52 वर्ष की उम्र में दसवीं पास कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजसिंह सदाणा बने कनिष्ठ सहायक
Udaipur Times, Success Story: जब मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, किसी का प्रोत्साहन मिल जाए और खुद पर विश्वास हो, तो उम्र के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है। इस बात को सच कर दिखाया है सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, उदयपुर में पदस्थापित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राज सिंह सदाना ने।
कहते हैं कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। सपने देखने और उन्हें पूरा करने की कोई निर्धारित समय-सीमा भी नहीं होती। कुछ लोग अपनी जिंदगी में ऐसे उदाहरण प्रस्तुत कर जाते हैं, जो दूसरों के लिए प्रेरणा और समाज के लिए एक सीख बन जाते हैं। राज सिंह सदाना की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, उदयपुर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत राज सिंह सदाना अपनी नियमित जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे। जीवन अपनी सामान्य गति से आगे बढ़ रहा था, लेकिन उनके भीतर शिक्षा प्राप्त करने और जीवन में कुछ नया हासिल करने की इच्छा कहीं न कहीं मौजूद थी।
तत्कालीन समय में इसी दौरान कार्यालय में कार्यरत लेखा अधिकारी दिनकर खमेसरा ने उनकी इस इच्छा को पहचाना। उन्होंने राज सिंह सदाना को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और समझाया कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती। यदि मन में लगन और मेहनत करने का संकल्प हो, तो किसी भी उम्र में सफलता हासिल की जा सकती है। खमेसरा के इन्हीं प्रेरणादायक शब्दों ने राज सिंह सदाना के जीवन की दिशा बदल दी।
और फिर शुरू हुआ एक ऐसा सफर, जिसने उम्र की सीमाओं को पीछे छोड़ दिया
जब अधिकांश लोग 52 वर्ष की उम्र में पढ़ाई की कल्पना भी नहीं करते, उस उम्र में राज सिंह सदाना ने दसवीं कक्षा की परीक्षा देने का निर्णय लिया। उम्र का तकाजा, काम की जिम्मेदारियां और पढ़ाई से लंबे समय की दूरी जैसी अनेक चुनौतियां सामने थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दिनभर अपनी नौकरी की जिम्मेदारियां निभाने के बाद पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं था। फिर भी उन्होंने मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर 52 वर्ष की उम्र में दसवीं कक्षा उत्तीर्ण कर ली। यह उनके लिए केवल एक परीक्षा पास करना नहीं था, बल्कि अपने आत्मविश्वास और संकल्प की पहली बड़ी जीत थी। दसवीं की सफलता ने उनके भीतर एक नया उत्साह भर दिया। उन्होंने यहीं रुकना उचित नहीं समझा और आगे बढ़ते हुए बारहवीं कक्षा की पढ़ाई भी पूरी की। जिस व्यक्ति ने जीवन के 52वें वर्ष में दसवीं पास कर नई शुरुआत की थी, उसने अपनी निरंतर मेहनत से बारहवीं कक्षा भी उत्तीर्ण कर ली। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि सफलता पाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति, परिश्रम और निरंतर प्रयास मायने रखते हैं।
धनतेरस पर पदोन्नति की सौगात
मेहनत, शिक्षा के प्रति लगन और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति का सुखद परिणाम सामने आया। शुक्रवार 6 नवम्बर को धनतेरस के शुभ अवसर पर जारी विभागीय पदोन्नति सूची में राज सिंह सदाना को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से कनिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नति प्राप्त हुई। यह पदोन्नति केवल एक कर्मचारी की सेवा में हुई प्रगति नहीं है, बल्कि उस संघर्ष, संकल्प और आत्मविश्वास की जीत है, जिसने 52 वर्ष की उम्र में भी शिक्षा की नई राह चुनने का साहस दिखाया। उनकी यह कहानी केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि कार्यालय के प्रत्येक कर्मचारी, विशेषकर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपनी परिस्थितियों के कारण आगे बढ़ने से हिचकिचाते हैं।
पदोन्नति पर किया अभिनंदन
कनिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नत होने पर सदाणा ने उपनिदेशक गौरीकांत शर्मा के निर्देशन में शुक्रवार मध्यान्ह पश्चात पदभार ग्रहण किया। उपनिदेशक शर्मा सहित जनसंपर्क अधिकारी विपुल शर्मा, सहायक जनसंपर्क अधिकारी विनय सोमपुरा, जयेश पण्ड्या, वाणिज्यिक कर विभाग के लेखाधिकारी दिनकर खमेसरा, प्रशासनिक अधिकारी लक्ष्मणसिंह चौहान, सहायक प्रशासनिक अधिकारी वाचस्पति देराश्री, सहायक लेखाधिकारी जसवन्तसिंह भाटी, सूचना सहायक अशोक अटल, सुनील व्यास, सेवानिवृत्ति वरिष्ठ सहायक वीराराम बुनकर, सहायक कर्मचारी मनीष माली, आकाशदीप मेघवाल, कम्प्यूटर ऑपरेटर नेत्रपालसिंह शक्तावत, मीडिया सेल से नितेश मनौती, सहायक कर्मचारी हुकमीचंद मीणा आदि ने सदाणा का अभिनंदन किया। उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए नई जिम्मेदारी के साथ विभागीय कार्यों में बेहतर योगदान देने की अपेक्षा जताई।