केन्द्रीय श्रमिक संगठनों का मजदूर दिवस पर प्रदर्शन

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की समन्वय समिति ने किया प्रदर्शन 
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उदयपुर 1 मई 2026। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने आज ज़िला कलेक्टर कार्यालय पर मजदूर दिवस के मौके पर प्रदर्शन करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों पर मजदूर विरोधी नीतियों को लागू करने और देश के वास्तविक कमेरे वर्ग को दुर्दशा में पहुंचाने का आरोप लगाया। 

उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते प्रोफेसर हेमेन्द्र चंडालिया ने कहा कि मई दिवस मजदूर वर्ग के संघर्ष, बलिदान और एकता का प्रतीक है। यह वह दिन है जब दुनिया भर का मजदूर उन शहीदों याद करते हैं जिन्होंने 8 घंटे काम के काम के लिए लड़ाई लड़ते हुए बलिदान दिया। ट्रेड यूनियंस के स्थानीय समन्वयक पी.एस. खींची ने कहा कि आज जब पूंजीवाद नए रूपों में मजदूरों का शोषण कर रहा है-ठेका प्रथा, बेरोजगारी मंहगायी, श्रम कानूनों में बदलाव के ज़रिए मई दिवस की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।

जानी मानी लेखिका और अम्बेडकरवादी बुद्धिजीवी, हिंदुस्तान जिंक की पूर्व हिंदी अधिकारी कुसुम मेघवाल में कहा कि यह दिन हमें याद दिलाता है कि संघर्षों के दम पर ही हम अपने हक हासिल कर सकते हैं। ऐपवा की राज्य सचिव कामरेड फरहत बानो ने कहा कि सरकार एक तरफ़ तो महिलाओं को रात्रि पारी में काम करने का क़ानून बनाकर महिला हितैषी होने का दावा करती है जबकि आज देश में महिलाएं दिन में भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में महिलाओं को समान काम के लिए आम तौर पर पुरुषों के मुकाबले 30-40 प्रतिशत तक कम वेतन मिलता है।

सीटू के जिला सचिव राजेश सिंघवी ने कहा कि आज जहां दुनिया के विकसित देशों में नई टेक्नॉलजी के कारण मजदूर की उत्पादकता बढ़ जाने से काम के घंटे 8 से घटाकर 6 किए जा रहे हैं, हमारे देश की सरकार काम के घंटे आठ से बढ़ाकर बारह करने पर आमादा है।

इंटक के वरिष्ठ नेता इंदु शेखर व्यास ने कहा कि आज केंद्र की मोदी सरकार पूँजीपत्तियों का मुनाफा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किए हुए हुए है जबकि उत्पादन व्यवस्था में मजदूरों की भूमिका महत्वपूर्ण है, देश के विकास के लिए सरकार को संतुलित श्रम नीति अपनानी होगी। 

ऐक्टू के कामरेड चंद्रदेव ओला ने कहा कि मोदी सरकार कॉर्पोरेट हितों को साधने के लिए मजदूरों का बेइंतहा शोषण कर रही है, मजदूर वर्ग इस रवैये को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। जीवन बीमा निगम के यूनियन नेता मोहन लाल सिंहाल ने कहा कि सरकार सार्वजनिक उपक्रमों का ताबड़ तौड़ निजीकरण कर रही जो देश में बेरोजगारी पैदा करने के हालत बना रहा है जबकि इन उपक्रमों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। 

उन्होंने यह भी कहा कि चुनिंदा कॉर्पोरेट निजी कंपनियों को बचाने और उनको अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों की बलि चढ़ायी जा रही है। एडवोकेट अरुण व्यास ने कहा कि सरकार ने एक सुनिश्चित योजना के तहत लेबर कानूनों एवम् एनफोर्समेंट ढांचे को कमजोर कर मजदूर वर्ग का बड़ा अहित किया है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए भाकपा-माले के राज्य सचिव शंकरलाल चौधरी ने कहा कि आज हम ऐसे समय में मजदूर दिवस मना रहे हैं जब सरकार ने मजदूर वर्ग के एक-सौ साल से भी अधिक समय से अर्जित 29 श्रम कानूनों जिन्हें समाप्त कर उनमें प्राप्त कल्याणकारी अधिकारों को समाप्त कर दिए जाने का ख़तरा मंडरा रहा है। मज़दूर वर्ग में भारी असंतोष है जिसका नतीजा हाल ही में नोएडा, भिवाड़ी, निमराना, पंजाब रिफाइनरी में विस्फोटक हालत पैदा हुए। मई दिवस इसलिए आज पहले से भी अधिक प्रासंगिक हो चला है। मजदूर वर्ग को संकल्पित एवम संगठित होकर ही संघर्ष के बलबूते ही अपने अधिकार प्राप्त कर सकेगा।

सभा को सीटू के हीरा लाल सालवी, खुस्वेन्द्र कुमावत एवम् बैंक यूनियन के विनोद कपूर, शिक्षक संघ से मदन सिंघटवाड़िया ने भी संबोधित किया। अंत में प्रतिनिधियों की तरफ़ से पीएस खींची के नेतृत्व में जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम दस सूत्री मांगपत्र का ज्ञापन सौंपा गया।

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