलब्धियों व जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से राजकीय एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल में प्रदर्शनी लगाई गई। पशुपालन विभाग द्वारा लगाई गई स्टॉल में गौवंश में फैल रही लंपी स्कीन बीमारी से बचाव व उपचार से संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी लोगों को प्रदान की गई। इसी प्रकार चिकित्सा विभाग द्वारा चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना सहित अन्य योजनाओं, कृषि विभाग द्वारा सीताफल के उन्नत बीजों से आधुनिक तौर तरीके अपनाकर खेती करने की जानकारी प्रदान की गई। इसके अलावा राजीविका, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, ग्रामीण मदद काशी फाउंडेशन की जैविक खेती विषयक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, आईसीआईसीआई आर्थिकी, वन विभाग सहित अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा लोककल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को प्रदर्शित करते पम्फलेट, फ्लैक्स, बैनर, पोस्टर, मॉडल सामग्री आदि का प्रदर्शन व वितरण किया गया। इस अवसर पर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, जयपुर द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘सुजस’ सहित अन्य महत्वपूर्ण साहित्य का वितरण किया गया जो कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए तथा आमजन के लिए भी उपलब्धिमूलक सिद्ध होगा।

 

जिला कलक्टर ने बारिकी से निहारा प्रत्येक गतिविधि को
इस अवसर पर जिला कलक्टर ताराचंद मीणा ने महोत्सव के दौरान आयोजित की जारी समस्त गतिविधियों का बारिकी से अवलोकन किया तथा बेहतर प्रबंधन व सुचारू व्यवस्थाओं के लिए अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने मीडियाकर्मियों को दिए संबोधन में कहा कि इस महोत्सव से देशी व विदेशी पर्यटकों को जल-जंगल को वर्षों से सहेजती आयी आदिवासी जीवनशैली को नज़दीक से देखने का मौका मिला है और निश्चित ही ऐसे आयोजनों से आदिवासी अंचलों में रोगजार के अवसर तो प्रदान होंगे ही, साथ ही देश-प्रदेश की वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक व गौरवशाली परंपराओं को भी अक्षुण्ण रखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से पर्यटन के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा गया है।

 

पारंपरिक खेलों को देख रोमांचित हुए पर्यटक
महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न परंपरागत खेल गतिविधियाँ आयोजित की गई। इसके तहत रस्साकसी, रुमाल झपट्टा, मटका दौड़ 50 मीटर सहित अन्य खेलों का आयोजन स्थानीय महिला पुरुषों व देशी विदेशी मेहमानों के लिए किया गया। इसके अलावा महोत्सव में पर्यटकों के लिए पानरवा में एडवेंचर स्पोर्ट्स, ट्रेकिंग, ट्री वॉक एवं नाल सान्दोल में जीप लाइन, वोटर रोलिंग जैसे एड्वेंचर स्पोर्ट्स का भी आयोजन किया गया जिससे पर्यटकों का उत्साह देखते ही बन रहा है।

 

आदिवासी महिलाओं के लिए वरदान बना आदि महोत्सव
उत्सव के तहत आयजनक गतिविधियों के लिए राजीविका कोटड़ा के 124 महिला समूहों को एक करोड़ पच्चीस लाख रुपए का क्रेडिट लिंकेज का चेक सौंपा। संभागीय आयुक्त सहित अन्य अतिथियों ने चौक सौंपते हुए महिला समूहों को बधाई दी। उन्होंने बताया कि क्रेडिट लिंकेज से महिला समूह आयजनक गतिविधियां कर सकेंगी।

 

विदेशी मेहमान भी हुए शामिल
आदि महोत्सव के पहले दिन जनजाति संस्कृति का दिग्दर्शन करने के लिए शहर से विदेशी पर्यटक भी पहुंचे । विदेशी पर्यटकों ने यहां पर जनजाति अंचल के व्यंजनों का लुत्फ उठाया और आदिवासी कला संस्कृति की झांकी देखकर मोहित हो उठे।

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