मरीज़ की जान बचाने के लिए डॉ साहब ने सम्भाली स्टीयरिंग
मरीजों की आर्थिक हालात को देखकर 24 घंटे तैयार रहते है मरीज़ों की सहायता के लिए
पिछले 15 वर्षों से झाडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चालक की पोस्टिंग नहीं की गई है
इंसानों को नई जिंदगी देने वाले डॉक्टर्स ही पृथ्वी भगवान के जीते-जागते उदाहरण हैं। अगर पृथ्वी पर किसी ने भगवान को देखा है तो वो सिर्फ सफेद कोट पहले दिन काम करने वाले डॉक्टर्स ही हो सकते हैं। उदयपुर के झाड़ोल में कुछ इसी तरह का दृश्य सामने आया हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ. रमेश कटारा खुद एंबुलेस के चालक बन कर मरीजों को कभी अस्पताल से घर तो कभी रेफर मरीजों को उदयपुर लेकर पहुंच जाते हैं। ऐसे में ना तो कभी उन्होंने समय देखा ना ड्यूटी टाइम बस 24 घंटों में कभी भी मरीज को वाहन की असुविधा होते देख डॉ रमेश एंबुलेंस लेकर मरीजों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
15 वर्षों से झाडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चालक की पोस्टिंग नहीं
दरअसल झाडोल के करीब 282 गांव से मरीज आते हैं। आपातकाल सेवा के लिए झाड़ोल में 108 से लगाकर 104 तक की सेवा उपलब्ध है। वहीं, झाडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर विधायक मद से एक एंबुलेंस भी उपलब्ध है, पूर्व में भी करीब 10 वर्षों से एंबुलेंस उपलब्ध है, जो अब खटारा हो चुकी है, इतने वर्षों से एंबुलेंस के बावजूद सरकार द्वारा पिछले 15 वर्षों से झाडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चालक की पोस्टिंग नहीं की गई है, जिससे कई बार मरीजों को ऊंचे दाम पर निजी वाहन कर अन्य अस्पतालों में उपचार के लिए ले जाना पड़ता है।
डॉक्टरी ऐसा पेशा है जिस पर लोगों का बहुत विश्वास होता हैं
चिकित्सा प्रभारी डॉ. रमेश कटारा का कहना है कि झाडोल आदिवासी क्षेत्र हैं सरकारी अस्पतालों में ज्यादातर मरीजों की आर्थिक स्थिति सही नहीं हैं। कई मरीज़ों के पास दवाईयों के लिए भी रुपए नहीं होते हैं। इसलिए मरीज़ों की सेवा करने से सकुन मिलता हैं। डॉक्टरी ऐसा पेशा है जिस पर लोगों का बहुत विश्वास होता हैं। उसी विश्वास को जिंदा रखने के लिए चिकित्सक मरीज़ की जान बचाने का हर रोज़ अथक प्रयास करता हैं। उन्होनें बताया कि पिछले 7 माह में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सफाई व्यवस्था के मामले में भी झाडोल को अव्वल दर्जा दिया गया था।
