100 दिन चलेगा बाल विवाह मुक्त भारत विशेष अभियान

बाल विवाह मुक्त भारत की ओर बढ़े कदम, मशाल यात्रा बनी जन-जागरूकता  का प्रतीक 
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उदयपुर 28 नवंबर 2025। “ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के” इन पंक्तियों को सार्थक करते हुए जिले की वल्लभनगर पंचायत की दरौली ग्राम पंचायत बाल विवाह जैसी कुप्रथा के विरुद्ध एक बड़े जन-जागरण का केंद्र बन गई। 

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आह्वान पर चल रहे बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के समर्थन में गायत्री सेवा संस्थान और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को एक विशाल जागरूकता एवं संकल्प कार्यक्रम आयोजित हुआ | जिसमें ग्रामीण समुदाय, महिलाएँ, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। गांव के श्री यादे देवी मंदिर प्रांगण  में आयोजित इस कार्यक्रम में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने का संदेश मशाल यात्रा और सामूहिक शपथ के माध्यम से दिया गया। ग्रामीणों की भागीदारी और माहौल की ऊर्जा इस बात का संकेत थी कि समाज अब बदलाव के लिए तैयार है और बाल विवाह के विरुद्ध एकजुटता के साथ खड़ा हो रहा है।

इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित पूर्व राज्य मंत्री और पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान बाल आयोग मनन चतुर्वेदी ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है l सामूहिक प्रयास से इस कलंक को समाज से मिटाना होगा l चतुर्वेदी ने बताया कि समय की आवश्यकता है कि समाज बालिकाओं की शिक्षा व सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। इस दिशा में गायत्री सेवा संस्थान और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन नेटवर्क के प्रयास सराहनीय है l 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गायत्री सेवा संस्थान के निदेशक एवं बाल अधिकार विशेषज्ञ डॉ. शैलेन्द्र पंड्या ने कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब वह अपने बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बनने का अवसर दे। हमारा संकल्प है कि इस क्षेत्र को एक वर्ष के भीतर बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाए और इसके लिए हम हर गांव, हर मोहल्ले और हर परिवार तक इस अभियान का संदेश पहुंचा रहे हैं। हमारा उद्देश्य समुदाय को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और क्षेत्र को एक वर्ष के भीतर पूर्णतः बाल विवाह मुक्त मॉडल पंचायत के रूप में विकसित करना है। संस्था ने इसी लक्ष्य के तहत 100 दिवसीय गहन जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत की है, जिसके माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा और युवा-समूहों व महिला नेतृत्व को मजबूत बनाया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन नेटवर्क से जुड़े संगठनों ने पिछले वर्ष देशभर में एक लाख से अधिक बाल विवाह रोकने में सफलता हासिल की है, जो सामूहिक प्रयासों के प्रभाव का प्रमाण है।

इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चेतना भाटी ने कहा कि बाल विवाह रोकने में पुलिस के साथ-साथ समुदाय की पहल सबसे प्रभावी भूमिका निभाती है, इसलिए हर परिवार को इस अभियान का भागीदार बनना होगा। 

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष यशोदा पणीया  ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के बचपन, शिक्षा और स्वास्थ्य सभी को प्रभावित करता है, इसलिए इसकी रोकथाम प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

कार्यक्रम का समापन वृहद मशाल यात्रा के साथ हुआ, जिसमें ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से यह शपथ ली कि गांव में किसी भी परिस्थिति में बाल विवाह नहीं होने देंगे और बच्चों के प्रति होने वाले इस अन्याय के खिलाफ हमेशा खड़े रहेंगे। मशाल यात्रा के दौरान बच्चों और युवाओं में देखा गया उत्साह दर्शाता था कि नई पीढ़ी अब इस कुप्रथा को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की शुरुआत है, और जल्द ही यह क्षेत्र बाल विवाह मुक्त बनने की दिशा में एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत करेगा। 

कार्यक्रम के अंत में स्थानीय सरपंच रोड़ी लाल यह संकल्प लिया की यदि ग्राम पंचायत में कोई बाल विवाह की सूचना प्राप्त होगी तो पंचायत सर्वप्रथम उस पर कार्यवाही करेगा यहाँ कहते हुए उन्होंने सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया | 

कार्यक्रम का संचालन समन्वयक नितिन पालीवाल ने किया एवं क्रायक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विवेक पालीवाल, सूरजमल , मुकेश सहित ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे |

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