Anjum Ara became the first Muslim professor in the state to do PhD in Sanskrit

अंजुम आरा बनी संस्कृत में पीएचडी करने वाली प्रदेश की पहली मुस्लिम प्रोफ़ेसर

अंजुम आरा बनी संस्कृत में पीएचडी करने वाली प्रदेश की पहली मुस्लिम प्रोफ़ेसर

रामायण पर की पीएचडी

 
anjum ara

उदयपुर 5 नवंबर 2022। उदयपुर में एक बार फिर सांप्रदायिक सौहार्द्र कायम रहने की एक घटना सामने आई है, जिसने बात कही न कही साबित कर दी है की कोई भी मजहब किसी भी दुसरे मजहब के खिलाफ होना नहीं सिखाता। 

ऐसी ही एक मिसाल उदयपुर शहर के संभागीय संस्कृत शिक्षा अधिकारी सीनियर डीआई के पद कर कार्यरत अंजुम आरा ने कायम की है। दरअसल अंजुम ने आरपीएससी (RPSC) की परीक्षा दी और उसमे संस्कृत विषय में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की सुची में 21वां स्थान हासिल किया है। इसी के साथ अंजुम आरा संस्कृत में पीएचडी करने वाली प्रदेश की पहली मुस्लिम प्रोफ़ेसर बन गई है। 

अंजुम आरा ने बताया की वह 3 बहने है तीनो ही संस्कृत की छात्रा रही है और उदयपुर के राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविधालय से उन्होंने पढाई की है।  लेकिन उसे से पहले स्कूल स्तर पर उन्होंने संस्कृत को एक ऑप्शनल विषय के रूप में ही पढ़ा था। लेकिन संस्कृत को एक मुख्य विषय के रूप में चुनने में हो रही कशमकश का श्रेय वो अपने कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ.अवधेश कुमार मिश्र को देती है। वो बताती है की वो एक व्यक्ति थे जिन्होंने बताया कि संस्कृत विषय में भी करियर बनाया जा सकता है और उन्ही की हौंसला अफजाही की वजह से अंजुम आरा ने इसमें आगे पढ़ने का निर्णय लिया। 

अंजुम ने बताया की उनकी 2 अन्य बहने भी संस्कृत में ही आचार्य है। जहाँ छोटी बहन रुखसार बानो थर्ड ग्रेड टीचर है तो वहीँ बड़ी बहन भी संस्कृत की आचार्य है और टोंक में रहती है। उन्होए बताया की पीएचडी के दौरान उन्होंने कोटा के संकल्प क्लासेस से कोचिंग की थी जिसमे ब्रजेश गौतम सर ने उसकी काफी मदद की थी।  

उन्होंने कहा की उनके इस उपलब्धि में उनके पिता, पति और परिवार के अन्य सदस्यों का भी पूरा सहयोग है, उन्होंने अंजुम आरा को हमेशा सहयोग किया है और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं। 

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