उदयपुर मे रजिस्टर्ड वसीयत के बावजूद 5 साल तक एफडी का भुगतान रोका, बैंक ऑफ बड़ौदा पर 32 हजार का हर्जाना
Udaipur Times, Udaipur News उदयपुर मे मां की रजिस्टर्ड वसीयत होने के बावजूद बेटे को चार फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की राशि का भुगतान नहीं करना बैंक ऑफ बड़ौदा को भारी पड़ गया। उदयपुर की स्थायी लोक अदालत ने बैंक की कार्यप्रणाली को सेवा में कमी मानते हुए पीड़ित को चारों एफडी की पूरी राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 21 हजार रुपए और मुकदमे के खर्च के लिए 11 हजार रुपए, कुल 32 हजार रुपए का हर्जाना देने का भी आदेश दिया है।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष महेंद्र सिंह सिसोदिया तथा सदस्य प्रमोद कुमार दाणी और डॉ. सुरभि मेनारिया की पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के अनुसार, यदि बैंक एक महीने के भीतर भुगतान नहीं करता है, तो उसे 21 अक्टूबर 2021 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक पूरी राशि पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
मां ने 2008 में बेटे के नाम की थी रजिस्टर्ड वसीयत
मामला उदयपुर के सेंट्रल एरिया निवासी संजय पालीवाल से जुड़ा है। उनकी मां मनोहर देवी के बैंक ऑफ बड़ौदा की कृषि मंडी मार्केट यार्ड शाखा में चार एफडी खाते थे। मनोहर देवी ने 1 दिसंबर 2008 को इन जमा राशियों के संबंध में अपने बेटे संजय के नाम रजिस्टर्ड वसीयत कर दी थी।
1 अप्रैल 2021 को मनोहर देवी का निधन हो गया। इसके बाद संजय ने वसीयत के आधार पर चारों एफडी की राशि अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया। लेकिन बैंक ने भुगतान करने के बजाय उनसे वसीयत का प्रोबेट यानी अदालत से प्रमाणित करवाने की शर्त रख दी। इसके चलते भुगतान लंबे समय तक अटका रहा।
अदालत ने ब्याज सहित भुगतान के दिए आदेश
संजय ने बैंक की इस कार्यवाही के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में मामला पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने बैंक की कार्यप्रणाली को गंभीर लापरवाही और सेवा में कमी माना। अदालत ने बैंक को चारों एफडी की पूरी राशि ब्याज सहित लौटाने और 32 हजार रुपए का हर्जाना देने का आदेश दिया। साथ ही निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने के निर्देश भी दिए।