Cricket Encyclopedia Late Professor L. N. In memory of Mathur, cricket carnival from October 28

क्रिकेट के ज्ञानकोष स्वर्गीय प्रोफेसर एल. एन. माथुर की स्मृति में क्रिकेट कार्निवल 28 अक्टूबर से

क्रिकेट के ज्ञानकोष स्वर्गीय प्रोफेसर एल. एन. माथुर की स्मृति में क्रिकेट कार्निवल 28 अक्टूबर से

प्रोफेसर एल. एन. माथुर ने क्रिकेट पर 12 किताबें लिखी

 
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क्रिकेट के ज्ञानकोष स्वर्गीय प्रोफेसर एल एन माथुर की स्मृति में क्रिकेट कार्निवल का 28 अक्टूबर से आयोजन किया जा रहा हैं। 

प्रोफेसर एल, एन, माथुर जीवन पर्यान्त क्रिकेट साहित्य पर शोध एवं लेखन करने वाले एक अग्रणीय व्यक्तित्व रहे है। कॉलेज जीवन से ही उनमे क्रिकेट खेलने और क्रिकेट साहित्य पर शोध करने और उसको लिखने मैं विशेष रूचि रही। शिक्षा में निपुण , खेल व् अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में अग्रणी होने के कारण उन्हें 1942 मैं गवर्नमेंट कॉलेज, अजमेर में गिब्सन गोल्ड मैडल प्रदान किया गया।  ये उनके लिए अत्यंत प्रेरणास्पद रहा और यही से उनकी शोध और लेखन की रूचि ने और ज्वाला पकड़ी। 

1946 में आपके द्वारा क्रिकेट पर लिखित प्रथम पुस्तक "फाइट फॉर द रबर" का प्रकाशन हुआ।  इंग्लैंड में भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा खेले गए समस्त मैचों का विस्तृत वर्णन सचित्र इस पुस्तक में बड़े रोचक रूप से किया गया है। समस्त खिलाड़ियों के प्रदर्शन के तुलनात्मक ब्योरा आंकड़ों सहित इस पुस्तक में बताया गया है। जब ये किताब लिखी गए थे उस समय प्रोफेसर एल.एन.माथुर की उम्र 24 वर्ष  थी और ये हम उस ज़माने की बात कर रहे है जब न तो ऑन लाइन आंकड़े उपलब्ध थी, न ही कंप्यूटर जिसपे टाइपिंग कर सकते थे। ये केवल एक वो ही व्यक्ति कर सकता था जिसमे कुछ करने का एक जूनून हो। 

इस किताब के पश्चात् प्रोफेसर एल, एन, माथुर ने 11 किताबे क्रिकेट पर लिखी जो आज की तारीख में किसी भी भारतीय द्वारा लिखी गए क्रिकेट पर सर्वाधिक किताबे है।  उनके द्वारा लिखी गए किताबे निम्न है

 - फाइट फॉर द रबर - 1946

- इंडियन क्रिकेटर्स इन ऑस्ट्रेलिया - 1948

- एमसीसी ( MCC ) इन इंडिया - 1951

- Encyclopedia ऑफ़ इंडियन क्रिकेट - 1966

- भारतीय क्रिकेट का ज्ञानकोष - 1969

- पोर्टरेट ऑफ़ इंडियन टेस्ट क्रिकेटर्स - 1983

- ड्रामेटिक  मूमेंट्स इन रणजी ट्रॉफी - 1987

- कपंडियम ऑफ़ इंडियन टेस्ट क्रिकेट - 1990

- इंडियन स्किप्पेर्स - 1993

- facts unbelievable - 1994

- CK Naydu - लीजेंड ऑफ़ हिज लाइफ टाइम - 1995

- DON BRADMAN - क्रिकेट विज़ार्ड – 1999

इन पुस्तको के लेखन के अतिरिक्त प्रोफेसर माथुर ने राजस्थान की धरती पर विदेशी टीमों के विरुद्ध खेले गए कई मैचों व राजस्थान के कई क्रिकेटर्स के बेनिफिट मैचेस के दौरान प्रकाशित सोवीनेर के प्रमुख संपादन का भी कार्य किया।  प्रोफेसर माथुर के लेखन की प्रतिभा को क्रिकेट जगत के कई महान हस्तियों ने भी सराहा है और उनके द्वारा  लिखित पुस्तको की प्रस्तावना लिखी और भारतीय पत्र पत्रिकाओं ने भी इन पुस्तको को ज्ञानवर्धक और रोचक बताया।

