Udaipur Times, Bharatpur News: 1920 में महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति में पूर्वी राजस्थान की पहचान बन चुका यह मेला 107वीं बार आयोजित हो रहा है।
श्री जसवंत प्रदर्शनी एवं पशु मेले का शुभारंभ गुरुवार को भरतपुर जिला मुख्यालय पर विधि-विधान से ध्वजारोहण के साथ हुआ। गृह राज्य एवं पशुपालन राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम और जिला कलक्टर कमर चौधरी ने पूजा-अर्चना के बाद ध्वजारोहण किया और फीता खोलकर मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मेयर अनुराधा सिंह सहित जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि मेले हमारी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के साथ रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हैं। इनके माध्यम से आमजन को जरूरत का सामान भी मिलता है। उन्होंने कहा कि रियासतकाल में उन्नत पशुपालन को बढावा देने के लिए यह मेला स्थानीय किसानों एवं पशुपालकों का केन्द्र था, व्यापारीवर्ग को भी इस मेले से आय होती थी। वहीं आमजन को रोजमर्रा की जरूरतों का सामान एक ही स्थान पर उपलब्ध हो जाता था।
उन्होंने बताया कि महाराजा किशन सिंह ने वर्ष 1920 में अपने दादा महाराजा जसवंत सिंह की स्मृति में इस मेले की शुरुआत की थी। पूर्वी राजस्थान की पहचान बन चुका यह मेला 107वीं बार आयोजित हो रहा है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों सहित देशभर से पशुपालक, व्यापारी और आमजन यहां पहुंचते हैं। उन्होंने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेल प्रतियोगिताओं का ऐतिहासिक स्वरूप बनाए रखने तथा व्यापारियों के संरक्षण, आमजन की सुरक्षा और मनोरंजन की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
जिला कलक्टर कमर चौधरी ने कहा कि मेले में सुविधाओं के विस्तार और व्यापारियों के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। मेला मैदान और नुमाइश स्थल के स्वरूप को निखारने के साथ जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नाला निर्माण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए मेला स्थल पर सौंदर्यीकरण के कार्य भी कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा नुमाइस मैदान के विकास के अनेक कार्य प्रगतिरत है तथा आने वाले समय में सौन्दर्यकरण एवं मूलभूत सुविधाओं के कार्य भी प्रस्तावित किए गए है।
मेला अधिकारी एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अरविंद चौधरी ने बताया कि 1920 से शुरू हुआ यह मेला राज्य के 10 प्रमुख मेलों में शामिल है। वर्ष 1963 से इसे प्रतिवर्ष राज्य स्तरीय मेले के रूप में आयोजित किया जा रहा है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा से दुकानदार मेले में आते हैं।
मेले में भजन, जकड़ी, नौटंकी और ढोला गायन के साथ राष्ट्रीय स्तर का कुश्ती दंगल, रावण दहन और सांस्कृतिक संध्या आयोजित होगी। मनोरंजन के लिए झूले, सर्कस, मौत का कुआं, ब्रेक डांस, ड्रैगन, नाव और जादू सहित कई आकर्षण भी रहेंगे। डॉ. चौधरी ने बताया कि गत वर्ष मेले से 92 लाख रुपये की आय हुई थी, जबकि इस वर्ष अब तक 1 करोड़ 17 लाख 98 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हो चुकी है।
अतिरिक्त निदेशक पशुपालन खुशीराम मीना ने अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद मृदुल सिंह, अतिरिक्त कलेक्टर शहर राहुल सैनी, जिला अध्यक्ष शिवानी दायमा, गिरधारी तिवारी, सत्येंद्र गोयल, रूपेंद्र सिंह, जगत सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।