डीज़ल निर्यात पर 34 रुपये की बढ़ोतरी

क्या अब सस्ता होगा सामान?

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नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2026। केंद्र सरकार ने डीज़ल पर निर्यात शुल्क में तत्काल प्रभाव से वृद्धि कर दी है। अब डीज़ल पर निर्यात शुल्क 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। सरकार का यह फैसला देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) पर भी निर्यात शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि पेट्रोल पर निर्यात शुल्क फिलहाल शून्य ही रखा गया है।

सरकार द्वारा डीज़ल पर 34 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है। दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ऐसे में निजी रिफाइनरियां अधिक मुनाफे के लिए घरेलू बाजार के बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेच रही थीं। अब निर्यात शुल्क बढ़ने से उनके लिए विदेश में बिक्री महंगी हो जाएगी, जिससे वे घरेलू बाजार में ज्यादा सप्लाई करने के लिए प्रेरित होंगी। इससे देश में संभावित ईंधन संकट का खतरा भी कम होगा।

आर्थिक दृष्टि से यह फैसला सरकार के राजस्व और महंगाई दोनों पर असर डालेगा। निर्यात शुल्क से मिलने वाली अतिरिक्त आय सरकार को राजकोषीय घाटा कम करने और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में मदद करेगी।

वहीं, घरेलू स्तर पर डीज़ल की लगातार उपलब्धता से माल ढुलाई यानी लॉजिस्टिक्स की लागत स्थिर बनी रहेगी। इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा, क्योंकि फल, सब्जी और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर, वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

Source: Media Reports

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