अंबासा गांव में अधिकारीयों पर क्रूरता के आरोप
तीन माह के बच्चे को मां की गोद से खींचने का आरोप, पीड़ित महिलाओं ने संभागीय आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
उदयपुर 16 फरवरी 2026 - आदिवासी जनाधिकार एका मंच जिला कमेटी उदयपुर की ओर से झाड़ोल तहसील के अंबासा गांव में पुलिस और वनकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मंच के अनुसार 12 फरवरी को अंबासा गांव के कोदर फला में दो पुलिसकर्मी और उनके साथ गए 15 से 20 वनकर्मियों ने कार्रवाई के दौरान कथित रूप से क्रूरता दिखाई।
आरोप है कि इस दौरान तीन माह के बच्चे को उसकी मां की गोद से खींचकर नीचे गिरा दिया गया, जिससे बच्चे के शरीर पर चोट के निशान आ गए। सोमवार को पीड़ित महिलाएं पूर्व सांसद वृंदा करात के नेतृत्व में संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी से मिलीं और ज्ञापन सौंपकर दोषी पुलिसकर्मियों एवं वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई तथा बेदखली रोकने की मांग की।
आदिवासी जनाधिकार मंच के बाबूलाल वडेरा ने बताया कि कोटड़ा क्षेत्र के जुड़ा गांव के 25 से 30 आदिवासी परिवारों की जमीन बांध की सीमा में आने के कारण उन्हें वहां खेती करने से रोका गया था। इसके बाद उनका संपर्क अंबासा के तत्कालीन फॉरेस्टर प्रभु लाल मीणा से हुआ। आरोप है कि प्रभु लाल मीणा ने 12 लाख रुपये लेकर वन भूमि पर किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने और पट्टे दिलाने का आश्वासन दिया। परिवारों ने कथित रूप से अपने पशु और जेवर बेचकर यह राशि एकत्रित की और प्रभु लाल मीणा तथा रेंजर राजेश मीणा को दी। बाद में स्थानांतरण के बाद कार्रवाई शुरू कर दी गई।
माकपा जिला सचिव एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने आरोप लगाया कि एक ओर वन विभाग आदिवासियों से पैसे लेकर उन्हें वन भूमि पर बसाने और पट्टे देने का वादा करता है, वहीं दूसरी ओर हजारों आदिवासियों के लंबित आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही और बेदखली की कार्रवाई जारी है। उन्होंने पुलिस, वनकर्मियों और कुछ भाजपा नेताओं पर मिलीभगत का आरोप लगाया। मंच के अनुसार संभागीय आयुक्त ने मामले में उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रतिनिधिमंडल में आदिवासी जनाधिकार एका मंच के जिलाध्यक्ष हाकर चंद खराड़ी, सदस्य होलियाराम और माकपा शहर सचिव हीरालाल सालवी सहित अन्य लोग शामिल थे।