वंशलेखक जातियों के सर्वे में राव समाज के लोगों का विरोध


वंशलेखक जातियों के सर्वे में राव समाज के लोगों का विरोध

वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन एकेडमी जयपुर के अध्यक्ष द्वारा करवाये जा रहे वंशलेखक जातियों का सर्वे

 
rao samaj

वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन एकेडमी जयपुर के अध्यक्ष द्वारा करवाये जा रहे वंशलेखक जातियों के सर्वे में राव समाज के लोगों को उदयपुर में राव और ब्रह्मभट्ट शब्द को शामिल किए जाने का अब विरोध शुरू हो गया है। 

उदयपुर में राव समाज के लोगों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। राजस्थान राव समाज संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष डॉ कल्याण सिंह राव ने बताया कि वंशावली अकादमी द्वारा जारी पत्र में बड़वा, जाचक, भाट, जागा, राव एवं ब्रह्मभट्ट को शामिल करते हुए उन्हें वंशावली लेखको में शामिल किए जाने से समाज मे रोष है। 

संस्थान के अध्यक्ष ने बताया कि राव हमारी जाति है जिसका मौलिक पहचान ब्रह्मभट्ट है और रियासत काल से ही वें शासन के महत्वपूर्ण अभिन्न अंग रहे हैं। जिनकी गौरवमयी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सभी जानते है। हमारे समाज की सभ्यता संस्कृति क्षत्रिय है। राव राजपूत व शासनिक राव नाम से पूरे राजस्थान में जाना जाता हैं। जबकि वंशलेखक समुदाय को भाट, बड़वा, चंडीसा राव एवं बहीवचां राव के नाम से जानते हैं।

अध्यक्ष ने बताया कि राव समाज का बहीवंचा लेखक समाज से किसी भी प्रकार का कोई सरोकार नहीं है। इसलिए राव व ब्रह्मभट्ट संबोधन को इस सर्वे में अलग रखा जाए।

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