जिसकी दहाड़ से गूँज उठता था रणथम्बोर, आज वह गुमनाम ज़िंदगी जीने को है मजबूर

जिसकी दहाड़ से गूँज उठता था रणथम्बोर, आज वह गुमनाम ज़िंदगी जीने को है मजबूर 

T-24 टाइगर उर्फ़ उस्ताद लड़ रहा है अपनी बीमारी से

 
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T-24 उर्फ़ उस्ताद एक ऐसा रौबीला टाइगर, जिसकी दहाड़ से एक वक्त ररणथम्बोर  का पूरा जंगल दहल जाया करता था उसका  जंगल का राजा कहा जाता था, वो बीते 6 सालों से उदयपुर लाए लाए जाने के बाद एक गुमनामी की जिंदगी जीने को मजबूर है। 

टाइगर T24 पर मेन इटर होने के आरोप भी लगे थे. इसके बाद से उसे रणथम्बोर के जंगल से निकाल कर उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क 2016 में लाया गया। जहां वह एक छोटे से एन्क्लेजर एरिया में रह रहा हैं।

गौरतलब है इस अदभुत टाईगर का जन्म साल 2006 में रणथम्बोर  टाइगर रिजर्व में हुआ था, जब टाइगर झुमरू के घर तीन शावक का जन्म हुआ था। इनमें दूसरे नंबर का T24 उस्ताद का भी जन्म हुआ था। जन्म से ही अन्य टाइगर की तुलना में उस्ताद की आंखों में एक अलग ही चमक और चेहरे पर विशेष आकर्षण था। उस्ताद की मां का नाम गायत्री था। 

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उस्ताद कि माँ ने 2 अन्य शावकों कों भी जन्म दिया था, जिसमे बड़े शावक  का नाम T-23 भोला जबकि सबसे छोटे शावक T-34 का नाम कुंभा था। 

तीन भाइयों में उस्ताद चुलबुले स्वाभाव का था लेकिन उसकी जिंदगी शुरुआत से ही चुनौतियों भरी रही। चाहें कभी मेन इटर का दाग़ लगने कि बात हों, कभी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या फिर हाल ही में पैर कि बढ़ी हुई हड्डी जिसकी वजह से एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

डॉ. हंसराज ने बताया कि साल 2015-16 में टाईगर कि अचानक पेट में दर्द होने से तबियत बिगड़ी थी जिसके बाद उसका ऑपरेशन किया गया, लेकिन उसके बाद से भारी खाना बंद कर दिया गया।

उस्ताद नाम का ये टाइगर रणथम्बोर जंगल का मुख्य आकर्षण था, लेकिन उस्ताद ने अपने रणथम्बोर  के सफर के दौरान 4 लोगों कों शिकार भी बनाया था, जिसके बाद ये चर्चा में आया और इसी के बाद 2016 में इसे उदयपुर के सज्जनगढ बायलोजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया। जहां इन दिनों उसकी जिंदगी सिमित हों कर रह गई है क्यू कि इस यहाँ ना उस्ताद कों कोई देख सकता है ना उस्ताद किसी को, वो अपने इस एंकलोजर में ही घूमता रहता है और और अब पैर कि हड्डी बढ़ने के बाद उसने दहाड़ना भी कम कर दिया है।
 

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