एक कुशल क्रिकेट प्रशंसक :

क्रिकेट के एक अच्छे रणजी ट्रॉफी खिलाडी होने  के साथ साथ प्रोफेसर माथुर एक लगनशील व कुशल क्रिकेट प्रशंसक भी थे। 1956 से 1971 के दौरान वे राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव रहे व इस दौरान वे भारतीय क्रिकेट कंट्रोम बोर्ड व सेंट्रल जोन की समितियों के सदस्य व अध्यक्ष भी रहे। उनके इस कार्यकाल में राजस्थान की टीम रणजी ट्रॉफी की उपविजेता रही और सेंट्रल जोन की विजेता रही।  उस ज़माने के कई वरिष्ठ और भूतपूर्व टेस्ट खिलाड़ियों से प्रोफेसर माथुर के घनिष्ठ व आदरणीय सम्बन्ध थे और सभी उनकी प्रतिभा की मान्यता रखते थे।

राजस्थान स्टेट स्पोर्ट्स कौंसिल द्वारा माउंट आबू में आयोजित वार्षिक कोचिंग कैंप के शुरुआत में कई वर्षो तक वो डायरेक्टर क्रिकेट रही व साथ साथ प्रशिक्षक का कार्य भी किया।  क्रिकेट राजस्थान और सेंट्रल जोन से खेलने वाले कई रणजी ट्रॉफी खिलाड़ियों इसी वार्षिक कैंपो की देन है। प्रोफेसर माथुर रणजी ट्रॉफी पैनल के क्रिकेट एम्पायर भी रहें है एवं रणजी ट्रॉफी क्रिकेट मैचेस में उन्होंने एंकरिंग भी की और रेडियो पर क्रिकेट कमेंट्री भी की। 

क्रिकेट वाले माथुर साहब के रूप में पहचान रखने वाले प्रोफेसर माथुर के लिए क्रिकेट उनकी जान 

28 अक्टूबर 1922 में गुरु पूर्णिमा के दिन जन्मे माथुर एक शिक्षाविद थी।  वे अपने कॉलेज के छात्रों को शिक्षा के साथ खेलकूद में रूचि लेने हेतु प्रोत्साहित करते थे।  वे बीएनपीजी कॉलेज उदयपुर , के प्रिंसिपल के पद से 1980 में रिटायर हुए।  रिटायर के अवसर पर आयोजित क्रिकेट मैच में वे स्वयं, उनके दोनों पुत्र ( रणजी / यूनिवर्सिटी प्लेयर्स ) और उनके 7 वर्षीय पुत्र भी खेले। ये अपने आप में एक अनोखा अवसर था क्योकि ऐसा पहली बार हुआ था और शायद आज भी ये एक वर्ल्ड रिकॉर्ड हो , जहाँ तीन पीढ़ी एक साथ एक मैच में खेली हो। 

गुरु पूर्णिमा के दिन जन्मे गुरु प्रोफेसर माथुर ने अपनी अंतिम साँस भी सन् 2000 में जुलाई माह में गुरु पूर्णिमा के दिन ही ली।  ऐसे शख्सियत ऐसे आदरणीय व्यक्तित्व को शत: शत : नमन क्रिकेट के ज्ञानकोष रहें स्वर्गीय प्रोफेसर माथुर के जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने हेतु उदयपुर डिस्ट्रिक्ट वेटेरन क्रिकेट एसोसिएशन, फील्ड क्लब, उदयपुर और माथुर परिवार संयुक्त रूप से एक यादगार समारोह 28 -30 अक्टूबर के बीच मनाने जा रहा है, जिसमे जयपुर क्लब, जयपुर और उदयपुर वेटेरन क्रिकेट टीम और उदयपुर फील्ड क्लब क्रिकेट टीम के बीच क्रिकेट मैच का आयोजन होगा। जिसमे कई पूर्व रणजी ट्रॉफी खिलाडी हिस्सेदार बनेंगे।  इसके अतिरिक्त उदयपुर की चार प्रमुख स्कूल की क्रिकेट टीमों के बीच एक टूर्नामेंट का आयोजन किया जायेगा।  तत्पश्चात 30 अक्टूबर को यादगार समारोह मनाया जायेगा जिसमे प्रोफेसर माथुर से जुड़े कई लोग शिरकत करेंगे और उनके क्रिकेट जीवन से जुडी कुछ यादगार लम्हे साझा करेंगे।

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